script58 daughters survived to become girl brides in three years | तीन सालों में बालिका वधु बनने से बची 58 बेटियां, | Patrika News

तीन सालों में बालिका वधु बनने से बची 58 बेटियां,

बाल विवाह समाज के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है। बाल विवाह पर रोक लगाने लाख दावे किए जा रहे हैं लेकिन अभी भी बाल विवाह के मामले हर साल ही सामने आ रहे हैं। बीते तीन सालों में ही जिले में बाल विवाह के ५८ मामले सामने आ चुके हैं जिसमें प्रशासनिक टीम ने तत्परता दिखाते हुए बेटियां को बालिका वधु बनने से बचा लिया है।

जांजगीर चंपा

Published: May 02, 2022 09:43:47 pm

जांजगीर-चांपा. इनमें कहीं तो बारात चौखत से वापस लौटी तो कहीं फेरे लगने की तैयारी चल रही थी। ऐसे बेटियों को टीम ने बालिका वधू बनने से बचाया है।
गौरतलब है कि तीन साल के आंकड़े को देखे तो जिले में बाल विवाह के मामले में कमी नजर आ रही है लेकिन मामले अब भी सामने आ ही रहे हैं यानी अभी भी लोग चोरी-छिपे बाल विवाह को अंजाम देना चाह रहे हैं। हालांकि अधिकतर मामलों में प्रशासनिक अमले को किसी न किसी तरह सूचना मिल जा रही है और ऐन वक्त पर मौके पर जाकर बाल विवाह होने से रोकने में टीम सफल हो रही है। क्योंकि विभागीय अफसरों की माने तो बाल विवाह को लेकर अभी तक किसी को जुर्माना या सजा नहीं मिली है क्योंकि बाल विवाह होने के पहले ही रोक लिया जा रहा है। बाल विवाह संपन्न हो जाने की स्थिति में सजा या जुर्माना लगाया जाता। भले ही प्रशासन दावे कह रहा है कि बाल विवाह नहीं हो रहे लेकिन इससे पूरी तरह से इंकार भी नहीं किया जा सकता। क्योंकि ज्यादातर चोरी-छिपे इसे अंजाम देते हैं।
दो साल कैद और एक लाख रुपए जुर्माना भी
बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए शासन ने सख्ती बरतते हुए जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान भी किया है। इतना ही नहीं बाल विवाह कराने वाले जितने दोषी माता-पिता होंगे उतने ही दोषी उस बाल विवाह में शामिल होने वाले बाराती, पंडित आदि भी उतने माने जाने का नियम बनाया है ताकि लोगों में बाल विवाह के प्रति खौफ भी रहे। हालांकि शहरी क्षेत्रों में लोग इसको लेकर जागरुक हो गए हैं लेकिन अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में बाल-विवाह के मामले सुनने को मिल ही जा रहे हैं। परिजन चोरी-छिपे बाल विवाह को अंजाम देने की कोशिश करने से बाज नहीं आ रहे।
बाल विवाह रोकने के वर्षवार आंकड़े
बाल विवाह रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा जिला बाल संरक्षण इकाई के माध्यम से टीम गठित है जो बाल विवाह की सूचना मिलते ही वहां पहुंचकर कार्रवाई करती है। इसके लिए जिले में दस परियोजना प्रतिशेष अधिकारी व मैदान अमला तैनात रहता है। विभाग के अनुसार वर्ष २०१९-२० में २५, २०२०-२१ में १९ और वर्ष २०२१-२२ में १४ बाल विवाह रोकने की कार्रवाई की गई है। इसी तरह १ अप्रैल २२ से २ मई तक की स्थिति में ०३ मामल सामने आ चुके हैं जहां बालिका वधु बनने से बेटियां को बचाया गया है।
अक्षय तृतीया पर आज रहेगी टीम की नजर
प्राय: रामनवमी, अक्षय तृतीया जैसी तिथियों पर बड़ी संख्या में बाल विवाह होते हैं। ऐसे में इसको लेकर कलेक्टर जितेन्द्र शुक्ला ने सभी से अपील भी की है बाल विवाह जैसे कुप्रथा को उखाड़ फेंकने में मदद करें। बाल विवाह की जानकारी मिले तो पुलिस व प्रशासन को सूचित करें। इसको लेकर जिलेभर में अफसरों की टीम इस पर नजर रखेगी और सूचना मिलते ही वहां दबिश देकर कार्रवाई करने तैयार रहेगी।
बाल विवाह के कई तरह के दुष्परिणाम
कम उम्र में शादी से बालिका का शारीरिक विकास रूक जाता है। गंभीर संक्रामक यौन बीमारियों की चपेट में आने का खतरा रहता है। कम उम्र की मां और उसके बच्चे दोनों की जान और सेहत खतरे में पड़ जाती है। नवजात शिशुओं का वजन कम रह जाता है। साथ ही उनको कुपोषण व खून की कमी की आशंका ज्यादा रहती है। प्रसव में शिशु और मातृ मृत्यु दर ज्यादा पायी जाती है। बाल विवाह की वजह से बहुत सारे बच्चे अनपढ़ और अकुशल रह जाते हंै।
कहीं चौखट से लौटी बारात तो कहीं फेरे लगने की चल रही थी तैयारी
बाल विवाह कराने के लिए टीम को कई तरह की स्थितियों से गुजरना पड़ता है। क्योंकि कई बार ऐन वक्त पर सूचना मिलती है। जब टीम पहुंचती है तो तब तक कहीं बारात चौखट तक पहुंच चुकी होती है तो कहीं फेरे लगते रहते हैं। फिर भी टीम शादी रुकवाने की कार्रवाई करती है। परिजन हजारों मिन्नतें करते हैं जिसे समझाना पड़ता है। तब जाकर शादी रोकने राजी होते हैं।
वर्जन
बाल विवाह रोकने के लिए जिला प्रशासन व विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी से डटी हुई है। अक्षय तृतीया पर भी बाल विवाह होने के ज्यादा मामले सामने आते हैं इसके लिए जिलेभर में कल टीम की पैनी नजर रहेगी। जहां भी सूचना मिलेगी टीम तत्परता से पहुंचेगी।
गजेन्द्र जायसवाल, जिला बाल संरक्षण अधिकारी
तीन सालों में बालिका वधु बनने से बची 58 बेटियां,
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