उज्जवला की पोल खोल रही सिगड़ी, हर घर में एलपीजी की परिकल्पना अभी अधूरी

केन्द्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में से प्रधानमंत्री उज्जवला योजना शुरु तो हो गई, लेकिन अभी जरूरतमंद लोगो को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

By: Rajkumar Shah

Published: 10 Nov 2017, 01:47 PM IST

जांजगीर-चांपा. केन्द्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में से प्रधानमंत्री उज्जवला योजना शुरु तो हो गई, लेकिन अभी जरूरतमंद लोगो को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसकी बानगी जिला मुख्यालय के बजरंगी पारा में देखने को मिला। योजना का लाभ लेने कानूनी प्रक्रिया से लोगों का भी मोह भंग होने लगा है।

इससे वह सिगड़ी या चूल्हे के माध्यम से ही खाना पकना मुनासिब समझ रहे हैं। मुख्यालय के बजरंगी पारा सहित आसपास के अधिकांश घरों में अभी भी सिगड़ी जलती है। इसके साथ ही कई लोगों को गैस कनेक्शन लने कतार में खड़े नजर आते हैं। इससे उज्जवला योजना के लाभ से जरूरतमंद लोग कोसों दूर हैं।

केंद्र सरकार ने गरीब परिवारों की महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाने के मकसद से उज्जवला योजना को एक मई 2016 को शुरू किया, लेकिन इस योजना के माध्यम से गरीब महिलाओं को धुंए से मुक्ति दिलाने शासन के कारिंदे नाकाम साबित हो रहे हैं। लोगों को योजना का लाभ पाने के लिए एजेंसी संचालकों के द्वारा कई तरह दस्तावेजों की मांग करते हैं इसके साथ ही दस्तावेज पूर्ण नहीं होने का हवाला देकर कईयों को चलता कर दिया जाता है। इसके चलते सरकार की महत्वकांक्षी योजना से जिलेवासी कोसों दूर हैं।

बजरंगी पारा में शाम होते ही घर के बाहर या आंगन में सुलगती सिगड़ी आसानी से देखी जा सकती है, जो सरकार की उज्जवला योजना को मुंह चिढ़ा रही है। इसके अलाव नैला भांठापारा के अधिकांश घरों में भी सिगड़ी या चूल्हे के माध्यम से ही भोजन पकता है। इससे जिले में उज्जवला योजना महज छलावा साबित हो रही है।

जांजगीर नैला रेलवे स्टेशन होने से यहां कोयला से भरी कई मालगाड़ी आती है। स्टेशन में मालगाड़ी रुकने पर लोग मालगाड़ी से कोयला चोरी करने टूट पड़ते हैं। नैला भांठापारा के रहवासी खाना पकने के लिए ईंधन के रूप में सिगड़ी का ही उपयोग करते हैं। इसके अलावा लोगों को कई दुकानों से खरीदी में कोयला मिल जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी मूर्त रुप नहीं ले सकी योजना

केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी उज्जवला योजना का जिले के ग्रामीण अंचल में भी मुर्त रूप नहीं ले सकी है। जिले के अधिकांश गांव में चूल्हे के माध्यम से ही खाना पकाया जाता है। सर्वे सूची में नाम नहीं होने का हवाला देकर लाभ से वंचित रखा जाता है।

Rajkumar Shah Reporting
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