गरीब बच्चों को आरटीई से प्रवेश के बाद भी पालकों से वसूली जा रही मोटी रकम

-पामगढ़ के मुस्कान हायर सेकंडरी स्कूल में सामने आया मामला,  -शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत होने की आशंका

By: Shiv Singh

Published: 22 Aug 2017, 07:53 PM IST

जांजगीर.पामगढ़. आरटीई यानि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के एडमिशन तो लिए जा रहे हैं लेकिन उसकी आड़ में इस कानून की जमकर धज्जियां भी उड़ाई जा रही हैं। पामगढ़ अंतर्गत मुस्कान हायर सेकंडरी स्कूल जेवरा में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहां प्रबंधन आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों की फीस शासन से लेने के साथ ही पलकों से से भी ले रहा है। इस मामले की जानकारी आरटीआई के तहत मिली जानकारी से हुई। इस चौकाने वाले खुलासे के बाद स्कूल प्रबंधन सकते में हैं।
आरटीआई के तहत मिली जानकारी के चाहत पता चला कि साल 2011.12 और 2012.13 में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सहरसा के अंतर्गत मुस्कान हॉयर सेकेंडरी स्कूल जेवरा पामगढ़ में जो पहली से लेकर आठवीं तक जिन बच्चों के प्रवेश शिक्षा का अधिकार कानून के तहत हुए थेए उनमें बच्चों की फीस ?550 प्रतिमाह की दर से 5500 रुपए शासन द्वारा दी गई इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन ने बच्चों के अभिभावकों से भी फीस वसूल की थी। दस्तावेज के आधार पर देखा जाए तो अकेले इस स्कूल में आरटीई के तहत सैकड़ों की संख्या में एडमिशन हुए होंगे और अगर इनमें से कुछ प्रतिशत बच्चों की फीस स्कूल प्रबंधन ने शासन और पालक दोनों से ली हुई होगी तो उसकी कमाई लाखों में पड़ गई होगी बच्चों के पलकों को जब इस बात का पता लगा तो उन्होंने इसे कमाई नहीं बल्कि लूट बताया है और इस मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। इस तरह का यह मामला अकेले मुस्कान हायर सेकेंडरी स्कूल जेवरा का ही नहीं है बल्कि जिले और राज्य में ऐसे सैकड़ों निजी विद्यालय होंगे जहां आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश देकर शासन और पालक दोनों से मोटी फीस वसूल की जाती होगी। अगर शासन इस मामले पर संजीदगी से जांच करें तो इससे एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है।

पालक ने कहा लेते फीस- रामगढ़ निवासी अशोक कुमार कश्यप से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनका बेटा अवधेश साल 2012.13 में मुस्कान हायर सेकेंडरी स्कूल जेवरा में पढ़ता था उसकी बकायदा वह फीस भी अदा करता था। जबकि हकीकत में उनके बेटे का एडमिशन आरटीई के तहत किया गया था।

फीस रशीद और आरटीई एडमिशन की फीस लिस्ट कई नाम एक- आरटीई के तहत हुए एडमिशन की फीस चुकता की गई शासन की लिस्ट और अन्य बच्चों के पालकों द्वारा चुकाई गई फीस रसीद को जब मिलाया गया तो उसमें कई नाम एक ही पाए गए उनकी जाति पिता का नाम और निवास सब एक ही था। इससे साबित होता है कि स्कूल प्रबंधन आरटीआई के तहत एडमिशन लेने वाले बच्चों से भी फीस वशूल रहा है।

उस समय मैं स्कूल का प्राचार्य नहीं था, मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं है।
बीपी भार्गव, प्राचार्य, मुस्कान हॉयर सेकंडरी स्कूल जेवरा।

Shiv Singh Desk
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