खाने-पीने के चीजों में अब अगर नीला बर्फ मिलाते दिखे तो मत खाना

खाने-पीने के चीजों में अब अगर नीला बर्फ मिलाते दिखे तो मत खाना

Vasudev Yadav | Updated: 19 May 2019, 12:33:37 PM (IST) Janjgir Champa, Janjgir Champa, Chhattisgarh, India

बदलाव : अब बर्फ के रंग होंगे अलग-अलग, खाने वाली होगी सफेद और नहीं खाने वाली नीली

जांजगीर-चांपा. बर्फ के गोले, लस्सी और जूस में ऐसे बर्फ का उपयोग हो रहा है, जिसे खाने के लिए नहीं बनाया जाता। इसे खाना सेहत के लिए नुकसानदायक है। इसे रोकने के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया ने (एफएसएसएआई) ने खाद्य व अखाद्य बर्फ में अंतर पहचाने के लिए अखाद्य (खाने योग्य नहीं) बर्फ को नीला करने को कहा है। जिले में भी अफसरों ने इस संबंध में सभी बर्फ फैक्ट्री को आदेश जारी कर दिया है। बर्फ फैक्ट्री अब दो रंग के बर्फ बनाएंगे।
जिला स्तर पर जिला खाद्य एवं सुरक्षा विभाग ने अमल करना शुरू कर दिया है। इसके तहत बर्फ फैक्ट्रियों में जाकर जांच की जा रही है। सभी फैक्ट्री संचालकों को अखाद्य बर्फ में इंडिगो केरामाइन (गहरा नीला) या फिर ब्रिलियंट ब्लू (आसमानी नीला) रंग का उपयोग कर बर्फ बनानी होगी। एक बर्फ की सिल्ली में रंग की 10 पीपीएम की मात्रा मिलानी जरूरी है। इससे रंग बर्फ में साफ नजर आएगा। इससे अखाद्य बर्फ की पहचान आसानी से हो जाएगी। वहीं खाने योग्य बर्फ सफेद रंग की होगी। यानी ऐसी बर्फ अपने वास्तविक रंग में रहेगी। ऐसा करने से बर्फ गोला, जूस आदि पेय पदार्थ बेचने वाले अखाद्य बर्फ का उपयोग नहीं कर पाएंगे। लोग देखते ही अखाद्य बर्फ को पहचान जाएंगे।

जानिए, इस बदलाव की पीछे वजह क्या
बर्फ दो तरह की होती है। एक खाने वाली व दूसरी अखाद्य, लेकिन अभी तक दोनों ही बर्फ का रंग एक जैसा होता है। इसलिए अखाद्य बर्फ को फैक्ट्री वाले खाद्य बनाकर बेचते थे और दुरुपयोग करते थे। अफसर भी जांच करने जाते थे तो फैक्ट्री संचालक यह कहकर गुमराह कर देते हैं इस बर्फ को उन्हें खाने लायक नहीं बनाया है। वे चाहे जैसे भी पानी से बर्फ बनाते थे। चूंकि बर्फ जमने के बाद पता नहीं लगता है कि पानी कैसा है। इसलिए इस बात का फायदा उठाकर फैक्ट्री संचालक अखाद्य बर्फ को भी खाद्य बताकर बाजार में बेचते थे। ऐसे में अधिकारी भी कुछ नहीं कर पाते हैं। अब अगर सफेद बर्फ की क्वालिटी खराब निकलेगी तो फैक्ट्री संचालक भी इंकार नहीं कर पाएंगे।

सफेद बर्फ : मतलब खा सकते हैं
खाने वाली बर्फ सफेद रंग की होगी। इसे बनाने के लिए फैक्ट्री संचालकों को पीने योग्य पानी का उपयोग करना होगा।

नीली बर्फ: मतलब खाने लायक नहीं
अब अखाद्य बर्फ का रंग खाद्य सुरक्षा विभाग ने नीला रखा है। बर्फ नीली दिखनी जिससे आसानी से पता चल जाएगा कि बफज़् खाने वाली नहीं है।

वर्जन
शासन के आदेश पर जिले के सभी बर्फ फैक्ट्री संचालकों को अखाद्य बर्फ में नीला रंग डालने को कहा गया है। इससे लोग अखाद्य बर्फ को आसानी से पहचान जाएंगे। साथ ही जांच के दौरान भी आसानी होगी। खाने योग्य बर्फ सफेद और नहीं खाने योग्य बर्फ नीले रंग की होगी।
अजीत बघेल, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी जांजगीर-चांपा

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