scriptFarmers of the district are also doing hi-tech farming by Shednet Hous | जिले के किसान शेडनेट हाउस पद्धति से भी कर रहे हाईटेक खेती | Patrika News

जिले के किसान शेडनेट हाउस पद्धति से भी कर रहे हाईटेक खेती

परंपरागत खेती से आगे निकलते हुए जिले के किसान अब नई-नई तकनीक को भी अपना रहे हैं। इसी कड़ी में जिले के किसान शेडनेट हाउस पद्धति से भी खेती करने लगे हैं। जिले में करीब दो दर्जन से ज्यादा किसान इसी पद्धति से खेती-किसानी को बढ़ावा दे रहे हैं।

जांजगीर चंपा

Published: May 12, 2022 09:01:18 pm

जांजगीर-चांपा. शेडनेट हाउस में खेती करने से किसानों को अच्छी फसल उत्पादन का भरोसा रहता है क्योंकि इसके अंदर तैयार हो रहे पौधों को पर्याप्त मात्रा में अनुकूल मौसम मिलता है। ज्यादा बारिश, अंधड़, ओलावृष्टि से फसल सुरक्षित रहते हैं। इसीलिए फसल खराब होने का खतरा ज्यादा खत्म हो जाता है वहीं अनुकूल वातावरण मिलने से फसल की क्वालिटी भी अच्छी निकलती है। एक तरह से पॉली हाउस की तर्ज पर ही तैयार होता है पर उसकी तुलना में इसकी लागत कम होती है। हालांकि यह शेडनेट हाउस बनाना काफी खर्च आते हैं। इसीलिए केंद्र और राज्य दोनों के द्वारा करीब ७० फीसदी तक सब्सिडी दे रही है। यानी अगर १० लाख रुपए लागत आती है तो किसान को ३ लाख रुपए ही लगाने पड़ते हैं। बाकी राशि सब्सिडी के तौर पर किसान को वापस मिल जाती है। इस पद्धति के प्रति बढ़ावा देने उद्यानिकी विभाग के माध्यम से जिले को करीब दो दर्जन किसानों को लाभ दिलाया गया है।
शेडनेट हाउस के फायदे
शेटनेट हाउस में फूल, बेलबूटेदार, जड़ी-बूटी, सब्जियों और मसालों की खेती आसानी से की जा सकती है। फलों और सब्जियों की नर्सरी, जंगली प्रजातियों आदि के लिए उपयोग होते हैं। इसके अंदर फसल कीट प्रकोप से भी बचा रहता है। आंधी, बारिश,ओले और पाले जैसे प्राकृतिक प्रकोप का असर नहीं पड़ता। टिशु कल्चर पौधे अच्छे से तैयार होते हैं।
विदेशी तकनीक भी अपनाने में पीछे नहीं किसान
जिले के किसान परंपरागत खेती से आगे निकलते हुए विदेशी तकनीकों से भी खेती करने में आगे आ रहे हैं। पाली हाउस और शेडनेट हाउस से खेती की पद्धति इजराल और होलेंड जैसे देशों की चलन है जो अब यहां के किसान भी अपना रहे हैं। इसमें सरकार भी बड़ी भूमिका निभा रही है।
वर्जन
किसानों को उन्नत खेती के आगे बढ़ाने के उद्देश्य से विभाग के जरिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। शेडनेट हाउस पद्धति से खेती भी इसी का हिस्सा है। इसमें खेती काफी सुरक्षित मानी जाती है। इसीलिए किसान इस ओर रुचि ले रहे हैं। शासन ने सब्सिडी भी ५० प्रतिशत से बढ़ाते हुए ७० प्रतिशत कर दी है। इससे किसान को इसे अपनाने में आर्थिक दिक्कतें भी कम हो गई है। हर साल लक्ष्य के अनुसार जिले के किसानों को शेडनेट हाउस बनाने मदद की जा रही है।
रंजना माखीजा, सहायक संचालक उद्यानिकी
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