यहां 5 साल में 75 लोगों की हो चुकी है मौत, खौफ इतना कि जाने से डरते हैं लोग

छत्तीसगढ़ में एक इलाका है जो खून की प्यासी हो चुकी है। यही वजह है कि पिछले पांच साल के भीतर दो दर्जन लोग काल के गाल में समा गए हैं। 

जांजगीर-चाम्पा. जब से क्षेत्र में चार-चार कोलवाशरी खुली है तब से बलौद क्षेत्र की सड़क खून की प्यासी हो चुकी है। यही वजह है कि पिछले पांच साल के भीतर दो दर्जन लोग सड़क पर ही भीमकाय वाहनों के काल के गाल में समा गए हैं। प्रशासन के लोग जनसुनवाई की औपचारिकता पूरी कर लेते हैं।

चौथे साल एक कोलवाशरी खुल जाता है और ऐसे कोलवाशरी में दिन भर कोयला ढोने भीमकाय वाहन फर्राटे मारते हैं और सड़क पर चल रहे लोग चींटी की तरह रौंदे जाते हैं। बाद में ऐसे लोग जब अपनी आवाज प्रशासन के सामने बुलंद करते हैं तब उन्हें शासन की ओर से मिलने वाली 25 हजार मुआवजा देकर मुंह बंद कर दिया जाता है।

road accident in janjgir

बलौदा क्षेत्र में हर साल एक कोलवाशरी को हरी झंडी मिल रही है। जैसे -जैसे यहां कोलवाशरी खुलते जा रही है सड़क पर भीमकाय वाहन फर्राटे मारने लगे हैं। जिसकी चपेट में आकर लोग काल कवलित हो रहे हैं। बीते पांच साल के आंकड़ों में गौर करतें तो 75 लोगों की मौत इस रूट की सड़कों के बीच हो चुकी है। बड़ी बात यह है कि ऐसे भीमकाय वाहनों के चलते सड़क पर हमेशा धूल का गुबार छाया रहता है। धूल के गुबार के कारण लोगों के स्वांस संबंधित बीमारी भी हो रही है।

janjgir road accident


























इतना ही नहीं लोगों को ऐसे वाहनों के चलते सड़कों के परखच्चे उड़ रहे हैं। इसके चलते लोगों को इस रूट में आवागमन करने जान हथेली पर रखना पड़ता है। ऐसे वाहन नगर के बीच होते गुजरती है। जिससे आए दिन दुर्घटना होती है। नो एंट्री के दौरान नगरवासियों को कुछ राहत मिलती है। जैसे ही नो एंट्री का समय सीमा खत्म होती है नगर के लोगों के लोगों का भारी भरकम वाहनों को देखकर रूह कांप उठता है। 

road accident in janjgir champa

एचसी टांडेकर, टीआई बलौदा ने बताया कि पुलिस द्वारा सड़क हादसे से बचने आए दिन मोटरव्हीकल एक्ट के तहत लोगों को जागरूक किया जाता है। भारी वाहनों की रफ्तार में लगाम लगाने भी प्रयास किए जाते हैं।

75 लोगों की जा चुकी है जान

बीते पांच साल में बलौदा क्षेत्र की सड़कों में 75 लोगों की मौत हो चुकी है। जिसमें 90 फीसदी हादसे ऐसे वाहनों की चपेट में आने से हुई है। इतनी ही नहीं लगभग 450 सड़क हादसे में 400 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और वे मौत के मुंह से वापस हुए हैं। यह आंकड़े बलौदा थाना का रिकार्ड बयां कर रहा है। हर साल की तहर वर्ष 2016 में भी 90 सड़क हादसे हो चुके हैं। जिसमें 60 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और 15 लोगों की मौत हो चुकी है।

यह है डेंजर जोन

बलौदा क्षेत्र के जिन सड़कों में लोगों की जान जा रही है उसमें जावलपुर, बछौद, हरदी जर्वे, सरईश्रींगार, पंतोरा, चारपारा, देवांगन पेट्रोल पंप, खिसोरा, डोंगरी, भिलाई, गुरूघासीदास चौंक बलौदा, मवेशी बाजार बलौदा, नगपुरा सहित एक दर्जन स्थान डेंजर जोन निर्धारित किए गए हैं। इन स्थानों में पिछले पांच साल के भीतर दर्जनों लोगों की मौत हुई है। समय रहते इन स्थानों में सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए तो मौतों का सिलसिला जारी रहेगा।
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Piyushkant Chaturvedi
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