किताबों से अधिक ऑनलाइन स्टडी पर ध्यान दे रहे युवा, मोबाइल वर्जन सबसे अधिक

* युवाओं ने कहा ऑन लाइन स्टडी मटेरियल इजी एवलेबल, हैंडी होने से कर रहे मोबाइल का अधिक उपयोग

* चिकित्सकों ने माना पॉजिटिव से अधिक हैं निगेटिव आस्पेक्ट

डॉ. संदीप उपाध्याय@रायपुर. बदलते जमाने में लाइफ स्टाइल के साथ-साथ लोगों का खान-पान और नॉलेज भी बदलता जा रहा है। पहले जहां कॉलेज गोइंग स्टूडेट्स नोट्स व किताबों जैसे स्टडी मटेरियल से पढ़ाई करता है। आज वह सारी चीजें एक ही जगह पर ऑन लाइन के माध्यम से ले ले रहा है। इंटरनेट क्रांति के इस जमाने में युवा मोबाइल का इतना आदी हो गया है कि वह 24 घंटे के दौरान सोने, खाने, घर में समय बिताने और पढ़ाई में समय देने से अधिक मोबाइल में समय बिता रहा है। इससे वह न सिर्फ अपने आपको सीमित करता जा रहा है, बल्कि कई बीमारियों से भी ग्रसित हो रहा है। मनोरोग चिकित्सक संघ ने इस पर चिंता जताई हैं। उनका कहना है कि महान दार्शनिक अरस्तू ने कहा है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणि है, लेकिन आज का युवा समाज से दूर होकर इंटरनेट की दुनिया में खोता जा रहा है। यहां से वह जो ज्ञान लेता है जो अपनी जानकारी दूसरों को देता है उसी खुश है।

ऑन लाइन स्टडी मटेरियल असानी से उपलब्ध

हमारे पास सभी किताबें नहीं होती हैं। इससे उन्हें पढऩे के लिए दूसरे से नोट्स या फिर किताबें लेनी पड़ती हैं। वहीं फोन पर ऑनलाइन स्टडी मटेरियल मिल जाता है। हां यह बात सही है कि यदि मोबाइल की जगह ऑनलाइन स्टडी पीसी या फिर लैपटॉप पर की जाए तो वह अधिक बेहतर होगा।

-मेहर अग्रवाल, बीटेक थर्ड इयर

पीसी और लैपटॉप आखों के लिए सही

आज जमाना ऑनलाइन स्टडी का है। हमें सभी चीजे ऑनलाइन आसानी से मिल जाती हैं। लेकिन इसे मोबाइल पर यूज करना सही नहीं है। कम सयम के लिए मोबाइल पर स्टडी की जा सकती है, लेकिन यदि घंटो पढ़ाई करनी है तो पीसी और लैपटॉप सही हैं। इससे हमारी आखों में नकारात्मक प्रभाव कम पड़ता है।

-रूपांस पवार, छात्र बीटेक

अवश्यकता से अधिक उपयोग है नुकसानदेह

मेरा मानना है कि सभी चीजें बैलेंस में होनी चाहिए। ऑन लाइन के लिए पीसी लैपटॉप तो मोबाइल से अच्छा है ही, लेकिन, लेकिन इसके साथ ही हमें किताबों व नोट्स से भी पढ़ाई करनी चाहिए। अधिक समय ऑनलाइन स्टडी हमारे स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है।

- नेहल तिवारी, बीटेक सेकंड इयर

आज की पढ़ाई किताबों से हटकर

आज ऑनलाइन पर सभी का फोकस है। पढ़ाई की बात करें तो जितनी चीजें ऑन लाइन मिल जाती हैं, उतनी हमें किताबों व नोट्स नहीं नहीं मिल पाती हैं। यह अगर हमें मोबाइल में कहीं भी किसी समय भी मिल रही है तो इसमें कोई बुराई मुझे नहीं लगती है। आप बिंदास होकर मोबाइल से पढ़ाई कर सकते हैं।

-संजीव नाथ, बीटेक सेकंड इयर

एक्सपर्ट व्यू

छत्तीसगढ़ मनोरोग चिकित्सक संघ के अध्यक्ष और डायरेक्टर सेंट्रल इंडिया इस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेस (सिनहैंस) डॉ. प्रमोद गुप्ता का कहना है कि ऑन लाइन स्टडी के पॉजिटिव और निगेटिव आस्पेक्ट दोनों हैं। पॉजिटिव आस्पेक्ट की बात की जाए तो स्टूडेंट्स को कम समय में अधिक नॉलेज मिल जाता है। वहीं इसके निगेटिव आस्पेक्ट की बात की जाए तो मोबाइल में अधिक समय देने से स्टूडेंट मेंटल फोकस नहीं कर पाता है। मोबाइल से जो किरणें निकलती हैं वह दिमाग को डिट्रैक्ट करती हैं। इससे हेडेक, टारकाई और नींद न आने जैसी कॉमन प्राबलम होने लगती हैं। मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत उसका तर्कशील होना है, वह समूह में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा व तर्क वितर्क करके अपने नॉलेज को बढ़ाता है, जबकि मोबाइल और कम्यूटर का ज्ञान लेने से वह सीमित होता चला जाता है और धीरे-धीरे कॉफी चाय व सिगरेट की लत में पड़कर निकोटीन का आदी हो जाता है।

sandeep upadhyay Reporting
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