महाशिवरात्रि को लेकर बनी भ्रम की स्थिति, असमंजस में शिव भक्त

13 जनवरी को पूरे दिन त्रयोदशी तिथि है और मध्यरात्रि में 11 बजकर 35 मिनट से चतुर्दशी तिथि लग रही है, जबकि 14 फरवरी को पूरे दिन और रात 12 बजकर 47 मिनट

By: Rajkumar Shah

Updated: 10 Feb 2018, 11:39 AM IST

जांजगीर-चांपा. शिवभक्तोंं का सबसे बड़ा त्योहार महाशिवरात्रि माना जाता है। इस त्योहार का भक्तगण पूरे साल इंतजार करते हैं और महाशिवरात्रि के दिन सुबह से ही शिव मंदिरों में जुटने लगते हैं। शिवभक्तों के लिए इस साल बड़ी उलझन की स्थिति बनी हुई है कि महाशिवरात्रि का त्योहार किस दिन मनाया जाएगा।


शिवभक्तों के महापर्व को लेकर ऐसी स्थिति इसलिए बनी हुई है क्योंकि महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। 13 जनवरी को पूरे दिन त्रयोदशी तिथि है और मध्यरात्रि में 11 बजकर 35 मिनट से चतुर्दशी तिथि लग रही है, जबकि 14 फरवरी को पूरे दिन और रात 12 बजकर 47 मिनट तक चतुर्दशी तिथि है। ऐसे में लोग दुविधा में हैं कि महाशिवरात्रि 13 फरवरी को मनेगी या 14 फरवरी को।

इस प्रश्न का उत्तर धर्मसिंधु नामक ग्रंथ में दिया गया है। इसमें कहा गया है चतुर्दशी तिथि दूसरे दिन निशीथ काल में कुछ समय के लिए हो और पहले दिन सम्पूर्ण भाग में हो तो पहले दिन ही यह व्रत करना चाहिए। निशीथ काल रात के मध्य भाग के समय को कहा जाता है जो 13 तारीख को पश्चिमी क्षेत्र में अधिक समय तक है। वहीं पूर्वी भारत में जहां स्थानीय रात्रिमान के अनुसार निशीथकाल 14 फरवरी को रात 12 बजकर 47 मिनट पर समाप्त हो रहा है, वहां 14 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत किया जा सकता है। शास्त्रों में महाशिवरात्रि व्रत को लेकर एक और बात कही गई है कि मंगलवार, रविवार और शिवयोग में यह व्रत विशेष शुभ और पुण्यदायी हो जाता है। इस ग्रंथ के हिसाब से प्रदेश में महाशिवरात्रि पर्व १४ फरवरी को मनाना श्रेयस्कर होगा। पर्व पर यह है


विशेष संयोग
शहर के ज्योतिषाचार्य डॉ. अनिल तिवारी बताते हैं कि इस ? शिवरात्रि ??रि पर श्रवण नक्षत्र रहेगा, जिसका स्वामी चंद्र है। सूर्य भी शनि की राशि कुंभ में रहेगा। मंगल वृश्चिक राशि में रहेगा। चंद्रमा मकर राशि में है और ये शनि की राशि है। यह योग ? सभी के लिए अच्छा रहने वाला है।

खासतौर पर मकर, कर्क वालों के लिए भाग्योदय का समय रहेगा। धनु, मिथुन के लिए चिंताएं बढ़ सकती हैं। शेष राशियों के समय सामान्य रहेगा। महाशिवरात्रि पर बेलपत्र के अलावा गंगाजल, गन्ने का रस, पंचामृत और कुशा के जल से भगवान का अभिषेक किया जाता है।

इससे विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। शिवजी को धतूरा बहुत पसंद होता है। इसलिए महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर धतूरा अर्पित करें। इससे शत्रुओं का भय दूर होता है। साथ ही धन लाभ मिलता है। सम्भव हो तो चंदन और रुद्राक्ष भी चढ़ाएं। घर के आसपास में शिवालय न हो तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर भी पूजा की जा सकती है। सूर्योदय के समय पुष्पांजलि और स्तुति कीर्तन के साथ महाशिवरात्रि का पूजन संपन्न होती है। शिव जी को रात्रि जागरण अत्यंत प्रिय है, इसलिए रात्रि जागरण करके शिवलिंग का जलाभिषेक करें।

यह है पूजन मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा होगी। रात्रि पहले प्रहर पूजा का समय शाम ६.05 से ९.20 तक। रात के दूसरे प्रहर में पूजा का समय रात ९.20 से मध्यरात्रि १२.35 तक। तीसरा प्रहर पूजा का समय मध्यरात्रि १२.35 से तड़के 3.49 तक। चौथा प्रहर पूजा का समय सुबह 3.49 से सुबह 7.04 तक। बता दें कि महाशिवरात्रि पर्व मनाने के पीछे दो मान्यताएं हैं। एक सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ था। दूसरा इस दिन शिव का विवाह पार्वती से विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती के विवाह की कथा जरूर सुनें, रामायण की चौपाइयां पढ़ें।

Rajkumar Shah Reporting
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