ब्याज की राशि बढ़ाने श्रमपदाधिकारी ने स्कालरशिप का दबा दिया था एक करोड़, छात्र व वीटीपी संचालक मुखर हुए तो जारी कर रहे राशि

-स्कालरशिप के लिए चार महीने से भटक रहे प्रशिक्षणार्थी

जांजगीर-चांपा. कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण देने के बाद छात्रों के स्कालरशिप राशि आने के बाद भी श्रम अधिकारी ने लटकाए रखा था। जब वीटीपी संचालक व छात्र स्कालरशिप के लिए मुखर हुए तो श्रम पदाधिकारी ने बांटने की बात कह रहे हैं। हालांकि कि अब तक इसकी राशि छात्रों के खाते में नहीं पहुंच पाई है। बताया जा रहा है कि ब्याज की राशि बढ़ाने के फेर में श्रमपदाधिकारी के द्वारा इस तरह का खेल करने का आरोप लग रहा है। जिससे छात्रों में रोष व्याप्त है।

जिले में कौशल विकास योजना का बुरा हाल है। वीटीपी संचालकों ने श्रम विभाग की योजनाओं के तहत कार्य किया है वे भुगतान के लिए भटक रहे हैं। जिसमें छात्रों को प्रशिक्षण का कार्य प्रमुख रहा है। वीटीपी संचालकों के द्वारा सिलाई कढ़ाई, राजमिस्त्री, इलेक्ट्रीशियन सहित विभिन्न तरह का प्रशिक्षण दिया गया है। जिसमें हजारों की संख्या में छात्रों ने प्रशिक्षण लिया है।

छात्रों को प्रशिक्षण के दौरान छात्रवृत्ति का भुगतान करना भी होता है। संचालकों ने बीते एक सालों से छात्रों को प्रशिक्षण तो दे दिया, लेकिन उन्हें छात्रवृत्ति प्रदान नहीं किया गया था। जबकि सरकार ने उनकी राशि तकरीबन एक करोड़ विधानसभा चुनाव यानी अक्टूबर माह से भुगतान कर दिया है। इसके बाद भी श्रम पदाधिकारी ने उक्त फंड को इस नाम से रोक रखा था क्योंकि इकनी भारी भरकम रकम से बैंक से ब्याज की राशि आती है। जिसका इस्तेमाल मिसलेनियश फंड के रूप में किया जाता है। जब वीटीपी संचालक व प्रशिक्षण लिए छात्रों ने कड़ा रुख अपनाया तब श्रम पदाधिकारी ने इसकी राशि जारी करने की बात कही है। जबकि वीटीपी संचालकों का कहना है कि अब तक उनके खातों में राशि नहीं आई है। जिसके चलते छात्र भटक रहे हैं।
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इसलिए अड़ा पेंच
सूत्रों का कहना है कि श्रमपदाधिकारी ने अपने बेटे के नाम से भी बड़ी तादात में संस्थान खोलकर वीटीपी प्रोपाइटर बना दिया है। उसके बेटे ने भी जिले में कई संस्थान खोलकर प्रशिक्षण कराया है। सबसे अधिक संस्थान श्रमपदाधिकारी के बेटे के नाम संचालित है। हालांकि उसके बेटे ने किसी दूसरे के नाम से वीटीपी का पंजीयन कराया है, लेकिन सबसे अधिक भुगतान उसे ही किया जाना था। इसके चलते उसकी शिकायत राज्य स्तर पर कर दी गई। शिकायत की जांच उच्चाधिकारियों द्वारा की जा रही है। इसके चलते पूरे जिले का भुगतान रोक दिया गया है। इससे सारे के सारे वीटीपी संचालक आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहे हैं।
सांसद विधायक के लोग भी परेशान
जिले में वीटीपी का संचालन सांसद विधायक भी कर रहे हैं। हालांकि ऐसे वर्ग के लोग अपने नहीं बल्कि दूसरे लोगों के नाम से पंजीयन करा रखा है। चांपा के पूर्व विधायक के पिता के नाम वीटीपी संचालित है। वहीं जांजगीर सांसद के करीबी लोगों के नाम से वीटीपी संचालित है। तो वहीं पामगढ़ के पूर्व विधायक के करीबी भी वीटीपी संचालित कर रहा है। राशि की भुगतान के लिए हाई प्रोफाइल वर्ग के लोग भी श्रम पदाधिकारी पर दबाव बना रहे थे, लेकिन श्रम पदाधिकारी के नाकामियों के चलते सभी वीटीपी संचालकों का भुगतान लटका हुआ है।

सीधी बात : वीके पटेल, श्रमपदाधिकारी
सवाल : छात्रों के स्कालरशिप का कितने का भुगतान पेंडिंग है।
जवाब : लगभगत एक करोड़ का भुगतान था जिसे जारी किया जा रहा है।
सवाल : आखिर क्यों नहीं हो रहा था भुगतान।
जवाब : चुनाव की वजह से भुगतान अटका था।
सवाल : चुनाव तो तीन माह पहले खत्म हो चुका है।
जवाब : पहले किसी अन्य कारणों से रुका था।
सवाल : आपका बेटा भी वीटीपी का संचालन कर रहा है।
जवाब : यह गलत है कोई प्रूफ नहीं है।
सवाल : कब से भुगतान किया जा रहा है।
जवाब : दो मार्च से ही भुगतान किया जा रहा है।

Vasudev Yadav
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