इन नियमों के आधार पर तय होगी जम्मू-कश्मीर में नागरिकता, नई डोमिसाइल नीति तैयार

आवेदन के 15 दिन में मिलेगा जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir news) में (Jammu Kashmir New Domicile law) डोमिसाइल प्रमाणपत्र (Jammu Kashmir New Domicile Certificate) , विस्थापित को मिलेगा फायदा (Jammu Kashmir New Domicile Rules Implemented)...

 

By: Prateek

Updated: 19 May 2020, 08:27 PM IST

योगेश सगोात्रा
जम्मू: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल प्रमाणपत्र बनवाने के लिए राज्य सरकार ने नियम अधिसूचित कर दिए हैं। इन नियमों के अनुसार ही अब जम्मू—कश्मीर में लोगों की नागरिकता तय की जाएगी और उन्हें डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। इसमें बड़ी बात यह है कि आवेदन के बाद संबंधित अधिकारी को महज 15 दिन में डोमिसाइल प्रमाणपत्र बनाकर देना होगा। आवेदन नामंजूर भी होता है तो भी इसकी जानकारी इन्हीं 15 दिन के भीतर देनी होगी।

 

इसलिए होगा जरूरी...

यूटी में किसी भी श्रेणी की नौकरियों में आवेदन करने के लिए यह प्रमाण पत्र आवश्यक होगा। संविधान के अनुच्छेद 309 और जम्मू कश्मीर सिविल सर्विस (डिसेंट्रललाइजेशन एंड रिक्रूटमेंट) एक्ट 2010 के तहत जम्मू—कश्मीर सरकार ने डोमिसाइल सर्टिफिकेट प्रोसीजर रूल्स- 2020 को जारी कर दिया है। सूचना विभाग के प्रमुख सचिव और प्रदेश सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल ने इस संदर्भ में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह प्रमाण पत्र बनाने का तरीका सरल है। ऑनलाइन व्यवस्था भी की जा रही है। निश्चित अवधि में प्रमाणत्र जारी न करने पर अधिकारियों के वेतन से पचास हजार रुपए काटने का जुर्माना भी रखा गया है।

 

इन लोगों को होगा बड़ा फायदा...

रोहित कंसल ने कहा कि डोमिसाइल प्रमाणपत्र का पश्चिमी पाकिस्तान के रिफ्यूजियों, सफाई कर्मचारियों, विस्थापितों को फायदा होगा। जिन लोगों ने 31 अक्टूबर 2019 से पहले स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाए हैं, उन्हें डोमिसाइल प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सिर्फ यही इकलौता स्थायी निवास प्रमाणपत्र देना होगा। सफाई कर्मचारी सरकारी नौकरियों से वंचित थे। वह महिलाएं, जिनकी शादी दूसरे राज्यों में हुई है, उनके बच्चे भी डोमिसाइल के हकदार हो गए हैं। हर श्रेणी को अधिसूचित कर दिया गया है।


यह है नए नियम

राज्य में पिछले 15 वर्षों से रह रहे लोग या सात साल से शिक्षा ग्रहण करते हुए दसवीं या बारहवीं कक्षा की परीक्षा में बैठने वाले छात्र इस प्रमाणपत्र के पात्र होंगे। राहत और पुनर्वास कमिश्नर माइग्रेंट कार्यालय में पंजीकृत विस्थापित भी डोमिसाइल के हकदार होंगे। जम्मू—कश्मीर में दस साल या इससे अधिक नौकरी करने वाले केंद्र सरकार के अधिकारियों, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों, सार्वजनिक उपक्रमों, स्वायत्त, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों या केंद्र सरकार के मान्यता प्राप्त शोध संस्थानों के अधिकारियों व कर्मचारियों के बच्चे भी डोमिसाइल के दायरे में आएंगे। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में रहने वाले लोगों के अन्य प्रदेशों में रोजगार, व्यवसाय के सिलसिले में रहे बच्चे भी डोमिसाइल हासिल कर पाएंगे।

हो रहा विरोध...

इन नियमों के आधार पर तय होगी जम्मू-कश्मीर में नागरिकता, नए डोमिसाइन नियम तैयार

इधर इन नियमों का विरोध भी देखने को मिला है। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट करते हुए कहा कि नेशनल कांफ्रेंस नए डोमिसाइल कानून का पुरजोर विरोध करती है और हम 2019 अगस्त के बाद जितने भी क़ानून जम्मू-कश्मीर में हमारी पहचान को समाप्त करने के लिए बनाए जा रहे हैं उन सब का विरोध करते रहेंगे। वहीं नेशनल कांफ्रेंस के ही प्रवक्ता ने भी एक बयान जारी करके कहा है कि पार्टी जम्मू—कश्मीर रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट के साथ-साथ डोमिसाइल एक्ट का भी पूरी तरह से विरोध करती है। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी को डोमिसाइल कानून किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है क्योंकि यह जम्मू—कश्मीर के लोगों की पहचान समाप्त करने का एक तरीका है और जम्मू-कश्मीर की डेमोग्राफी बदलने की साजिश है। कॉन्फ्रेंस में ने कहा है कि बिना कोई वक्त गवाए सरकार को इसे वापस ले लेना चाहिए। जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी ने डोमिसाइल नियमों की घोषणा के समय पर प्रश्न चिन्ह लगाया है। पार्टी की ओर से जारी किए गए एक बयान में कहां गया है की जब सारा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है केंद्र सरकार ने जम्मू—कश्मीर के लिए कुछ ऐसे फैसले लिए हैं जो कि राजनीतिक सरकार की गैरमौजूदगी में कई प्रश्न चिन्ह उठाती है।

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