राजमार्ग बंद के विरोध में उमर ने दिया सड़क पर धरना, फैसले पर पुर्नविचार करने को कहा

धरने के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उमर ने कहा कि...

By: Prateek

Published: 10 Apr 2019, 06:43 PM IST

(जम्मू): नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला समर्थकों के साथ आज केंद्र सरकार के जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को सुरक्षाबलों के काफिले की सुरक्षित रवानगी के लिए सप्ताह में दो दिन बंद किए जाने के फैसले के विरोध में सड़कों पर उतर आए।

कश्मीर के नौगाम इलाके में उमर ने बीच सड़क पर बैठ सुरक्षाबलों के काफिले को रोक केंद्र सरकार से अपने इस फैसले पर पुर्नविचार करने की मांग की। उन्होंने कहा केंद्र सरकार के तुगलकी फरमान से आम लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। इसे तुरंत हटाना चाहिए।


धरने के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उमर ने कहा कि सेना ने खुद कहा है कि वह इस बंद को नहीं चाहते। उन्होंने कभी भी हाइवे बंद की मांग नहीं की। पूर्व थल सेना अध्यक्ष वीपी मलिक ने भी इसे बेवकूफियाना फैसला बताया। उनका यह विरोध प्रदर्शन इसीलिए है कि केंद्र सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करे। सनद रहे कि नेशनल कांफ्रेंस ने जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को सप्ताह में दो दिन रविवार और बुधवार को ऊधमपुर से बारामूला तक सुरक्षाबलों के काफिले की सुरक्षित घाटी रवानगी के फैसले के खिलाफ कोर्ट में चुनौती भी दी है। आज दूसरी बार ऊधमपुर से बारामुला तक सुबह चार बजे से शाम पांच बजे तक हाइवे को बंद रखा गया है।

 

केंद्र सरकार ने यह फैसला पुलवामा हमले के बाद लिया। पुलवामा आतंकी हमले में 40 से अधिक केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) जवान शहीद हो गए थे। फैसले के अनुसार सप्ताह में दो दिन जब रविवार और बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग पर सेना के वाहनों का काफिला चलेगा उस दौरान सुबह चार बजे से शाम पांच बजे तक कोई सिविल गाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर नहीं चलेगी।

इस बीच कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवाजाही पर पाबंदी लगाने के फैसले का बचाव करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज कहा कि बलों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कदम उठाया गया है और यह केवल 31 मई तक प्रभाव में रहेगा। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जम्मू और कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाल ही में लागू यातायात पाबंदी के बारे में जानबूझकर और शरारतपूर्ण भ्रामक सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर सरकार पहले ही स्पष्ट शब्दों में कह चुकी है कि सप्ताह के सातों दिन में केवल दो दिन, वो भी केवल 12 घंटे के लिए तर्कसंगत पाबंदी लगाई गयी है। बलों के सुरक्षित आवागमन के लिए और जनता को होने वाली असुविधा को कम से कम करने के लिए यह किया गया है।’’ मंत्रालय ने कहा कि सप्ताह में 168 घंटे में से केवल 24 घंटे की पाबंदी है। बयान के अनुसार, ‘‘जवानों के काफिले के जाने के दौरान नागरिकों के यातायात के लिहाज से नियम पहले से प्रभाव में हैं, वहीं राज्य सरकार ने अब 31 मई, 2019 तक की छोटी अवधि के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा बलों की योजनाबद्ध आवाजाही के लिए यह किया है।’’ मंत्रालय ने कहा कि विशेष रूप से 14 फरवरी को हुए पुलवामा हमले की पृष्ठभूमि में जवानों की सुरक्षा के लिए केवल 15 दिन के लिए नियम लागू किया गया है।

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