केेंद्र की दरियादिली, दो अलगाववादी कश्मीरी नेता रिहा

केेंद्र की दरियादिली, दो अलगाववादी कश्मीरी नेता रिहा
केेंद्र की दरियादिली, दो अलगाववादी कश्मीरी नेता रिहा

Yogendra Yogi | Updated: 23 Sep 2019, 04:00:29 PM (IST) Jammu, Jammu, Jammu and Kashmir, India

केन्द्र सरकार ने कश्मीर घाटी में शांति के प्रयासों की पहल की है। इसी के तहत दो अलगाववादी नेताओं को रिहा किया गया है। सरकार ने नेताओं से एक बांड पर हस्ताक्षर कराएं हैं। इसके तहत नेता किसी भी अलगाववादी गतिविधि से दूर रहेंगे।

श्रीनगर : केन्द्र सरकार ने कश्मीर घाटी में शांति के प्रयासों की पहल की है। इसी के तहत दो अलगाववादी नेताओं को रिहा किया गया है। सरकार ने नेताओं से एक बांड पर हस्ताक्षर कराएं हैं। इसके तहत नेता किसी भी अलगाववादी गतिविधि से दूर रहेंगे। ऐसे कोई कृत्य नहीं करेंगे, जिससे कानून-व्यवस्था बिगडऩे की नौबत आए। रिहा होने वाले दोनों नेताओं ने इस आशय के हस्ताक्षर बांड पर किए हैं। इसके बाद नेशनल कांफ्रेंस के नेता सैयद आखून और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता खुर्शीद आलम को रिहा कर दिया है। जिन्हें केंद्र द्वारा 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को रद्द करने के बाद सेंटूर होटल में बंद रखा था।

मानवीय कारणों से छोड़ा
सूत्रों ने आगे कहा कि आकून ने अपनी रिहाई की मांग की थी क्योंकि उनकी तबीयत खराब हो गई थी।"आखून एक मधुमेह रोगी है और उसका स्वास्थ्य सेंटूर होटल में बिगड़ रहा था। इसलिए उनकी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें घर भेज दिया गया"। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता खुर्शीद आलम को भी रिहा कर दिया गया क्योंकि उनके परिवार के एक सदस्य की मृत्यु हो गई है। "उनके भाई की मृत्यु हो गई है और उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए छोड़ दिया गया है।" स्थायी रूप से सबसे पहले पीपल्स कॉन्फ्रेंस के नेता इमरान रजा अंसारी ने सरकार द्वारा मुक्त किए गए आश्वासन बांड पर हस्ताक्षर किए थे जिस के बाद उसको रिहा कर दिया गया था।

५ अगस्त से बंद हैं अलगाववादी
सरकार ने 5 अगस्त को धारा 107 के तहत मुख्य धारा के राजनेताओं में से अधिकांश को गिरफ्तार किया, जिन्हें विभिन्न स्थानों पर बंद किया गया था। मुख्य रूप से नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला हरि निवास में बंद किया गए हैं, जबकि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता नेहरू गेस्ट हाउस में रखे गए हैं। सरकार ने कहा कि इन सभी राजनेताओं को कश्मीर में किसी भी कानून-व्यवस्था की समस्या से बचने के लिए हिरासत में लिया है।

केेंद्र ने लचीली की नीति
जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार की इस पहल से घाटी के हालात ओर सामान्य होने में मदद मिलेगी। केन्द्र सरकार ने इसी के मदï्देनजर जम्मू-कश्मीर में अपनी सख्त नीति को कुछ लचीला बनाया है। सूत्रों के मुताबिक नेताओं की रिहाई के परिणााम यदि कश्मीर के हालात बनाने में सामान्य रहते हैं तो सरकार आगे भी दूसरे नेताओं की रिहाई का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

घाटी में विकास के प्रयास भी
धारा ३७० हटाए जाने के बाद अलगाववादी नेताओं के भड़काउ बयानों के मदï्देनजर नजरबंद किया गया था। सरकार की सख्ती के कारण ही घाटी में पत्थरबाजी की घटनाएं भी थमी हैं। केन्द्र सरकार इस केंद्रशाषित प्रदेश में कई तरह की कल्याणकारी योजनाओं को अमलीजामा पहना रही है। इसी के तहत ग्राम पंचायतों में आधारभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए पंच-सरपंचों के लिए कई करोड़ों का पैकेज जारी किया है। इसके अलावा रोजगार को प्रोत्साहन के लिए विनिवेश के प्रयास किए जा रहे हैं।

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