फसल से किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा कागजों में

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि फसल से किसानों की आय दुगुनी की जाएगी, लेकिन आज तक यह घोषणा अमल नहीं हो पाई। जिसके चलते किसानों की आय जस की तस है। किसान अपने उत्पाद को औने -पौने दामों में बाजार में बिक्री करने मजबूर हैं।

By: Vasudev Yadav

Published: 10 Apr 2019, 11:56 AM IST

जांजगीर-चांपा. केंद्र की सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में यह कहा था कि किसानों की आयु दुगुनी करने कई तरह की योजनाएं बनाई जाएगी, ताकि किसानों को हरा भरा किया जा सके, लेकिन मोदी की सरकार पांच सालों में कुछ नहीं कर पाई। भले ही प्रदेश की सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए २५०० रुपए प्रति क्ंिवटल धान का समर्थन मूल्य किया है, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार केवल छलावे करते आ रही है। आज भी केंद्र सरकार की ओर से न तो किसानों को बोनस दिया जा रहा है और न ही समर्थन मूल्य का लाभ दिया जा रहा है। किसानों का कहना है कि केंद्र की मोदी सरकार ने केवल छलावा करने का काम किया है। यदि राज्य के बराबर तो नहीं कुछ और आय में बढ़ोतरी करना चाहती तो किसानों को इसका बड़ा लाभ मिल पाता। किसान आज भी अपने छह महीने की कमाई को न तो बाजार में अच्छे दामों में बिक्री कर पा रहे हैं और न ही सरकार के पास। यदि किसानों को धान को खुले मार्केट में भी अच्छी कीमत मिल पाती तो किसान सुदृण हो सकते थे। प्रदेश की सरकार भी धान खरीदी की निर्धारित अवधि में मात्र १५ क्ंिवटल धान की खरीदी करती है। इसके अधिक धान किसान अपने घरों में ही रखे होते हैं। छोटे किसान तो किसी तरह अपना उत्पाद समर्थन मूल्य में बिक्री कर लेते हैं, लेकिन बड़े किसानों को बाजार में धान का मूल्य नहीं मिल पाता।

अन्य उत्पाद में भी नहीं मिलता लाभ
प्रदेश में धान के अलावा गेहूं, मक्का, उड़द, अलसी सहित और भी कई तरह के फसल उगाते हैं, लेकिन बाजार में किसानों के उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। जिसके चलते किसान छले जाते हैं। सरकार यदि प्रत्येक उत्पाद की खरीदी उचित मूल्य में करता तो किसानों में खेती किसानी के प्रति ललक बढ़ती और वे कई तरह के फसल लगाने में रुचि रखते, लेकिन केंद्र की सरकार ने किसानों को केवल छलने का काम किया है।

यह हैं प्रमुख 10 प्रमुख पुराने मुद्दे, जो घोषणा के बाद भी आज तक अधूरे हैं
1. जांजगीर-नैला रेलवे स्टेशन में प्रमुख एक्सप्रेस टे्रनों का ठहराव आज तक नहीं हो पाया
2. जांजगीर-चांपा के दो प्रमुख निर्माणाधीन आरओबी पांच साल बाद भी अधूरा पड़े हंै। हर साल मियाद भी बढ़ रही है।
3. प्रदेश के कृषि प्रधान जिले में राष्ट्रीय बागवानी मिशन में जिले का नाम नहीं, जिले के किसान उपेक्षित
4. देश में कोसा उत्पादन का रिकार्ड बनाने वाले जिले में बुनकरों की हालत दयनीय, कोसा का मार्केट नहीं दिला सके
5. जिले के ४० हजार हितग्राहियों को उज्जवला योजना का लाभ नहीं दिला सके, हितग्राही योजना से वंचित
6. पांच साल बाद भी ४५६ करोड़ की एनएच ४९ बायपास का निर्माण कार्य ५० फीसदी भी नहीं हो पाया
7. जिले में दर्जनों उद्योग खुलने के बाद सीएसआर मद से एक इंजीनियरिंग कालेज की स्थापना नहीं तक नहीं हो पाई।
8. फसल से किसानों की आय दुगुना करने की घोषणा अब तक हवा हवाई
9. लाखों बेरोजगारों को रोजगार देने की घोषणा कागजों तक सीमित
10. सांसद आदर्श ग्राम जावलपुर में पांच साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव, आज भी गांव में नल-जल योजना का लाभ नहीं।

Vasudev Yadav
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