scriptRamLeela: The tradition of 70 years old Ramlila has been maintained | 70 साल पुरानी रामलीला की परंपरा को यहां के युवाओं ने रखा है बरकरार, नवरात्रि से दिवाली तक रहती है धूम | Patrika News

70 साल पुरानी रामलीला की परंपरा को यहां के युवाओं ने रखा है बरकरार, नवरात्रि से दिवाली तक रहती है धूम

RamLeela: स्व. जगदीश प्रसाद सिंगसर्वा ने 1958 में की थी शुरुआत, पकरिया झूलन गांव (Pakriya Jhoolan village) में रामलीला (Ramleela) की परंपरा (Tradition) अब भी बरकरार, जनता का मिल रहा भरपूर प्यार और सहयोग

जांजगीर चंपा

Updated: October 29, 2021 08:15:59 pm

जांजगीर/पामगढ़. RamLeela: आधुनिकता के इस युग में भी ग्राम पकरिया झूलन में रामलीला की परंपरा बरकरार है। पामगढ़ ब्लॉक के ग्राम पकरिया में रामलीला मंचन का इतिहास काफी पुराना है।

यहां करीब 70 साल पहले गांव के स्व. जगदीश प्रसाद सिंगसर्वा ने रामलीला मंचन की शुरुआत की थी। पुरखों द्वारा शुरु की गई इस विरासत को अब गांव के युवा संभाले हुए हैं और नई पीढ़ी इसे आगे बढ़ा रही है।
RamLeela
RamLeela Artists

नवयुवक रामलीला मंडली में वर्तमान में 35 की संख्या में कलाकार है जो रामायण से जुड़े सभी किरदारों का जीवंत अभिनय कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। हर साल नवरात्रि से लेकर दिवाली तक रामलीला का मंचन किया जाता है।
वर्तमान में रामलीला मंचन की जिममेदारी संदीप सिंगसर्वा संभाल रहे हैं। मंडली में अभी सबसे पुराने सदस्य तबला वादक विश्वनाथ सिंगसर्वा हैं जो अभी भी पूरे उत्साह से मंचन करते हैं।


1958 से होता आ रहा है मंचन
रामलीला मंचन में विगत पांच सालों से श्रीराम का किरदार निभाने वाले मंडली के सदस्य मनीष कुमार सिंगसर्वा बताते हैं कि ग्राम पकरिया झुलन में विगत 70 वर्षों से राम लीला का मंचन होता आ रहा है। इसकी नींव 1958 में जगदीश प्रसाद सिंगसर्वा ने रखी थी।
Ramleela in Pakariya Jhoolan village
IMAGE CREDIT: Ram Leela news
पूर्वजों के समय से चली आ रही रामलीला के मंचन को अब गांव के युवाओं द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसे जनता का भरपूर प्यार और सहयोग मिल रहा है। युवाओं द्वारा किए जा रहे जीवंत अभिनय ने सब का मन मोह लिया है। आजकल के टीवी और मोबाइल के जमाने मे भी जिस तरह से रामलीला मंचन को लोगों का सहयोग व प्यार मिल रहा है यह अत्यंत हर्ष की बात है।

पहले 30 दिनों तक भी चलती थी प्रस्तुति
नवयुवक रामलीला मंडली के मनीष बताते हैं कि पहले तो रामलीला का मंचन 28 से 30 दिनों तक होते थे। आज बदलाव का दौर हैं और समय का अभाव। जिसके चलते अब अधिकतम 10-12 दिनों तक ही प्रस्तुति चलती है। जिसमें छीर सागर, रामजन्म, मारीच, सुबाहु एवं ताड़का वध, फूलवारी, धनुष यज्ञ, रामसीता विवाह, लक्ष्मण परसु राम संवाद आदि की प्रस्तुति देते हैं।

आपस में चंदा कर संजोए हैं परंपरा को
सभी सदस्य आपस में चंदा करके रामलीला का मंचन करते हैं और भगवान राम के आदर्शों को आमजन तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। ग्राम में सांस्कृतिक कार्यक्रम होने से सद्भाव भी बना रहता है। सभी वर्ग के लोग रामलीला के लिए सहयोग प्रदान करते हैं।
मंचन करने वालों में विश्वनाथ संदीप सिंगसार्वा, विनोद, मुकेश, सत्येंद्र कश्यप, राजेन्द्र कश्यप, प्रवीण कश्यप, शैलेन्द्र, दिलीप श्रीवास, जगदीश श्रीवास, जगेश्वर श्रीवास, विकास कश्यप, रामरतन कश्यप, रामफल कश्यप, गुलबदन सिंगसर्वा, रामप्रकाश श्रीवास, आगरा कश्यप, विमल कश्यप, राधे श्रीवास, आयुष सिंगसार्वा, गुहादास महंत, धनंजय, मदन कश्यप दिलीप गोंड़ समेत अन्य सहयोगी शामिल हैं।

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