बोर्ड परीक्षा बना कमाई का जरिया गलत टेंडरिंग से लगाए जा रहे वाहन

बोर्ड परीक्षा बना कमाई का जरिया गलत टेंडरिंग से लगाए जा रहे वाहन

Shiv Singh | Publish: Mar, 14 2018 03:23:58 PM (IST) Janjgir-Champa, Chhattisgarh, India

नियाज ट्रेवैल्स के प्रोपराइटर नियाज खान ने केलेक्टर व माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर के सचिव को पत्र लिखकर किया है शिकायत

जांजगीर-चांपा. माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर द्वारा आयोजित बोर्ड परीक्षाओं के दौरान जिले में सभी परीक्षा केंद्रों में औचक निरीक्षण के लिए गठित फ्लाइंग स्क्वायड टीम की आड़ में हो रहे भ्रष्टाचार के मामले का खुलासा हुआ है। जिले में संचालित नियाज ट्रेवैल्स के प्रोपराइटर नियाज खान ने केलेक्टर व माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर के सचिव को पत्र लिखकर शिकायत किया है कि परीक्षा ड्यूटी में लगाए गए वाहनों की निविदा की आड़ में भ्रष्टाचार हुआ है। उसका आरोप है कि जब उसने प्रति वाहन प्रतिदिन की दर ६७८ रुपए निर्धारित करके निविदा डाली थी तो उसके आवेदन को निरस्त करते हुए ११९० रुपए की दर वाले निविदाकार को टेंडर कैसे दे दिया गया।

जिले के निवासी नियाज खान ने कलेक्टर से मांग किया है कि इस टेंडर में बड़े पैमाने पर भर्राशाही हुई है। इसकी जांच की जानी चाहिए और जितनी भी गाडिय़ा इस टेंडर के माध्यम से लगी है उनका बिल भुगतान नहीं होना चाहिए। यदि बिल का भुगतान होता है तो होने वाले राजस्व के नुकसान के लिए सभी अधिकारियों की मिलीभगत मानी जाएगी। नियाज ने यह शिकायत सचिव माध्यमिक शिक्षा मंडल छत्तीसगढ़ शासन सहित कलेक्टर, एसपी व जिला परिवहन अधिकारी जांजगीर चांपा को दिया है, लेकिन अब तक इस मामले में क्या जांच हुई और क्या कार्यवाही की गई उसकी जानकारी शिकायतकर्ता को नहीं दी गई है।

बाबू की भूमिका की भूमिका होने की आशंका
बताया जा रहा है कि गाडिय़ों के निकाले गए गए इस टेंडर में सारा खेल डीईओ कार्यालय में पदस्थ एक बाबू का है। बाबू ने अपने चहेते को टेंडर देने के लिए यह सारा खेल रचा है। शिकायतकार्ता का दावा है कि यदि इस मामले की कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन सही जांच कराएंगे तो दूध का दूध और पानी का पानी अपने आप सामने आ जाएगा।

कहां हैं टैक्सी वाहन?
शिकायतकर्ता ने शिकायत में बताया जिला शिक्षा अधिकारी के यहां से जारी निविदा में शर्त रखी गई थी कि जो भी वाहन परीक्षा ड्यूटी के लिए लिया जाएगा वह टैक्सी परमिट वाहन होना चाहिए। बिना टैक्सी परमिट वाहन स्वीकार्य नहीं होगा, लेकिन हालत यह है कि विभाग ने जो १९ गाडिय़ां लगाई हैं उसमें मात्र एक से दो वाहन ही टैक्सी परमिट हैं। इतने बड़े दावे के बाद भी कलेक्टर इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं यह समझ से परे है।

लगी पुरानी गाडियां
इस टेंडर में जो दूसरी बड़ी खामी बताई गई हैं वह यह है कि शिक्षा विभाग ने निविदा के माध्यम से मात्र दो साल पुराने वाहन ही स्वीकार करने की शर्त रखी थी। उससे अधिक पुराने वाहनों न लेने की शर्त रखी गई थी, लेकिन जानकारी के मिली है कि निविदा धारक ने १९ में से अधिकतर गाडिय़ां चार से पांच साल या उससे भी पुरानी लगाई हैं और जिला शिक्षाधिकारी डीपी भास्कर सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी आंखे बंद कर ली है।

निविदा में भाग लेने से किया मना
नियाज का आरोप है कि उसने ६७८ रुपए की दर से निविदा डाली थी, लेकिन उसे टैक्सी परमिट वाहन उपलब्ध कराने और उसके मुताबिक दर कम होने का हवाला देते हुए पीक्यू से बाहर कर दिया गया। यदि उसे इस नियम के तहत बाहर किया गया तो फिर अब जिस एजेंसी को टेंडर मिला है उससे दो साल से अधिक पुराने व बिना टैक्सी परमिट के वाहन कैसे ले लिए गए। उसने इसे उसके अधिकारों का हनन बताया है।

डीईओ जीपी भास्कर से सीधी बातचीत
सवाल : बोर्ड परीक्षा में गाडिय़ों को गलत तरीेके से लगाने की शिकायत है?
जवाब : इसकी शिकायत कलेक्टर से की गई है, हमने उन्हें बता दिया गया ह कि टेंडर प्रक्रिया सही हुई है।
सवाल : कम दर के निविदा धारक को बाहर क्यों किया गया?
जवाब : ऐसा कहना गलत है, जो भी रेट दर तय हुआ है वह नियम से हुआ है।
सवाल : बिना परमिट की गाडिय़ां कैसे चल रही हैं?
जवाब : काफी गाडिय़ां बिना परमिट की लगी हैं, सभी का भुगतान रोका जाएगा।
सवाल : दो साल से अधिक पुराने वाहनों को क्यों स्वीकार किया गया?
जवाब : बिल भुगतान के दौरान सभी वाहनों का आरसी परमिट मांगा गया है। भुगतान उन्हीं वाहनों का होगा, जो नियम के मुताबिक लगे हैं।

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