घर आने वाले नए मेहमान के लिए संजो रखे थे कई अरमान अस्पताल की लापरवाही ने नवजात के साथ ही सपनो को भी मार दिया

Shiv Singh

Publish: Sep, 16 2017 01:42:06 (IST)

Janjgir-Champa, Chhattisgarh, India
घर आने वाले नए मेहमान के लिए संजो रखे थे कई अरमान अस्पताल की लापरवाही ने नवजात के साथ ही सपनो को भी मार दिया

मैं अंजली पति दुर्गेश कुमार पामगढ़ विकासखंड अंतर्गत बोरसी गांव में रहती हूं।

जांजगीर-चांपा. मैं अंजली पति दुर्गेश कुमार पामगढ़ विकासखंड अंतर्गत बोरसी गांव में रहती हूं।

मेरी शादी दुर्गेश से डेढ़ साल पहले हुई थी। शादी के बाद से ही हम दोनों के काफी अरमान थे। घर में नन्हें महमान के आने की खबर से पूरे घर में खुशी थी। मैंने और दुर्गेश ने मिलकर आने वाली संतान के लिए कई तरह के सपने संजोए थे। बेटी के लिए अलग और बेटे के लिए अलग।

मैंने समय पर सारे चेकअप भी करवाए थे। बच्चा स्वस्थ और डिलवरी नॉरमल होने की बात कही गई थी। लेकिन पामगढ़ सीएचसी में स्टॉफ की लापरवाही ने मेरे बच्चे की सांसे इस दुनिया में आने से भी छीन ली और मेरे सारे अरमान आंसू बनकर बह रहे हैं।


यह वेदना उस मां की है जो कि पामगढ़ सीएचसी में डिलवरी के बाद अभी भी भर्ती है और उसके बगल में जहां नन्हा खेलता बच्चा होना था वहां सिर्फ उस बच्चे की यादें ही रह गई है।

मां का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता कुछ समझ नहीं पा रहा है कि क्या करे। परिवार का दिलासा ही अब उनके लिए एक सहारा है। पत्रिका की टीम ने जब दोनों दुखी माता-पिता से बात की तो उन्होंने जो सच्चाई बताई उससे साफ जाहिर होता है कि उनके बच्चे की जान दुर्घटना नहीं बल्कि लापरवाही से गई है।

शुक्रवार तड़के छह बजे जैसे ही अंजली को लेबर पेन हुआ दुर्गेश उसे लेकर बोरसी उप स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचा। वहां के स्टॉफ ने इंजेक्शन न होने की बात कही तो दुर्गेश बाइक से कोसा, मुलमुला सहित कई जगह गया और जब वहां भी इजेक्शन नहीं मिला तो पत्नी को लेकर पामगढ़ सीएचसी पहुंचा।

सुबह सात बजे अंजली को सीएचसी के लेबर रूम में ले जाया गया। अंजली की चाची का कहना है कि डिलवरी के समय के ल दो स्टॉफ नर्स थी डॉक्टर नहीं थे। डिलवरी नॉरमल कराने की बात कहकर नर्स ने अंजली के पेट को इतनी तेजी से दबाया कि बच्चे की मौत हो गई और थोड़ी देर बात मरे हुए बच्चे की डिलवरी कराई गई।

परिजन काफी रोष में हैं। इतनी बड़ी घटना हो जाने के बाद न तो बीएमओ इस बारे में कोई जानकारी है और न ही ड्यूटी में पदस्थ डॉक्टरों को।
मौत से अधिक


जरूरी नहीं ड्यूटी- बताया जा रहा है कि डिलवरी सुबह आठ से साढ़े आठ बजे हुई। उस समय डॉ. सौरभ यादव की ड्यूटी खत्म हुई और डॉ. केके डाहिरे की ड्यूटी शुरू हुई, लेकिन दोनों ने ही प्रसूता को नहीं देखा और न ही उनको इसके बारे में बताया गया।

हालांकि बच्चे को मृत घोषित डॉ. केके डाहिरे ने किया। परिजनों का कहना है कि यदि डॉक्टर एक बार देखते और सही सलाह नर्स को देते तो उनके बच्चे की जान बच जाती।

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