सिंचाई विभाग के पांच करोड़ की नहर लाइनिंग में की जा रही जमकर लीपापोती

गुणवत्ता को लेकर ग्रामीण अपनी आवाज बुलंद कर रहे

By: Shiv Singh

Published: 09 Jan 2019, 04:51 PM IST

जांजगीर-चांपा. नहर के लाइनिंग कार्य में सिंचाई विभाग के अफसरों द्वारा बड़ी तादात में घालमेल की जा रही है। यही वजह है कि गुणवत्ता को लेकर ग्रामीण अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। हाल में नवागढ़ ब्लाक के कुरियारी के ग्रामीणों ने अपने गांव में चल रहे लाइनिंग कार्य की गुणवत्ता को लेकर उचाधिकारियों से शिकायत की है।


जिले में सिंचाई विभाग द्वारा लाइनिंग कार्य किया जा रहा है। इस कार्य में ठेकेदारों द्वारा गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मानक के अनुरूप लाइनिंग नहीं हो रही है। एक ओर लाइनिंग की जा रही है तो दूसरी ओर यही लाइनिंग उखड़ रही है। इन दिनों नवागढ़ ब्लाक के कुरियारी, गोधना, पोड़ी, सेमरा, तुस्मा सहित आसपास के आधा दर्जन गांवों में तकरीबन सात किलोमीटर की दूरी तक पांच करोड़ रुपए की लागत नहर लाइनिंग जारी है। इतने क्षेत्र में पुल का निर्माण भी होना है।

जो निर्माण कार्य हो रहा है उसमें गुणवत्ता नाम की चीज नहीं है। कार्य की बदहाली को लेकर ग्रामीणों ने इस बात की शिकायत कलेक्टोरेट में की है लेकिन शिकायत धरी की धरी रह जा रही है। कुरियारी के ग्रामीणों ने बताया कि लाइनिंग कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है। गुणवत्ता को लेकर मौके पर उपस्थित मेट ने बताया कि निर्माण में स्टीमेट में जो है उसी हिसाब से काम हो रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि लाइनिंग कार्य सिंचाई विभाग के अफसरों का कमाई का जरिया बन गया है। क्योंकि विभागीय अफसर काम काज की मॉनिटरिंग नहीं करते। इसके कारण ठेकेदार मनमाफिक काम कराते हैं। गुणवत्ता का अंदाजा तब लगता है जब पहली बारिश में ही सीमेंट गिट्टी पानी में बह जाती है। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।


प्रदेश में सबसे अधिक नहर का जाल
प्रदेश में सबसे अधिक नहर से सिंचाई का रकबा जांजगीर चांपा जिले में है। यहां 88 प्रतिशत धान के रकबे में नहर के पानी से सिंचाई होती है। ढाई लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में मात्र 12 प्रतिशत क्षेत्र में ही सिंचाई का पानी नहीं पहुंचता। शेष रकबा नहर के पानी से सिंचित होता है। इतने वृहद क्षेत्र में अपासी के लिए सरकार नहरों के मेंटनेंस के लिए भी सालाना करोड़ो रुपए पानी की तरह बहाती है।

यही मेंटेनेंस सिंचाई विभाग के अफसरों के लिए कमाई का जरिया बन जाता है। करोड़ो रुपए की लागत से लाइनिंग कार्य किया जाता है। यही वजह है कि पहली बारिश में ही लाइनिंग उखड़कर फिर अपना पुराना रूप धारण कर लेती है। विभागीय अफसर दूसरे साल फिर उसी कार्य के लिए स्टीमेट तैयार करते हैं और फिर उसी नहर में लाइनिग कराकर लाखों का बंदरबांट करते हैं।
बाद में यह होता है दुष्परिणाम
नहर की बदहाली को लेकर सबसे बड़ा खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ता है। समय पर नहर से पानी नहीं मिलने से किसान सिंचाई कर पटाने कोताही बरतते हैं। यही वजह है कि अब तक करोड़ो रुपए का सिंचाई कर नहीं पट पाया है। सिंचाई विभाग के अधिकारी जब सिंचाई का सीजन चलता है तब गांवों की ओर कदम नहीं रखते। जब सिंचाई कर पटाने की बारी आती है तब उनके द्वारा किसानों का दरवाजा खटखटाया जाता है। इससे किसान भी आक्रोशित होते हैं।


यह होगा नुकसान
ग्रामीणों ने बताया कि स्तरहीन लाइनिंग होने से पहली बारिश में ही सीमेंट कांक्रीट पानी में घुल जाता है। इससे नहर का स्वरूप बदल जाता है। इसके कारण सिंचाई के लिए छोड़ा गया पानी टेल एरिया तक नहीं पहुंच पाता है। खेत प्यासे रह जाते हैं। इतना ही नहीं किसानों के बीच आपस में झगड़ा भी होता है। सिर फुटौव्वल की स्थिति भी बनती है और नुकसान किसानों को ही होता है।

Shiv Singh Desk
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