scriptJust look at the government.... Anganwadi class in the hut and the tal | जरा देखिए सरकार....झोपड़ी में आंगनबाड़ी की क्लास और हो रही गढ़वो नवा छत्तीसगढ़ की बात | Patrika News

जरा देखिए सरकार....झोपड़ी में आंगनबाड़ी की क्लास और हो रही गढ़वो नवा छत्तीसगढ़ की बात

पहले इस तस्वीर को अच्छे से देख लिजिए, क्योंकि तस्वीर में दिखाई दे रही ये झोपड़ीनुमा परछी किसी सुदूर वनाचंल क्षेत्र का स्कूल नहीं है, बल्कि जिला मुख्यालय जांजगीर से बमुश्किल ५-६ दूर नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत सरखों के एक आंगनबाड़ी केंद्र की है। जी हां, इसी परछी के नीचे न सिर्फ रोज आंगनबाड़ी की क्लास लगती है बल्कि बच्चे इसी के नीचे बैठकर खाना भी खाते हैं।

जांजगीर चंपा

Published: April 14, 2022 09:36:01 pm

जांजगीर/सरखों. क्योंकि इस आंगनबाड़ी केंद्र का स्वयं का कोई भवन नहीं है। जो भवन था वह जर्जर हो गया जिसके बाद गांव में ही एक घर की परछी को ही आंगनबाड़ी केंद्र के लिए किराए पर लिया गया। क्योंकि २०० रुपए मंथली किराए में गांव में कोई भवन नहीं मिला। ऐसे में मजबूरी में ही यहां पर आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करना पड़ रहा है। मगर विडंबना है कि न तो जिला मुख्यालय में बैठे जिला प्रशासन के अफसरों को बच्चों की यह स्थिति नजर आ रही है और न ही महिला एवं बाल विकास विभाग के एसी कमरों में बैठे यहां जिले के अधिकारियों को। यहां तक आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर रोज मॉनिटरिंग करने वाले पर्यवेक्षकों को केंद्र की यह दर्दशा नहीं दिख रही है। तभी तो यह तस्वीर नहीं बदल रही। जबकि यह स्थिति कोई एक-दो माह से नहीं बल्कि करीब दो साल से चली आ रही है।
परछी में कैसे सुरक्षित रहेगा बच्चों के खेलने का सामान, इसीलिए तालों में बंद
सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों को खेलने के लिए जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में हर साल स्कूल प्री किट बांट रही है। करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाया जा रहा है लेकिन क्या फायदा जब बच्चों को ये खेलने के लिए नहीं मिले। यहीं हाल यहां का है, क्योंकि परछी में इन सामानों को आखिर कैसे रखें तो कहां, चोरी होने का खतरा। चोरी हो गई तो कार्यकर्ता-सहायिकाओं की लापरवाही। ऐसे में घरों में ही तालों में बंद है और बच्चे इससे वंचित।
विडंबना : गांव में १० आंगनबाड़ी केंद्र, ८ में बिजली नहीं
इधर शहर से गांवों में नए आंगनबाड़ी केंद्र भवन तो कुकरमुत्ते की तरह बनाए जा रहे हैं और करोड़ों रुपए फूंके जा रहे हैं लेकिन विडंबना है कि इन आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली, पानी, टॉयलेट का अता-पता नहीं है। ग्राम पंचायत सरखों में ही १० आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। जिसमें से एक जर्जर होने से परछी में चल रहा है तो ९ में से आठ में आज तक बिजली नहीं पहुंची। एक में ही बिजली है। समझ सकते हैं कि इस गर्मी में बच्चे इन केंद्रों के भीतर किस तरह बैठते होंगे। मगर अफसरों को बच्चों की यह तकलीफ कहां से दिखेगी।
बाबा आदम जमाने का नियम
एक तरफ महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन से लेकर सुपोषण अभियान, पूरक पोषण आहार आदि के नाम पर शासन से इतना पैसा आता है जितना शायद ही किसी दूसरे विभाग को मिलता हो। मगर इसके बाद भी यहां बाबा आदम जमाने का नियम चल रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में आंगनबाड़ी भवन किराए में लेने के लिए महज २०० रुपए किराया मिलेगा। जिसमें बिजली, पानी और टॉयलेट भी हो। इतने पैसेमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे कैसे चलाएंगे। अफसरों को इससे कोई मतलब नहीं क्योंकि शासन का नियम है। यही वजह है कि अधिकांश गांवों में जहां भवन नहीं है वहां ऐसी ही स्थिति है। कहीं एक छोटे से कमरे में केंद्र चल रहा है तो कहीं पंचायतों के सामुदायिक भवन या मंगल भवनों में जहां बिजली-पानी की बात बेमानी है।
वर्जन
बरामदे में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन होने की जानकारी नहीं है। ऐसा है तो सही नहीं है। तत्काल इस पर संज्ञान लेते हुए व्यवस्था बनाई जाएगी।
राजेन्द्र कश्यप, डीपीओ
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जरा देखिए सरकार....झोपड़ी  में आंगनबाड़ी की क्लास और हो रही गढ़वो नवा छत्तीसगढ़ की बात
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