पत्रिका विशेष : आखिर क्यों इस गांव के लोग खाना पकाने के लिए हैंडपंप के पानी का नहीं करते इस्तेमाल, पढि़ए खबर...

पत्रिका विशेष : आखिर क्यों इस गांव के लोग खाना पकाने के लिए हैंडपंप के पानी का नहीं करते इस्तेमाल, पढि़ए खबर...

Vasudev Yadav | Publish: Jan, 14 2018 04:11:12 PM (IST) Janjgir, Chhattisgarh, India

ग्रामीणों का कहना है कि उनके यहां नदी पानी एकदम साफ है और हैंडपंप का पानी मोटा (खारा) है, इस पानी से दाल-चावल व अन्य खाद्य पदार्थ नहीं पकता।

डॉ.संदीप उपाध्याय
जांजगीर-चांपा. जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर बलौदा विकासखंड अंतर्गत देवरी गांव में भले ही सीसी रोड, हैंडपंप व अन्य सुविधाएं ग्रामीणों को मुहैया हो गई हैं, लेकिन यहां के लोग खाना पकाने के लिए आज भी नदी के पानी का ही प्रयोग करते हैं। नदी के पानी के प्रदूषित होने व उसके उपयोग से बीमार पडऩे की बात पर ग्रामीणों का कहना है कि उनके यहां नदी पानी एकदम साफ है और हैंडपंप का पानी मोटा (खारा) है, इस पानी से दाल-चावल व अन्य खाद्य पदार्थ नहीं पकता। इसलिए नदी के पानी का उपयोग खाना पकाने के लिए किया जाता है। नदी के पानी से कोई भी खाद्य पदार्थ अच्छे तरीके से पक जाता है।

देवरी गांव को अगर स्वच्छ भारत अभियान के तहत जिले का आईडियल ग्राम बनाया जाए तो अति संयोक्ति नहीं होगी। यहां की सीसी रोड व सभी घर एकदम साफ व धूल रहित हैं। यहां काफी पेड़ पौधे लगे हैं। घरों में शौचालय बने हैं। नदी के किनारे बसें इस गांव में धीरे-धीरे पिकनिक स्पॉट भी डवलब होता जाता है। यहां बड़ी संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। इतना खुशहाल गांव होने के बाद भी यहां भूगर्भ जल खारा है। इससे यहां के लोगों ने नदी के जल को खाना पकाने का पर्याय बना लिया है।

पत्रिका की टीम जब देवरी गांव पहुंची तो वहां से छोटी.छोटी बच्चियां खाना पकाने वाले पतीले में नदी का पानी भर कर ले जा रहीं थी। पूछने पर अंजली नाम की एक लड़की ने बताया कि हैंडपंप के पानी से खाना नहीं पकता, क्योंकि वह खारा है। इसलिए वह लोग नदी के पानी का उपयोग खाना बनाने के लिए करते हैं।

पीने के लिए नहीं करते उपयोग
ग्रामीणों ने एक और जागरूकता वाली बात यह बताई कि वह नदी के पानी का उपयोग केवल खाना पकाने के लिए करते हैं। खाना पकाने में पानी काफी अधिक उबल जाता है, इससे उसमें मौजूद बैक्टीरिया मर जाते हैं। पीने के लिए गांव वाले हैंडपंप का ही पानी उपयोग करते हैं। इससे अभी तक इस गांव में कोई भी संक्रामक बीमारी या वायरल आदि की समस्या नहीं हुई है।

सभी बच्ची पढऩे वाली
नदी का पानी लेकर आ रही एक 9.10 साल की बच्ची से जब नदी का पानी ले जाने के बारे में पूछा गया तो उसने नो कमेंट प्लीजण्ण्ण् कहा। उसका अंग्रेजी में जवाब सुनकर काफी अच्छा भी लगा और सुकून भी। फिर एक अन्य बच्ची ने बताया कि यहां सभी लड़की लड़के रोज समय पर स्कूल जाते हैं।

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