जम्मू-कश्मीर में मंडरा रहा एक अदृश्य किस्म का आतंक

जम्मू-कश्मीर में एक किस्म के आतंक का खतरा मंडरा ( New kind of terror ) रहा है। खतरा भी ऐसा जो घाटी के अंदर ही ( Terror inside Ghati ) मौजूद है और इस दुश्मन से निपटने में सेना व पुलिस सक्षम नहीं है। आंखों से नहीं दिखाई देने वाला यह खतरा ( Invisible Terror ) है आम लोगों की सेहत ( Terror on Health ) का। घाटी के लोग हर दिन इस खतरे के बीच से गुजरते हैं।

 

 

By: Yogendra Yogi

Published: 08 Dec 2019, 06:20 PM IST

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में एक किस्म के आतंक का खतरा मंडरा ( New kind of terror ) रहा है। खतरा भी ऐसा जो घाटी के अंदर ही ( Terror inside Ghati ) मौजूद है और इस दुश्मन से निपटने में सेना व पुलिस सक्षम नहीं है। आंखों से नहीं दिखाई देने वाला यह खतरा ( Invisible Terror ) है आम लोगों की सेहत ( Terror on Health ) का। घाटी के लोग हर दिन इस खतरे के बीच से गुजरते हैं। यह खतरा कम होने के बजाए सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता ही जा रहा है। जी हां हम बात कर रहे हैं वायु प्रदूषण की। जहां दिल्ली जैसे राज्य गैस चेम्बर ( Delhi Gas Chamber ) में तब्दील हो चुके हैं, वहीं घाटी की हरी-भरी वादियों में यह धीमा जहर पांव पसार रहा है। इससे लोगों की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) इस खतरे को लेकर सतर्क हो गया है। न्यायिक शक्ति प्राप्त एनजीटी ने इस मामले में जम्मू-कश्मीर प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। एनजीटी ने प्रदूषण के स्तर से निपटने की कार्य योजना को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं।

अधिकारी का दावा अभी खतरनाक स्तर नहीं
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा, "हालांकि प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक नहीं बढ़ा है, लेकिन हम जम्मू और श्रीनगर शहरों के बारे में चिंतित हैं, जो चिंता का विषय है। प्रदूषण स्तर कम होना हर किसी की जिम्मेदारी है।"

एनजीटी ने मांगी कार्य योजना
एनजीटी ने अपने निदेर्शों में कहा है, "कार्य योजनाएं ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी), स्वच्छ वायु कार्यक्रम और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना और अन्य सभी प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रख सकती हैं।" गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पुलिस विभाग को श्रीनगर में वायु प्रदूषण के स्तर पर नियंत्रण के लिए अच्छे यातायात प्रबंधन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिए हैं। शहर में वायु प्रदूषण भार के लिए लगातार यातायात भीड़ को मुख्य योगदान माना जाता है।

बेहतर हो यातायात प्रबंधन
इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए, प्रशासन ने यातायात पुलिस विभाग को निर्देश दिए हंै कि बेहतर यातायात प्रबंधन को सुनिश्चित किया जाए, जिसमें भीड़ से बचने के लिए यातायात का पुनर्निर्देशन शामिल है। एक आधिकारिक दस्तावेज में बताया गया है कि "यातायात घनत्व और सड़कों की क्षमता का ध्यान रखना आवश्यक है। भीड़भाड़ से बचने के लिए प्रभावी यातायात और न्यूनतम यातायात की आवश्यकता है।

हवा की गुणवत्ता में आई गिरावट
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, श्रीनगर में पांच वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों के बीच, शेरी कश्मीर सूरा के पास हवा की गुणवत्ता 72.69 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई थी जो शहर में सबसे अधिक है।
कश्मीर में हर महीने लगभग 5,000 नए निजी वाहन सड़कों पर निकलते हैं। नए केंद्र शासित प्रदेश में अकेले घाटी में 6.5 लाख के साथ लगभग 14 लाख वाहन हैं।

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