बोतलबंद, पाउच और आरओ वाटर के नाम पर बिक रहा पानी कितना शुद्ध नहीं मालूम

बोतलबंद, पाउच और आरओ वाटर के नाम पर बिक रहा पानी कितना शुद्ध नहीं मालूम

Vasudev Yadav | Publish: Apr, 22 2019 07:13:29 PM (IST) | Updated: Apr, 22 2019 07:13:30 PM (IST) Janjgir Champa, Janjgir Champa, Chhattisgarh, India

पानी की शुद्धता की जांच कराने फूड एंड सेफ्टी विभाग ने इस साल अब तक नहीं लिए सैंपल

जांजगीर-चांपा. गर्मी बढ़ते ही लोकल ब्रांड पानी पाउच व बोतल बंद मिनरल वाटर की भी सप्लाई बढ़ गई है। जिले में लोकल ब्रांड समेत दूसरे जिले के भी पानी पाउच व बोतलें कम से कम दाम पर ये जगह-जगह बिक रही है। कई कंपनी के पानी पाऊच में तो उत्पादन और एक्सपायरी डेट तक नहीं लिखी हुई है। जिससे यह तक मालूम नहीं चलता कि पैकेट में पानी कितने समय का है। इसके अलावा जिले में आरओ वाटर के नाम पर लाखों का व्यापार हो रहा है।
दुकान से लेकर आफिस, घरों व शादियों में आरओ वाटर केन ट्रेंड बन गया है, लेकिन यह पानी कितना शुद्ध है, इसकी जानकारी संबंधित विभाग के अधिकारियों के पास भी नहीं है। क्योंकि इस साल अब तक पानी सैंपल की जांच नहीं हो पाई है। ऐसे में पानी कितना शुद्ध है, पानी में जरूर मिनरल्स है कि नहीं, इसकी शुद्धता को लेकर किसी के पास कोई जानकारी नहीं है। रोजाना हजारों बैग बिकने वाले पानी पाउच की शुद्धता से भी लोग अनजान है, बावजूद जमकर इस्तेमाल हो रहा है। खरीददार से लेकर जिम्मेदार विभाग ने इस पर कोई सवाल नहीं उठाया है, लोगों को यह तक पता नहीं है कि उन्हें आरओ वाटर के नाम पर कौन सा पानी पिलाया जा रहा है, और ये स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। जबकि पूर्व के सालों में पानी के कई सैंपल जांच में फेल हो चुके हैं बावजूद इसके जांच में गंभीरता नहीं दिख रही।
जिला मुख्यालय समेत जिले में बड़ी संख्या में ऐसे फर्म हैं, जो आरओ वाटर के नाम पर केन सप्लाई करते हैं। इन्होंने अपना आरओ प्लांट (पैकेजिंग प्लांट) भी लगा रखा है। अप्रैल से जून माह तक ऐसे सप्लायरों की संख्या और भी बढ़ जाती है। 20-20 लीटर के केन में रोजाना हजारों केन पानी की सप्लाई हो रही है। रोजाना हजारों लीटर तक पानी जिले में खप जा रहा है। बड़ी संख्या में हो रहे इस पानी के इस्तेमाल के बावजूद गुणवत्ता की जांच अब तक नहीं की गई है, और न ही विभाग ने कोई कदम उठाए।

आरओ प्लांटों में पानी का सोर्स टयूबवेल ही
इनके फिल्टर प्लांट में जरुरी नाम्र्स का पालन किया जा रहा है या, इसकी जांच जिम्मेदार विभाग नहीं कर रहा। बता दें, आरओ प्लांट में पानी का सोर्स टयूबवेल ही है। ऐसे में इस पानी को आरओ के नाम पर किस हद तक उपचारित किया जा रहा है, यह भी बड़ा पहलू है, जो जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन फूड एंड सेफ्टी विभाग इसके लिए केवल निर्देश का इंतजार कर रहा है।

आरओ वाटर के लिए जरुरी ये हैं मिनरल
फ्लोराइड 0.5 से 1.5 मिली.
घुलनशील लवण 500 से 1500 मिली.
नाइट्रेट 0 से 45 मिली.
क्लोराइड 10 से 500 मिली.
पीएचपीए 6.5 से 8.5 मिली.

(डब्यूएचओ द्वारा निर्धारित मापदंड के मुताबिक)
आरओ प्लांट में पानी को शुद्ध करने ऐसी है प्रक्रिया
- पानी में गंदगी व तलछट रेत को फिल्टर करना।
- पानी से बारीक कार्बन को खत्म करना।
- फिल्टर प्लांट से क्लोरिन व नए आर्गेनिग गंध से गंदगी खत्म करना।
- हानिकारिक केमिकल को खत्म करना।
- खनिज को जरूरत के मुताबिक मेंटेन रखना।

जल जनित रोग का खतरा
सीएमएचओ डॉ. विजय अग्रवाल का कहना है कि पानी में जरूरी मिनरल का होना बहुत जरूरी है। जरूर मिनरल्स की कमी और और लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन करने से जल जनित रोग का खतरा बढ़ जाता है। डायरिया और पीलिया से पीडि़त हो सकते हैं।

वर्जन
पिछले साल जिले के आरओ प्लांट में जाकर पाऊच, बोतलबंद पानी का संैपल लिया गया था। इस साल अभी जांच नहीं हो पाई है। इसके लिए विभाग तैयार कर हा है। जल्द ही सैंपल कर जांच कराई जाएगी।
डीके देवांगन, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी जांजगीर-चांपा

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