ढाई करोड़ की लागत से लग रहे क्रैश बैरियर, हादसों पर लगेगी लगाम

Jammu Kashmir: राज्य में सडक़ दुर्घटनाओं में हर साल दर्जनों लोग मारे जाते हैं। इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए 35 बीकन के अधीन 118 आरसीसी ग्रेफ ने किश्तवाड़ से लेकर तैयारी तक...

जम्मू. राज्य में सडक़ दुर्घटनाओं में हर साल दर्जनों लोग मारे जाते हैं। इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए 35 बीकन के अधीन 118 आरसीसी ग्रेफ ने किश्तवाड़ से लेकर तैयारी तक खतरनाक मोड़ों और सबसे ज्यादा ऊंचाई वाले इलाको में क्रैश बैरियर लगाने का काम शुरू किया है। क्रैश बैरियर लग जाने से किश्तवाड़-पाडर सडक़ मार्ग पर होने वाले हादसों पर ब्रेक लगेगी। बता दें यहां ज्यादातर सडक़ चौड़ी करने के बाद तारकोल बिछाकर पक्की कर दी गई है। सडक़ के अच्छी होने प चालक अपने वाहनों की गति भी बढ़ा देते हैं, जिसके चलते पहाड़ी इलाके में ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं। इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ग्रेफ सडक़ के किनारे लोहे के मजबूत क्रैश बैरियर लगा रही है। इन क्रैश बैरियर से वाहन नीचे खाई या दरिया में जाने से रुक जाएगा और कई लोगों की जानें भी बच सकती है। फिलहाल ग्रेफ ने कुछ ऐसे प्वाइंट चुने हैं, जहां ज्यादा खतरा है। ग्रेफ ने जिन जगहों को क्रैश बैरियर लगाने के लिए चुना है, उस क्षेत्र की कुल लंबाई 11 किलोमीटर है। यानी किश्तवाड़ से लेकर तैयारी तक 82 किलोमीटर सडक़ में से फिलहाल खतरनाक मोड़ों और ऊंचाई वाले स्थानों पर यह क्रैश बैरियर लग रहे हैं। ग्रेफ अधिकारियों के मुताबिक क्रैश बैरियरों को लगाने में ढाई करोड़ रुपए का अनुमानित खर्च आएगा। 11 किलोमीटर एरिया में क्रैश बैरियर लगने के बाद अन्य स्थानों पर क्रैश बैरियर लगाने के लिए नया प्रपोजल भी बनाया है। फिलहाल कुछ जगहों पर सडक़ को खुला करने का काम अभी चल रहा है। पिछले कई साल से गुलाबगढ़ से लेकर किश्तवाड़ तक कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें कई लोग जान गंवा चुके हैं। 2018 में सबसे बड़ी दुर्घटना डुल कवाड के पास हुई थी, जिसमें 12 लोगों की जान चली गई थी। सेना अधिकारियों ने कहा कि क्रैश बैरियर लगाने का काम किया जा रहा है। इनके लगने से हादसों में कमी आएगी। बटोत-किश्तवाड़ मार्ग पर और क्रैश बैरियर की जरूरत है। कुछ साल पहले जब बटोत से लेकर किश्तवाड़ तक और किश्तवाड़ से संथनटॉप तक की सडक़ बीकन के पास थी, उस समय वहां भी सारी सडक़ पर क्रैश बैरियर लगाने का काम शुरू किया था। बहुत से स्थानों पर क्रैश बैरियर लगाए जा चुके थे, मगर अचानक यह सडक़ पीडब्ल्यूडी को सौंप दी गई। पीडब्ल्यूडी ने अपने आगे एनएचआइडीसीएल को सौंप दी है। जिसके चलते काम जहां था, वहीं पड़ा है। आए दिन बटोत-किश्तवाड़ सडक़ पर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। अगर इस सडक़ पर भी क्रैश बैरियर पूरे लग जाएं तो यहां पर भी दुर्घटनाओं पर लगाम लग सकती है।

Nitin Bhal
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