खेलगढिय़ा योजना : अपने ही फर्मों से सामान खरीदी के लिए प्राचार्यों पर बना रहे दबाव

- 31 मार्च तक खर्च करनी है राशि, हाई, हायर, मिडिल एवं प्राइमरी स्कूलों के लिए आया तकरीबन एक करोड़

जांजगीर-चांपा. खेलगढिय़ा योजना में फर्जी फर्म के माध्यम से स्कूलों में खेल सामग्री की सप्लाई के लिए जिले के स्कूलों में बड़ी संख्या में फर्जी फर्म सक्रिय हो गए हैं। दरअसल, इस योजना के तहत शासन ने हाई एवं हायर सेकंडरी, मिडिल व प्राइमरी स्कूलों में पांच से लेकर 25 हजार तक बजट स्वीकृत हुआ है। बजट को 31 मार्च तक खत्म करना है। जिसके लिए जिले के स्कूलों में खेल सामाग्री की सप्लाई करने वाले ऐसे लोग सक्रिय हैं जिनका न तो कोई फर्म है और न ही खेल सामग्री की दुकान। ऐसे लोग खुद का फर्जी फर्म बनवाकर सामान की सप्लाई करने की बात कह रहे हैं।

प्रदेश की सरकार ने नई खेलगढिय़ा योजना की शुरूआत की है। योजना के तहत स्कूलों में खेल सामाग्री के लिए पांच से 25 हजार रुपए प्रदान की है। खेल सामानों की खरीदी स्कूलों के प्रधान पाठक व प्राचार्यों को करनी है, लेकिन जब से योजना के तहत स्कूलों में बजट आया है तब से स्कूलों में ऐसे लोग सक्रिय नजर आ रहे हैं जो अपना फर्म बताकर स्कूल के प्राचार्यों पर दबाव बना रहे हैं और अपने फर्म से सामान सप्लाई की बात कर रहे हैं। जिसके चलते प्राचार्य अच्छे खासे दबाव में हैं। हालांकि खेल सामाग्री की खरीदी के लिए प्राचार्य स्वतंत्र हैं और अपने स्तर में समिति बनाकर खेल सामग्री की खरीदी कर सकते हैं, लेकिन उन्हें बेवजह यह कहा जा रहा है कि उन्हें घर बैठे सामानों की सप्लाई कर दी जाएगी।

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इन सामानों की करनी है खरीदी
स्कूलों में खेल को बढ़ावा देने के लिए बैडमिंटन, फुटबाल, क्रिकेट बेट, बास्केट बाल सहित 14 किस्मों के खेल सामग्री की सप्लाई की जानी है। इसके तहत शिक्षा विभाग में कार्यरत एवं फर्जी फर्मों के तहत खेल सामग्री की सप्लाई करने वाले लोग सक्रिय हैं। उन्होंने अपनी शर्तों में कहा है कि उन्हें घर बैठे सामानों की सप्लाई की जाएगी। सामग्री प्राप्ति के बाद सात दिवस के भीतर रकम का भुगतान करना होगा सहित अन्य शर्तें शामिल है।
खरीदी के लिए यह नियम एवं शर्तें
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार खेल सामग्री की खरीदी के लिए विद्यालय स्तर में समिति बनाई जाएगी। समिति का अध्यक्ष प्राचार्य एवं प्रधान पाठक को बनाया जाएगा। इसके अलावा सदस्य के रूप में दो वरिष्ठ शिक्षकों को शामिल किया जाएगा। इतना ही नहीं बाकायदा खेल सामानों की लिस्टिंग की जाएगी, जिसका हिसाब स्कूलों में रहेगा।
बिलासपुर रायपुर के फर्म सक्रिय
सामानों की खरीदी के लिए जिले के स्कूलों में बाकायदा बिलासपुर रायपुर के फर्म सक्रिय है। अपना कोटेशन लेकर स्कूलों में घूम रहे हैं और आर्डर सप्लाई करने की बात कह रहे हैं। इनके द्वारा प्राचार्यों को 20 से 25 प्रतिशत तक कमीशन देने की बात कही जा रही है। फर्मों का न तो टिन नंबर है और न कोई ठोस ठिकाना।

शैक्षणिक जिला जांजगीर-चांपा व सक्ती को मिलाकर 154 हाई एवं हायरसेकंडरी स्कूलों के लिए 25-25 हजार रुपए मिलाकर 38 लाख रुपए स्वीकृत हुआ है। वहीं मिडिल एवं प्राइमरी के 2600 स्कूलों के लिए तकरीबन एक करोड़ स्वीकृत है। प्राइमरी स्कूलों के लिए 3 हजार, मिडिल स्कूलों के लिए 5 हजार एवं हायरसेकंडरी स्कूलों के लिए 25 हजार रुपए का खेल सामग्री खरीदी करनी है।

- स्कूलों में खेल सामग्री की खरीदी के लिए प्रधानपाठक व प्राचार्य स्वतंत्र हैं। उन्हें ऐसे फर्मों से दूर रहकर स्वतंत्र रूप से खेल सामानों की खरीदी करनी है। हमारे पास अब तक इस तरह की शिकायत नहीं मिली है- विजय टांडे, एपीओए आरएसएमए

-खेल सामानों की खरीदी का काम स्कूल स्तर पर किया जाना है। चूंकि राशि प्राचार्य व प्रधानपाठकों के खाते में जाना है। इसलिए प्राचार्य व प्रधानपाठक स्वतंत्र हैं - डीके कौशिक, डीईओ

Vasudev Yadav
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