Video :- निस्तारी तालाबों का पानी हुआ हरा

Vasudev Yadav

Publish: Apr, 17 2019 07:14:37 PM (IST)

Janjgir Champa, Janjgir Champa, Chhattisgarh, India

जांजगीर-चांपा. शहरसीमा में पहले 40 से अधिक छोटे-बड़े तालाब थे। पालिका कार्यकाल में हुई अनदेखी के चलते आधे से अधिक तालाबों का अस्तित्व खत्म हो गया। पालिका के रिकार्ड में वर्तमान में 1३ तालाब हैं। इनकी भी हालत बिगड़ चुकी है। कई तालाब तो जलकुंभी, तो कई तालाबों का पानी हरा वहीं कई तालाब गंदगी से अट गए हैं। बदबू से लोग परेशान हैं। नहाने वाले खुजली से पीडि़त हो रहे। बुधवार को मोहल्लेवासी बड़ी संख्या में पार्षद के पास अपना दुखड़ा सुनाने पहुंचे थे।
ऐतिहासिक भीमा तालाब, रानी तालाब, वार्ड नंबर रामसागर तालाब व जूना तालाब नगर सहित 13 तालाब नगर के पहचान रहे हैं। शहर के प्रमुख तालाब किसी जमाने में निस्तारी का प्रमुख साधन हुआ करते थे। अब हालत यह है कि गर्मियों में तालाबों के सूख जाने से लोगों के सामने निस्तारी की समस्या गहरा गई है। निस्तारी के लिए सार्वजनिक नलकूपों पर आश्रित होना पड़ रहा है। सुबह नल खुलते ही सार्वजनिक नल के पास भीड़ उमड़ पड़ती है। शहर का सबसे बड़ा ऐतिहासिक तालाब में पानी सूखने की कगार पर पहुंच गया है, लोग यहां निस्तारी करना छोड़ दिए। दूसरा सबसे बड़ा तालाब नैला की जूना तालाब है। जो अपने बदहाली में आंसू बहा रहा है। यहां आसपास बड़ी संख्या में लोग निस्तारी करते है लेकिन तालाब का पानी पूरा गहरा हरा हो गया है। जिससे नहाने में खुजली हो रही है। तालाब का पानी गंदगी के चलते हरा हो गया है। इन्हीं तालाबों में वार्डो के सैकड़ों लोगों की निस्तारी हो रही है। नहाने वाले अनेक लोग खुजली या अन्य जलजनित बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। जूना तालाब वार्ड ४ के आसपास के मोहल्लेवासी बड़ी संख्या में बुधवार को पार्षद के पास शिकायत लेकर पहुंचे थे। उनका कहना था कि हम लोगों के पास निस्तारी के लिए एकमात्र साधन यही तालाब है। इसका पानी गहरा हरा हो गया है। जिससे नहाने में खुजली व कई बीमारी के चपेट में आ जा रहे है। अभी नहर चल रहा है इस पानी को साफ कर दूसरा अच्छा वाला पानी भरा जाए। जिस पर पार्षद ने नपा को इसके बारे में अवगत कराने की बात कही।

आज तक नहीं तालाबों की सफाई
तालाबों की आज तक अच्छे से सफाई नहीं हुई। चूना फिटकिरी का छिड़काव करने में भी अधिकारियों ने रुचि नहीं दिखाई। फलस्वरुप पानी इतना ज्यादा गंदा हो गया कि अनेक लोग निस्तारी ही बंद कर दिए। नहावन आदि कार्यक्रमों में कभी कभी तालाब पहुंचने वाले गंदगी देख शरीर में पानी छिड़ककर ही लौट जाते हैं।

माह भर से केवल बनाया जा रहा प्लान
गांव के लोग तो जैसे-तैसे पंचायतों के सहयोग से तालाबों में पानी भरने जुगत कर लेते हैं लेकिन शहर में तालाबों में पानी भरने को लेकर न तो नगर पालिका कोई खास रुचि दिखाती है और न ही शहरवासियों को भी तालाबों में पानी भरने से कोई सरोकार होता। नहरों में पानी दिए जाने के बाद भी ये तालाब नहीं भरे पाते और गर्मी के दिनों में तालाब सूखे ही रह जाते हैं। पालिका माह भर से केवल प्लान ही बना रही है।

इन्हें मसीहा का इंतजार
जिला मुख्यालय की आबादी लगभग 95 हजार है। 30 हजार से अधिक की आबादी निस्तारी के लिए तालाबों पर आश्रित हैं। ये लोग हैं। झोपड़पट्टी में गुजारा करने वाले मजदूर वर्ग। निस्तारी के लिए कोई दूसरा साधन नहीं है, तो तालाबों में निस्तारी मजबूरी है। तालाबों का संक्रमण इनके शरीर में पहुंचता है। लगभग हर वार्ड में तालाबों का पानी इतना दूषित है कि इसे उपयोग के लायक नहीं माना जा सकता। इसके बाद भी निस्तारी कर रहे लोग वायरल एवं बैक्टीरियल संक्रमण से पीडि़त हो रहे हैं। मजदूर बस्तियों के इन लोगों को इंतजार है उस मसीहा की, जो उन्हें चलता फिरता संक्रमण से निजात दिलाए। सफाई अभियान के तहत लोग चाहते हैं। तालाबों की गंदगी भी साफ हो जाए।

क्या कहते है पार्षद
वार्ड ४ के पार्षद अरमान खान का कहना है कि जूना तालाब का पानी हरा हो गया है। इस संबंध में पहले भी नपा को अवगत करा चुका है। मोहल्लेवासियों के लिए निस्तारी की बड़ी समस्या तो है। बुधवार को बड़ी संख्या में मोहल्लेवासी घर शिकायत करने पहुंचे थे। जिसके कारण नपा को सफाई के लिए कहा गया है।

निस्तारी तालाबों का पानी हुआ हरा

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