जशपुर में फिर मिला डेंगू का एक और संदिग्ध, 5 साल का बच्चा मिला पॉजिटिव

जशपुर में फिर मिला डेंगू का एक और संदिग्ध, 5 साल का बच्चा मिला पॉजिटिव

Amil Shrivas | Publish: Sep, 03 2018 05:41:06 PM (IST) | Updated: Sep, 03 2018 05:41:07 PM (IST) Jashpur Nagar, Chhattisgarh, India

पहले मामले की तरह इसे भी जिला अस्पताल से बाहर कर दिया गया रेफर, अभी नहीं हुआ कंफर्म

जशपुरनगर. जिले में १० दिनों के अंदर में डेंगू के दो संदिग्ध मरीज सामने आए हैं, हांलाकि अभी तक इन्हें डेंगू होने की पुष्टी नहीं की गई है। दोनो ही संदिग्ध मरीजों के स्क्रीनिंग टेस्ट में पॉजिटिव मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा डेंगू किट के माध्यम से दोनो मरीजों का टेस्ट किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने एक मरीज का ब्लड सैपंल एलिसा टेस्ट के लिए रायपुर भेज दिया है। रायपुर से एलिसा टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद ही मामला साफ हो पाएगा कि स्क्रीनिंग टेस्ट में पॉजिटिव मिले संदिग्ध मरीज को डेंगू है या नहीं। जिले के स्वास्थ्य विभाग के द्वारा डेंगू को लेकर सर्तक होने का सारा दावा फेल हो गया, यह बात साबित हो चुकी है कि जिले में डेंगू के संदिग्ध मरीज के उपचार करने तक की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। जिला अस्पताल में डेंगू के संदिग्ध मरीज के मिलने और उसके स्क्रीनिंग टेस्ट में पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल प्रबंधन उनका उपचार करना छोड़ यहां से सीधे उन्हें रेफर कर दे रहा है। शनिवार को भी जिले में एक ड़ेगू का संदिग्ध मरीज सामने आने के बाद जिला अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया था। लेकिन भर्ती कराने के बाद उसे यहां से रेफर कर दिया गया है। १० दिनों में यहां से डेंगू के दो मरीजों को रेफर कर दिए जाने के बाद यह साफ हो गया है कि जिले का स्वास्थ्य अमला डेंगू जैसे मरीज को लेकर संजिदा नहीं है और ना ही उनके द्वारा किसी प्रकार का कोई इंतजाम अस्पतालों में किया गया है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब डेंगू अपना पांव पसारना शुरु कर दिया है। १० दिनों पहले जिला मुख्यालय में ही डेंगू का एक संदिग्ध मरीज सामने आया था। इसके बाद शनिवार को जिले के मनोरा विकाखंड के ग्राम दलडीह का साढ़े ५ वर्षीय बालक रुपेश को पिछले कुछ दिनों से बुखार था। उसे बुखार होने के बाद वहां के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के द्वारा डेंगू किट में जब उसके खुन का जांच किया गया तो उसमें वह पॉजिटिव मिला। रुपेश के स्क्रीनिंग टेस्ट पॉजिटीव मिलने पर उसे तत्काल उसके गांव से लाकर जिला चिकिस्तालय में भर्ती करा दिया गया। रुपेश को जिला अस्पताल में भर्ती कराने और स्क्रीनिंग टेस्ट में रिपोर्ट पॉजिटीव आने के बाद उसका बल्ड सैंपल लेकर एलिसा टेस्ट के लिए रायपुर भेज दिया गया। जिला अस्पताल में उसका सैंपल लेने के बाद उसे यहां से रविवार की सुबह ही रेफर कर दिया गया है।

हर गांव में बांटा गया है टेस्ट किट : स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले में डेंगू के पहचान के लिए प्रत्येक विकासखंडो में डेंगू टेस्ट किट उपलब्ध करा दिया गया है और ग्रामीण क्षेत्रों में जिस किसी भी व्यक्ती को लगातार बुखार आने की शिकायतें आ रही हैं उनका उस किट के माध्यम से टेस्ट किया जा रहा है। मनोरा में भी किट के टेस्ट में ही राकेश का स्क्रीनिंग सैपंल रिपोर्ट पॉजिटीव आया था जिसके बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

जिला अस्पताल में नहीं है कोई सुविधा में : डेंगू की पुष्टि के लिए एलिसा टेस्ट जरूरी होता है, डाक्टरों का कहना है कि डेंगू किट में पॉजिटिव आने वाले मरीजों का जब तक एलिसा टेस्ट नहीं करवा लिया जाता है तब तक उसे डेंगू का मरीज नहीं माना जाता है,उसे मरीज को डेंगू का संदिग्ध मरीज मानकर ही चलते हैं। इस दौरान संदिग्ध मरीज को आइसोलेशन की आवश्यक्ता पड़ती है और उस मरीज को आइसोलेट किया जाता है। लेकिन जिला अस्पताल में अब तक डेंगू के संदिग्ध मरीजों के लिए अलग से कोई भी व्यवस्था नहीं किया गया है जहां ऐसे मरीजों का आइसोलेशन किया जा सके।

रिपिट डेंगू किट में मरीज का रिपोर्ट पॉजिटिव आया है, किट टेस्ट की रिपोर्ट को संदेहास्पद माना जाता है एलिसा टेस्ट के बाद ही कंफर्म हो पाएगा कि मरीज को ड़ेगू है या नहीं। मरीज का संपैल लेकर एलिसा टेस्ट के लिए रायपुर भेज दिया गया है। वहां से तीन चार दिनों के बाद रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
डॉ. आरएल तिवारी, सीएमएचओ जशपुर

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