...अब जिले के आला अधिकारी राजपूत को बचाने लगा रहे जोर, पढि़ए खबर...

Vasudev Yadav

Publish: Dec, 07 2017 04:29:37 (IST)

Janjgir-Champa, Chhattisgarh, India
...अब जिले के आला अधिकारी राजपूत को बचाने लगा रहे जोर, पढि़ए खबर...

जैजैपुर के ठेकेदार सत्यनारायण चंद्रा की शिकायत पर कलेक्टर डॉ. एस भारतीदान ने मामले की जांच करने की जिम्मेदारी जिपं सीईओ अजीत बसंत को दी।

जांजगीर-चांपा. सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग बीके राजपूत द्वारा तीन करोड़ रुपए से अधिक का कार्य फर्जी तरीके टेंडर देने के बाद अब जिले के आला अधिकारी उसे बचाने में लग गए हैं। जैजैपुर के ठेकेदार सत्यनारायण चंद्रा की शिकायत पर कलेक्टर डॉ. एस भारतीदान ने मामले की जांच करने की जिम्मेदारी जिला पंचायत सीईओ अजीत बसंत को दी।

सही जांच की जगह सीईओ उल्टा ठेकेदार से नियमावली मांगने लगे और कहा कि यदि 10 लाख रुपए से ऊपर ई-टेंडरिंग का नियम तो वह नियम लाओ तभी इस टेंडर को रद्द करूंगा। ठेकेदार ने पत्रिका में छपे विभाग की प्रमुख सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले के वर्जन का हवाला दिया तो सीईओ ने उसे मानने से साफ इंकार कर दिया। यदि इतने बड़े पद पर बैठे आईएएस अधिकारी को शासन का नियम नहीं पता तो छत्तीसगढ़ सासन से जारी नवीन आदेश जो कि लोक निर्माण विभाग छत्तीसगढ़ शासन के उप सचिव जेएम लुलु ने 15 जून 2017 को इस संबंध में जारी किया है उसे पढ़ लें।

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इस आदेश में 10 लाख नहीं बल्कि पांच लाख रुपए से ऊपर की लागत की निविदाएं ई-टेंडरिंग से होने का निर्देश दिया गया है। आदेश की कॉपी खबर में प्रकाशित की जा रही है। अब इसके बाद भी यदि हमारे जिले के मुखिया और सीईओ जिला पंचायत को लगता है कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग से जारी टेंडर सही है, तो संभाग व राज्य स्तरीय अधिकारी ही इस पर कुछ कर सकते हैं। इस बारें जानकारी लेने के लिए जब जिला पंचायत सीईओ को फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

इसमें क्यों नहीं मांगा मार्गदर्शन?
जिला पंचायत सीईओ अजीत बसंत हमेशा सही और नियम के साथ काम करने का दावा करते हैं। पंचायत शिक्षक भर्ती से लेकर आन्य बड़े मामलों में उनका यही तर्क था कि वह कार्रवाई से पहले उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन मांग लेते हैं और उसी के मुताबिक कार्य करते हैं। यदि ऐसा है तो उन्होंने ई-निविदा के संबंध में छग शासन का नियम जानने के लिए उच्चाधिकारियों से क्यों मार्गदर्शन नहीं मांगा यह समझ से परे हैं।

ठेकेदार का दावा
ठेकेदार सत्यनारायण चंद्रा का दावा है कि सहायक आयुक्त आदिवासी बीके राजपूत ने टेंडर गुपचुप तरीके से निकाला है। गलत तरीके से ऑफ लाइन टेंडर निकालने के साथ ही फस्र्ट कॉल में मात्र दो ठेकेदारों को क्वालीफाई कर टेंडर पास कर दिया गया, जबकि नियम के मुताबिक पहली कॉल में टेंडर ओपन करने के लिए कम से कम तीन ठेकेदार का क्वालीफाई होना जरूरी है।
पीडब्ल्यूडी है मदर एजेंसी
लोक निर्माण विभाग छत्तीसगढ़ शासन राज्य में संचालित सभी विभाग जो कि निर्माण कार्य करते हैं उनकी मदर एजेंसी है। छत्तीसगढ़ शासन ने एकल टेंडर नियम के तहत सभी ठेकेदारों को इस विभाग से पंजीकृत किया है और इसी विभाग के पंजीकृत ठेकेदार ही शासन के विभाग में निर्माण कार्य के लिए निकाली जानी वाली निविदा प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। इतना ही नहीं निविदा आमंत्रण से लेकर निर्माण कार्य के सभी नियम कायदे जो इस विभाग में लागू है वहीं छत्तीसगढ़ शासन के अन्य विभाग में भी लागू हैं।

यह है उप सचिव का आदेश
15 जून 2017 को पत्र क्रमांक एफ 21-5/टी/19/2012 निविदा राज्य शासन द्वारा जारी विभागीय आदेश क्रमांक 2963/476/05/19/ई-टेंडरिंग के तहत जारी आदेश में छत्तीसगढ़ शासन लोक निर्माण विभाग के उप सचिव जेएम लुलु ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि 30 मार्च 2005 में आंशिक संशोधन करते हुए रुपए पांच लाख तक के कार्यों को मैनुअल निविदा के माध्यम से और रुपए पांच लाख से अधिक के कार्यों की सभी निविदाएं ई-टेंडरिंग के माध्यम से क्रियान्वित किए जाने और अधीक्षण अभियंताओं को रुपए पांच लाख से अधिक और दो करोड़ तक के कार्यों की निविदा ऑनलाइन आमंत्रित करने के लिए अधिकृत किया जाता है।

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