बर्खास्त डीएसपी देविंदर के अफजल गुरु से जुड़े हैं लिंक!

DSP Devinder singh: जम्मू—कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह (Dig Dilbag singh) ने पूछताछ में सामने आए सभी तथ्यों को मीडिया से साझा करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा यह बात साफ है कि देविंदर ने आतंकवादियों की मदद में अपने पद का दुरुपयोग किया। ऐसी आशंका है कि संसद हमले के दोषी अफजल गुरु (Afjal guru) से भी उसके लिंक जुड़े हैं।

- देविंदर के दोस्तों के यहां छापेमारी में हथियार बरामद

जम्मू

आतंकियों के साथ गठजोड़ के आरोप में पकड़े जाने के बाद निलंबित डीएसपी देविंदर सिंह को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इस संदर्भ में आवश्यक औपचारिकताएं पूर कर ली गई है। जम्मू—कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बुधवार को यह जानकारी दी। हालांकि डीजीपी ने पूछताछ में सामने आए सभी तथ्यों को मीडिया से साझा करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा यह बात साफ है कि देविंदर ने आतंकवादियों की मदद में अपने पद का दुरुपयोग किया। ऐसी आशंका है कि संसद हमले के दोषी अफजल गुरु से भी उसके लिंक जुड़े हैं। इस मामले की पूरी तह तक पहुंचा जाएगा। आतंकी नविद बाबू से पूछताछ के बाद 5 बड़े अभियान भी चलाए गए है। डीजीपी ने बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से मामले की जांच कराए जाने की सिफारिश की गई है। श्रीनगर पहुंचे एनआइए के अधिकारियों ने उससे पूछताछ भी की है।

देविंदर के दोस्तों के घर छापेमारी

पुलिस की ओर से देविंदर सिंह के जम्मू—कश्मीर स्थित निवास और उसके करीबियों व दोस्तों के यहां भी छापेमारी की गई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगी हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने एक बैंक ऑफिसर, एक डॉक्टर के घर तलाशी ली है। इसके अलावा श्रीनगर के इंदिरा नगर में स्थित शिव मंदिर की तलाशी भी ली गई है। छापेमारी में सेना की 15वीं कोर का पूरा नक्शा, साढ़े सात लाख रुपये और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किया गया है। एजेंसियों को शक है कि देवेंद्र सिंह ने अपने रिश्तेदारों के घर में पैसा छुपाकर रखा है। छापेमारी के दौरान पूरे इलाके का जायजा लेने के लिए ड्रोन कैमरे का भी इस्तेमाल किया गया।

हवालो से आतंकियों को भेजा जाता है फंड

डीएसपी देवेंद्र और उसके साथ गिरफ्तार हिज्बुल के दो आतंकियों नवीद बाबू और आसिफ अहमद ने पूछताछ में बताया है पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई हवाला के जरिये भारत में आतंकियों को पैसा भेजते थे। सुरक्षा एजेंसियों ने दो नान बनाने वालों (कश्मीरी में उन्हें कंदरू के रूप में पहचाना जाता है) से पूछताछ की और इंदिरा नगर के शिव मंदिर की तलाशी ली। दोनों नान मेकर शिव मंदिर में ठहरे थे। एजेंसियां नान मेकर्स से देवेंद्र के बारे में कुछ जानकारी की जांच कर रही हैं क्योंकि वे उसे भी जानते हैं। उनके बारे में भी जांच एजेंसियां पता लगा रही हैं। ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल पूरे इंदिरा नगर की फोटोग्राफी करने के लिए भी किया गया था और सुरक्षा एजेंसियां कुछ ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) को खोज रही हैं, जो कि देवेंद्र ने अपने पूछताछ के दौरान उनका नाम लिया है।

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