OMG! खूनी हैं यहां की सड़कें, एक साल में निगल गई 222 की जान

छत्तीसगढ़ का एक जिला ऐसा भी है, जो वहां से गुजर रही सड़क को देखना भी पसंद नहीं करता। कारण एक साल में यहां की खूनी सड़कें जिले के 222 लोगों को निगल चुकी है।

जांजगीर-चांपा. छत्तीसगढ़ का एक जिला ऐसा भी है, जो वहां से गुजर रही सड़क को देखना भी पसंद नहीं करता। कारण एक साल में यहां की खूनी सड़कें जिले के 222 लोगों को निगल चुकी है। फर्राटा भर दौड़ते वाहनों की चपेट में आने से यह हादसे हुए हैं।

वहीं आंकड़ों पर गौर करें तो कोरबा के शहरी इलाकों के बजाए ग्रामीण अंचल की सड़कों पर अधिक मौतें हो रही हैं। लोग शराब की नशे में तेज रफ्तार में वाहन चला रहे हैं और असमय काल के गाल में समा रहे हैं। पिछले 12 माह के सड़क हादसे पर गौर करने पर ग्रामीण अंचल की सड़क पर जहां 117 लोगों की मौत हुई तो वहीं नेशनल हाइवे पर 75 लोगों की जान गई है।

जिले में लगातार सड़क हादसे में इजाफा हो रहा है। इससे बचने पुलिस के द्वारा हर रोज लोगों को समझाईश दी जा रही है। सड़कों पर हर रोज मोटरव्हीकल एक्ट की कार्रवाई कर लोगों को समझाया जा रहा। दबाव बनाया जा रहा। ताकि लोग समझें और नियम के तहत वाहन चलाएं। लेकिन, पुलिस की आवाज नक्कार खानों में तूती की आवाज बनकर रह जा रही है। लाख कोशिशों के बावजूद लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।

पुलिस से मिले ताजा आंकड़ों में नेशनल हाईवे की बजाए ग्रामीण अंचल की सड़कों पर सड़क हादसे अधिक हो रहे हैं। कारण चाहे ग्रामीण अंचल की बदहाल सड़कें हो या फिर शराब के कारण। वहीं ग्रामीण अंचल के लोग शराब की नशे में फर्राटे मारते हैं। नतीजतन उन्हें मौत के आगोश में समाना पड़ता है। ताजा आंकड़े के अनुसार बीते 12 माह यानी 365 दिन में ग्रामीण अंचल की सड़कों पर 117 लोगों की जान चली गई है। वहीं नेशनल हाईवे में 75 लोग काल-कवलित हो चुके हैं।

इसके अलावा एक हजार से अधिक सड़क हादसे हो चुके हैं। जिसमें 700 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। इसके अलावा तकीबन 400 लोगों को सामान्य चोटें आई है। सबसे अधिक ग्रामीण अंचलों की सपाट रोड में अधिक 110 मौतें हुई है। वहीं स्टेट हाईवे की सड़कों पर तकरीबन 25 लोग जान गवां चुके हैं।

सुबह 8 से रात 8 बजे तक अधिक मौतें


सड़क हादसे में मौत के 12 घंटे के भीतर हुई है। 117 मौतों में100 मौतें सुबह 8 बजे से रात 8 बजे के अंदर हुई है। रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक केवल 17 मौते हुई है। यानी कहा जा सकता है कि सड़कों पर वाहनों का दबाव इन्हीं समयों के बीच होती है। इसके अलावा शाम 4 बजे से रात रात बजे के बीच अधिकतर यह देखा गया है कि इस दौरान अंगूर की बेटी का खुमार भी सिर चढ़कर बोलता है। आखिरकार हादसे की संभावना बढ़ जाती है।

हादसे से बचने यह करें


- शराब पीकर वाहन न चलाएं
- वाहन पर तीन सवारी न बैठें
- वाहनों के कागजात साथ लेकर चलें
- प्लेट पर नंबर साफ सुथरे अक्षरों में लिखें
- हेलमेट का उपयोग करें
- कम उम्र के लोगों के हाथ वाहन न सौपें
- भारी वाहनों का ओवरटेक न करें
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Piyushkant Chaturvedi
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