अंग्रेजी में एपीएल को टक्कर दे रहे नवा रायपुर के बीपीएल वाले बच्चे

गरीब बच्चों को खोजकर निशुल्क शिक्षा दे रहा क्रिस्टल हाउस स्कूल

बड़े भाई के सामने अंग्रेजी में बात करता है तीसरी और चौथी में पढऩे वाला छोटा भाई

डॉ. संदीप उपाध्याय@रायपुर. नवा रायपुर में संचालित क्रिस्टल हाउस स्कूल में पढऩे वाले गरीब बच्चे बड़े इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढऩे आर्थिक रूप से सक्षम लोगों के बच्चों से किसी भी मायने में कम नहीं है। यहां के टीचर्स द्वारा बच्चों को वही शिक्षा दी जाती है जो कि अन्य अंग्रेजी मीडियम के स्कूलों में दी जा रही है। चौकाने वाली बात तो यह है कि गरीब परिवेश और कम पढ़े लिखे परिवार के बीच रहने के बाद भी यहां पढऩे वाले बच्चे न सिर्फ अंग्रेजी लिख-पढ़ लेते हैं बल्कि फरार्टे से इंग्लिश में बोलते भी हैं।

पत्रिका की टीम ने खुद यह बात ग्राउंड रिपोर्टरिंग के दौरान देखी। पत्रिका की टीम अटल नगर नवा रायपुर मंत्रालय से होती हुई शासन द्वारा बसाए गए राखी गांव पुहंची। वहां किराना दुकान पर बैठे लड़के से पूछा ''ह्वेयर इज राखी विलेज अंग्रेजी सुनकर वह लड़का चौंक गया और उसने अपने छोटे भाई पूनम साहू को बुलाया। पूनम आया और उसने अंग्रेजी में बाताया ''यस इट इज राखी बिलेज। दिस इज माय इल्डर ब्रदर खिलेंद्र। इट डज नॉट नो इंग्लिश। व्हाट कैन आई हेल्प यू 9-10 साल के इस बच्चे की अंग्रेजी सुनकर कुछ समय के लिए तो ऐसा लगा कि ये हो क्या रहा है। फिर बच्चे से पूछा कि ''ह्वेयर डू यू स्टडी बच्चे ने जवाब दिया ''आई स्टडी एट क्रिस्टल हाउस। फिर क्या था हम बच्चे से काफी घुलमिल गए। उसने हमें बताया कि वह चौथी कक्षा में पढ़ता है। उसने अपने घर से कुछ दूर रहने वाले अपने दोस्त नीरज गिरी से मिलवाया। वह भी क्रिस्टल हाउस में तीसरी कक्षा का छात्र है। उसने भी अंग्रेजी में बात किया। अंग्रेजी की किताब फर्राटे के साथ पढ़कर बताया।

क्या है क्रिस्टल हाउस

क्रिस्टल हाउस अटल नगर नवा रायपुर के मैनेजर फाइनेंस एंड एडमिनिस्ट्रेशन रंजीत झा ने बताया कि यह एक ऐसी संस्था है जो भारत में बैंग्लोर और छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर अटल नगर में अपने स्कूल की ब्रांच चला रहा है। इस स्कूल को छत्तीसगढ़ शासन ने जमीन और बिल्डिंग दी है। यहां गरीब बच्चों को स्कूल के लोग खुद खोजकर लाते हैं भर्ती करते हैं। स्कूल आने जाने के लिए मॉर्निंग पिकअप व ड्रॉप के साथ सुबह नाश्ता, दोपहर में लंच, शाम को घर जाते समय दूध और बिस्किट दिया जाता है। स्कूल में पढऩे के लिए बच्चे को स्टेशनरी, बुक, नोट बुक, यूनिफार्म, शूज सब फ्री में दिया जाता है। बच्चों के इलाज के लिए रिम्स से टाइअप है। इतना ही बच्चे के जॉब लगने तक हायर एजुकेशन का भी खर्च यही संस्था उठाती है।

sandeep upadhyay Reporting
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