पत्रिका की खबर के बाद खुली शिक्षा विभाग में सामग्री सप्लाई की पोल

पत्रिका की खबर के बाद खुली शिक्षा विभाग में सामग्री सप्लाई की पोल

Anil Kumar Srivas | Publish: Apr, 23 2019 03:32:47 PM (IST) Jashpur, Jashpur, Chhattisgarh, India

कलक्टर ने डीईओ को आदर्श चुनाव आचार संहिता का हवाला देकर खरीदी पर लगाई रोक

जशपुरनगर. जिले के लगभग 6000 स्कूलों को एक व्यक्ति विशेष के नाम के फर्म को व्हाईट बोर्ड और स्वच्छता सामग्री खरीदने और उसे स्कूलों में पहुंचाकर बिल देने के लिए कहा जा रहा था। इस संबंध में पत्रिका ने २० अप्रेल को जशपुर शिक्षा विभाग में एक और खेलगढ़ी को अंजाम देने की तैयारी शीर्षक से विस्तार से समाचार प्रकाशित किया था, समाचार प्रकाशित होने के बाद कलक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया और जिला शिक्षा अधिकारी को आदेश जारी किया है कि आचार संहिता प्रभावशील होने के कारण स्कूलों के लिए किसी भी प्रकार की सामग्री क्रय नहीं की जा सकती है। कलक्टर निलेश कुमार क्षीरसागर ने जिला शिक्षा अधिकारी को शालाओं को मिलने वाली अनुदान राशि से किसी से आचार संहिता के चलते किसी भी तरीके की सामग्री न खरीदने तथा चुनाव आचार संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने को कहा है। ज्ञातव्य है कि जिले के प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं को अपनी शालेय गतिविधियों के संचालन एवं विकास के लिए शासन की ओर से मिलने वाली अनुदान राशि से सामग्री क्रय किए जाने शिकायत प्राप्त हुई है। कलक्टर ने इसके मद्देनजर जिला शिक्षा अधिकारी को नियम निर्देश एवं आचार संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
लगभग 70 से 80 लाख रुपए की सामग्री खरीदी के लिए एक खास फर्म के नाम से क्रय आदेश सभी स्कूलों से जारी किया जा रहा है।
यह था मामला : लगभग 70 से 80 लाख रुपए की व्हाईट बोर्ड और स्वच्छता सामग्री क्रय करने के के लिए एक खास फर्म के नाम से सामग्री क्रय आदेश की कॉपी पत्रिका के पास पहुंची थी, जिसमें जिले के लगभग 6000 स्कूलों को एक व्यक्ति विशेष के नाम के फर्म को सामग्री खरीदने और उसे स्कूलों में पहुंचाकर बिल देने के लिए कहा जा रहा है। स्कूल के प्रधान उसी फर्म को आदेश जारी कर बिल स्कूल में देने का आदेश जारी कर रहे हैं। आदेश की एक कॉपी पहुंचने के बाद जब इसकी सत्यता के लिए जशपुर के जिला शिक्षा अधिकारी बीएल धु्रव से बातचीत की गई तो उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि आदेश ऊपर से आया है। स्कूलों में खेल सामग्री की खरीदी के नाम पर नई सरकार के गठन होते ही मामला सुर्खियों में आने लगा है। खेलगढ़ी का मामला सामने आते ही शिक्षा मंत्रालय की ओर से यह आदेश जारी किया गया था कि प्रधान पाठक अपनी मर्जी से मनचाहे दुकान से खेल सामग्री क्रय करने के लिए स्वतंत्र हैं। इसके बाद से अब इस मामले में कुछ पारदर्शिता आने की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रधानपाठकों पर बनाया जा रहा दबाव : एक व्यक्ति विशेष के नाम के फर्म से एक ब्लैंक क्रय आदेश जारी किया गया है। एक्त फर्म के बारे में जानकारी जुटाई गई तो उसके बारे में किसी को भी जानकारी नहीं है कि फर्म कहां की और इस नाम का व्यक्ति कौन है। उक्त मेसर्स के नाम पर सभी स्कूलों को भेजकर नाम भरने के लिए कहा गया है। इस आदेश से जिले के प्रायमरी और मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक अत्यधिक दबाव में हैं। दरअसल व्हाईट बोर्ड, अध्यापक किट, स्वच्छता किट और एलईडी बल्ब की खरीदी के लिए एक खास फर्म को आदेश जारी किया जा रहा है। इस सामग्री के लिए सर्व शिक्षा अभियान की ओर से सभी स्कूलों को 10-10 हजार रुपए दिया जाता है। इसी पैसे से एक खास फर्म से ही खरीदी करने के लिए मंत्री के पीए के द्वारा डीईओ को आदेश दिया गया है और डीईओ इस आदेश का पालन प्रधान पाठकों से करा रहे हैं। प्रधान पाठक दबाव में हैं पर वे डीईओ का आदेश मानने के लिए मजबूर हैं।

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