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कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने सारा ध्यान कर रहे केंद्रित

locationजांजगीर चंपाPublished: Nov 14, 2022 09:53:30 pm

अमूमन बच्चों को दो साल तक संतानपालन कराना चाहिए। वहीं शुरुआती पांच सालों में बच्चों की सेहत पर विशेष ध्यान रखना चाहिए।

कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने सारा ध्यान कर रहे केंद्रित
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जब बच्चा बचपन में स्वस्थ्य रहेगा तो उसका भविष्य भी उज्जवल रहेगा। यह बातें जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एके जगत ने पत्रिका से साझा की। उन्होंने बताया कि आज भी ग्रामीण अंचल की महिलाएं अज्ञानतावष पौषिक भोजन से दूर रहते हैं। जिसके चलते गर्भवति महिलाएं कुपोषित बच्चों को जन्म देती हैं। यदि ऐसी महिलाएं गर्भावस्था से ही पौष्टिक भोजन करें तो जच्चा बच्चा भी स्वस्थ्य होगा।
सवाल: जिले में कुपोषित बच्चों को आंकड़ा कम क्यों नहीं हो रहा है। जवाब: दरअसल, ग्रामीण अंचल की महिलाएं आज भी पौष्टिक भोजन से अनजान है। खासकर ऐसी महिलाओं को फल-फूल सहित गर्म भोजन, सोयाबीन, मूंगफली व गुड़ का सेवन करना चाहिए। सवाल: जिला अस्ताल में हेल्दी सीजन में भी मरीज क्यों बढ़ रहे हैं? जवाब: जिला अस्पताल में सुविधा बढ़ रही है। जिसके चलते मरीज अब निजी अस्पतालों के बजाए जिला अस्पताल की रुख कर रहे हैं। दरअसल, जिला अस्पताल में आर्थो के अलावा हर मर्ज का इलाज बेहतर ढंग से हो रहा है। जिसके चलते मरीजों की संख्या लगातार तीन गुना बढ़ गई है। सवाल: डायलिसिस की सुविधा भी बढ़ाई गई है इसमें कितने मरीज पहुंच रहे हैं। जवाब: जिला अस्पताल में डायलिसिस की पांच मशीने हैं। जिसमें प्रतिदिन १० डायलिसिस होता है। वर्तमान में २६ मरीज डायलिसिस की नि:शुल्क सुविधा का लाभ ले रहे हैं। जिसमें अभी तक कुल १६२१ बार डायलिसिस किया जा चुका है। सवाल: मरीजों को और क्या नई सुविधा दी जा रही है? जवाब: जिला अस्पताल के मरीजों को हर तरही की सुविधा एक बड़े अस्पताल की तरह दी जा रही है। लैब में भी हर तरह के टेस्ट सुविधा मुहैय्या कराई जा रही है। यहां के मरीजों को अब दीगर जिलों पर निर्भर होना नहीं पड़ रहा है।
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