खाद्य पदार्थों की जांच के नाम पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी कर रहे खुलेआम लूट

खाद्य पदार्थों की जांच के नाम पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी कर रहे खुलेआम लूट

Shiv Singh | Publish: Sep, 12 2018 05:59:59 PM (IST) Janjgir-Champa, Chhattisgarh, India

चांपा में मिली सबसे अधिक शिकायतें

जांजगीर-चांपा. जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारी खाद्य पदार्थों की जांच के नाम पर व्यवसायियों से खुलेआम लूट कर रहे हैं। जो व्यवसायी जांच कार्रवाई से डर रहा है वह सीधे खाद्य सुरक्षा अधिकारी को १० से १५ हजार रुपए देकर समझौता कर रहे हैं। चांपा में इस तरह की शिकायतें इन दिनों आम हो चुकी है।

एक सप्ताह के भीतर चार से पांच मामले सामने आ चुके, जिसमें खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने व्यवसायियों के ठिकाने में दबिश देकर खद्य पदार्थों की जांच की, लेकिन कार्रवाई से डर कर अफसरों से समझौता कर ली है। वहीं व्यवसायी अफसरों से कौन पंगा ले कहकर शिकायत करने भी सामने नहीं आ रहे हैं। क्योंकि उन्हें उन्हीं अफसरों के बीच रहकर काम करना है।


जिले में छोटे बड़े व्यवसायियों को मिलाकर १० हजार व्यवसायी हैं। इन्हें खाद्य पदार्थों की बिक्री के लिए खाद्य अधिनियम के तहत पंजीयन कराना अनिवार्य होता है। इतना ही नहीं दुकानों में जो खाद्य सामाग्री की बिक्री कर रहे हैं वह मिसब्रांड नहीं होना चाहिए। जांच के दौरान पकड़े जाते हैं तो अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई का प्रावधान होता है। जिसमें २० से ३० हजार रुपए का जुर्माना व जुर्माना नहीं पटाने की शर्त पर सजा का भी प्रावधान होता है।

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जिले में बड़े से बड़े व्यवसायी हैं जिनकी दुकानों में छापेमारी कर खाद्य सुरक्षा अधिकारी खाद्य पदार्थों का सेंपल लेते हैं। उस वक्त हड़कंप मच जाता है जब अफसर छापेमारी कर सेंपल लेते हैं और सामान मिसब्रांड निकल जाता है। जिससे प्रतिष्ठान की बदनामी भी होती है। जिससे बचने के लिए व्यवसायी डरते हैं और अफसरों की नजर से बचने के लिए या तो उनसे पहले से संपर्क करते हैं या फिर छापेमारी के दौरान समझौता करने राजी होते हैं।

समझौता के दौरान १० से १५ हजार रुपए में सौदा तय होता है। जिले में इस तरह का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। बताया जा रहा है कि जिले में १० हजार व्यवसायियों में ३ हजार ने ही अब तक अपनी दुकानों का पंजीयन कराया है। बाकी व्यवसायी बिना पंजीयन के संचालित हो रहा है। इन दिनों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी चांपा में खुलेआम लूटपाट कर रहे हैं।

व्यवसायियों के प्रतिष्ठानों में जा रहे हैं और जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभा रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर चांपा के व्यवसायियों ने बताया कि अफसरों के कार्रवाई के डर से बचने उन्हें इतनी मोटी रकम देते हैं। क्योंकि बाद में कौन कोर्ट कचहरी के चक्कर में फंसे। जिसका फायदा उठाकर खाद्य सुरक्षा अधिकारी मालामाल हैं।


सालाना 80 प्रकरण का टारगेट
खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीके देवांगन ने बताया कि सालाना उनकी टीम द्वारा ७० से ८० प्रतिष्ठानों में छापेमारी कर प्रकरण बनाया जाता है। खाद्य पदार्थों का सेंपल लिया जाता है। सेंपल को रायपुर स्थित लैब भेजा जाता है। फिल लैब से जो रिपोर्ट आती है उस हिसाब से कार्रवाई की जाती है। देवांगन ने बताया कि ३० प्रतिशत सेंपल मिसब्रांड पाए जाते हैं। शेष प्रकरण में प्रतिष्ठानों के खिलाफ जुर्माना किया जाता है।


इस तरह होती है समझौता
खाद्य सुरक्षा अधिकारी दुकानों में पहुंचते हैं। वे सामान का सैंपल लेना शुरू करते हैं। इससे व्यवसायी डर जाता है। वह चाहता है कि उसके दुकान के खाद्य पदार्थों का सेंपल लैब न भेजा जाए। इस दौरान वह खाद्य सुरक्षा अधिकारी से समझौता को राजी होता है। अफसरों द्वारा मोटी रकम की मांग की जाती है। आखिरकार मामला १५ से २० हजार रुपए में सेटलमेंट हो जाता है। कई व्यवसायी ऐसे होते हैं जो अफसरों के आते ही पहले से समझौता करने लग जाते हैं। क्योंकि उन्हें पता होता है कि बाद में लपेटे में आ जाएंगे तो बुरे फसेंगे। इससे पहले ही वह अफसर से संपर्क कर लेता है।


-हमारा काम ही होता है खाद्य पदार्थों की जांच कर सेंपल लैब भेजना। यह आरोप बेबुनियाद है। कार्रवाई से बचने के लिए व्यवसायी कुछ भी बोलता है। हमारा काम व्यवसायियों के खिलाफ एक्शन लेना है।
-अजीत बघेल, खाद्य सुरक्षा अधिकारी

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