किराए के भवन में छात्रावासों का हो रहा संचालन सुरक्षा पर लगा है सवालिया निशान

जिले में संचालित कन्या छात्रावास संदेह के दायरे में है। कन्या छात्रावास में गार्ड की समुचित व्यवस्था नहीं होने से छात्राएं असुरक्षित हैं।

By: Rajkumar Shah

Published: 10 Feb 2018, 06:12 PM IST

जांजगीर-चांपा. जिले में संचालित कन्या छात्रावास संदेह के दायरे में है। कन्या छात्रावास में गार्ड की समुचित व्यवस्था नहीं होने से छात्राएं असुरक्षित हैं।

कई छात्रावास या तो किराए के भवन में होने से कई तरह की परेशानियों से जूझ रहा है या फिर कई छात्रावास में प्रभारी अधीक्षिका के कारण बदहाली का शिकार है।

जिले में तकरीबन 108 छात्रावास है। इसमे से आधा कन्या तो आधा बालक छात्रावास शामिल है। कन्या छात्रावास में छात्राओं की सुरक्षा की दृष्टिकोण से महिला नगरसैनिक की व्यवस्था की गई है। लेकिन प्रत्येक कन्या छात्रावास में यह व्यवस्था भी नहीं होने से छात्राएं असुरक्षित रहतीं हैं।

कई छात्रावास में छात्राओं द्वारा ही अनैतिक कार्य की शिकायत अधीक्षिका को मिलती है, जिसके चलते प्रबंधन के कार्यशैली में सवाल उठने लगता है। आधुनिकता के इस दौर में छात्राएं भी बहुत एडवांस हैं। हर किसी के पास एंड्रायड मोबाइल है। जिसके माध्यम से आपस में पुरूष मित्रों से जुड़ी रहतीं हैं।

जबकि छात्रावास में मोबाइल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। इसके बाद भी कन्या छात्रावास में प्रत्येक छात्राओं के पास मोबाइल सेट रहता है। गौरतलब है कि जिले में एक दर्जन कन्या पोस्टमैट्रिक कन्या छात्रावास है। सबसे खराब स्थिति कन्या पोस्टमैट्रिक छात्रावास की है। यहां ही सबसे अधिक शिकायतें मिलती है।


अधीक्षिका बनने कोई राजी नहीं- कन्या छात्रावास में अधीक्षिका बनने कोई राजी नहीं होता। क्योंकि घर के चार सदस्यों को चलाना कठिन काम होता है। वहीं छात्रावास के 100 छात्रों को सम्हालना कितना कठिन होता है अंदाला लगाया जा सकता है।

जबकि आए दिन छात्राओं के बीच ही वाद विवाद की स्थिति निर्मित होते रहती है। बीते साल तो नवागढ़ के कन्या छात्रावास में छात्राएं ही आपस में लड़ाई हो गई थीं। जिसके चलते एक छात्रा ने दूसरे छात्रा के भोजन में जहर तक मिला दिया था। शुक्र है छात्रा बच गई।

यही वजह है कि छात्रावासों में कोई अधीक्षक या अधीक्षिका पद में रहना नहीं चाहती। इतना ही नहीं बजट को लेकर भी जिम्मेदारों पर बंदरवाट का आरोप लगते रहता है। जिससे जिम्मेदार को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


संदिग्ध स्थिति में पकड़ाए जोड़े- दो दिन पहले पामगढ़ के कन्या छात्रावास में दो युवक युवती संदिग्ध स्थिति में पुलिस के हत्थे चढ़ गए थे। पामगढ़ पुलिस ने रात्रि गश्त के दौरान युवक युवती को छात्रावास के बाहर रात 3 बजे पकड़ा था। जांच के दौरान दोनों को पामगढ़ थाने में लाकर पूछताछ किए। आखिरकार युवती पामगढ़ में पदस्थ महिला नगरसैनिक की बहन निकली। जिसके चलते मामले को रफा दफा कर दिया गया।


अधीक्षिकाओं की भी कई शिकायतें- कन्या छात्रावास में अधीक्षिकाओं की भी कई शिकायतें मिली है। कई छात्रावास में अधीक्षिका के नहीं रहने की शिकायत रहती हैं तो वहीं कई छात्रावास में अधीक्षिका के पतियों के रहने भी शिकायत मिलती है। जबकि यह सरासर गलत है। कन्या छात्रावास में हर हाल में अधीक्षिका को हर चौबीसो घंटे रहना है। वह भी बिना अपने पति के रहना है, लेकिन ऐसा होता नहीं। यह सब समझौते के शर्त पर चलते रहता है।


महिला नगरसैनिकों की पोस्टिंग- कन्या छात्रावास में सुरक्षा के उपाय के तहत महिला नगरसैनिकों की पोस्टिंग है। इसके बाद भी जहां शिकायत मिलती है वहां अधीक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
-बीके राजपूत, सहायक आयुक्त आदिम जाति

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