भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर लौटाई डीडी केवल कागज का टुकड़ा हो रहा साबित

बेरोजगार से मजाक : 200 रुपए के डीडी के मिल रहे 30 रुपए वापस, मामला कूक और अटेंडेंट भर्ती का

जांजगीर-चांपा. जिले में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने कूक और अटेंडेंट भर्ती प्रक्रिया को मजाक बनाकर रख दिया गया है। पहले एकाएक भर्ती प्रक्रिया निरस्त करते हुए हजारों आवेदकों को मायूस कर दिया था। अब डीडी के नाम पर उनके साथ मजाक हो रहा है, क्योंकि यह डीडी केवल आवेदकों के लिए कागज का टुकड़ा साबित हो रही है। बैंक में डीडी लौटाने पर करीब 70 प्रतिशत बैंकर्स शुल्क कट रहा है। जिससे चंद रुपए ही हाथ में आ रहे हैं जिससे आवेदक ठगा महसूस कर रहे हैं।
दरअसल, स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में डीएमएफ फंड से पोषण पुनर्वास केंद्रों में कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया के लिए वैकेंसी निकाली थी। इसमें कूक और अटेंडेंट के 20-20 पद शामिल थे। इसके लिए आवेदन के साथ अजा, अजजा व महिला के लिए सौ रुपए, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 200 और अनारक्षित के लिए 300 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट मांगा गया था। विगत 22 और 23 अक्टूबर को इन पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया ली गई थी। इसमें कूक के लिए करीब 550 और अटेंडेंट के लिए 12 सौ से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था। मगर अचानक स्वास्थ्य विभाग ने ग्रेडिंग सिस्टम का हवाला देकर पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही निरस्त कर दिया और आवेदकों को पोस्ट से उनके पते पर दो से तीन हफ्तों के भीतर डीडी वापस भेज दिए जाने का हवाला दिया गया था। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब पोस्ट से डीडी तो वापस लौटाया जा रहा है मगर यह डीडी अब किसी काम का नहीं आ रहा। क्योंकि जितने रुपए डीडी बनाने में खर्च हुए हैं उनका एक तिहाई हिस्सा भी हाथ में नहीं आ रहा। इधर बैंक अधिकारियों का कहना है कि यह नियम है। डीडी कैङ्क्षसल कराने पर शुल्क कटता है। यह शुल्क लगेगा ही।

200 रुपए का डीडी, मिल रहा केवल 30 रुपए
कूक के लिए आवेदन करने वाले जांजगीर के आकाश थवाईत, खोखरा के विक्रम राठौर, विकास राठौर, पेण्ड्री के मुकेश कश्यप और राहुल सूर्यवंशी ने आवेदन के साथ 200-200 रुपए का बैंक डिमांड ड्राफ्ट एसबीआई जांजगीर से बनवाकर जमा किया था। कुछ दिनों पहले उन्हें पोस्ट से डीडी वापस मिला तो बैंक लेकर गए तो कर्मचारियों ने बताया कि डीडी कैङ्क्षसल कराने पर बैंक शुल्क लगेगा। 170 रुपए कटेंगे और 30 रुपए ही मिलेंगे। कुल मिलाकर यह बेरोजगारों से मजाक हो रहा है।

बेरोजगारों के लाखों रुपए हो गए बर्बाद
भले ही एक आवेदक के लिए यह सौ-दो सौ रुपए की बात हो, मगर दो हजार अभ्यर्थियो की संख्या को देखे तो यह राशि लाखों रुपए में हो रही है जो स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से बर्बाद हो गए। इधर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा। अफसर तो यही कह रहे हैं हमनें तो डीडी लौटा दिया है। अब बैंक वाले ऐसा कर रहे हैं तो हम क्या कर सकते हैं।

आधे आवेदकों के पास अब तक डीडी नहीं पहुंची
इधर डीडी आवेदकों को वापस करने के मामले में भी स्वास्थ्य विभाग का दावा फेल साबित हो रहा है। दो से तीन हफ्ते में डीडी उनके पते पर पहुंच जाने का हवाला दिया गया था मगर महीने दिन से ज्यादा हो जाने के बाद भी सैकड़ों आवेदकों को अब तक डीडी भी नहीं मिली है।

डीडी वापस पर शुल्क लगेगा ही: ब्रांच मैनेजर
इस संबंध में एसबीआई मेन ब्रांच जांजगीर के शाखा प्रबंधक ने बताया कि डीडी कैंसल कराने पर एक निश्चित शुल्क लिए जाने का नियम है। इसी के तहत शुल्क काटा जाता है। यह शुल्क देना ही पड़ेगा।

वर्जन
डीडी सभी आवेदकों के पते पर भेज दी गई है। बैंक में इतना ज्यादा शुल्क कटने की जानकारी मुझे नहीं है। ऐसे भी अब यह बैंक का मामला है हमारा नहीं।
डॉ. एसआर बंजारे, सीएचएचओ

Deepak Gupta Reporting
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