पंचायत प्रस्ताव के बिना हो रही थी रेत खदानों की नीलामी, हंगामे के बाद रोका

नीलामी की प्रक्रिया में पंचायत प्रस्ताव को भुला देना सरकार और खनिज विभाग को पड़ा महंगा

By: Saurabh Tiwari

Published: 20 Sep 2019, 02:53 PM IST

जशपुरनगर. लोकसभा न राज्यसभा, सबसे ऊपर ग्राम सभा यह नारा ग्रामीण इलाकों में लिखा हुआ दिख जाता है। ग्रामीण इसे आक्रोशित होने पर अपने अधिकारों के बारे में शासन-प्रशासन को अवगत कराने के लिए इन नारों को दीवार पर लेखन कराते हैं। संविधान में ग्रामीण क्षेत्रों खासकर आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों के संरक्षण के लिए विशेष पावर दिया गया है। जिसमें पेसा एक्ट शामिल है।

इस एक्ट के तहत ५वीं अनुसूची क्षेत्र जहां अनुसूचित जनजाति की बहुलता होती है वहां उनकी सहमति का पालन करना अनिवार्य है। इसी पेसा एक्ट के तहत ही ग्रामीण क्षेत्रों में खनिज संपदा का दोहन और खनन के लिए ग्राम सभा के तहत पंचायत का प्रस्ताव लेना अनिवार्य है। लेकिन इस बार रेत खदानों की नीलामी के लिए पंचायत का प्रस्ताव नहीं लिया गया था, जिसका कुछ अनुसूचित जिला घोषित इलाकों में विरोध हुआ। और इस विरोध के बाद ही अनुसूचित इलाके की रेत के खदानों की नीलामी पर अस्थाई रोक लगा दी गई है।

विरोध के बाद स्थगन: रेत खदानों का संचालन पूर्व में पंचायतों के द्वारा किया जाता था, लेकिन सरकार बदलने के बाद २०१९ में नई रेत खनन नीति लाई गई जिसमें रेत खदानों को भी नीलामी में शामिल कर लिया गया। पूर्व में रेत खदान के संचालन का अधिकार एक तरफा भले ही पंचायत के पास था लेकिन उन्हें खनन की स्वीकृति के लिए विधिवत पंचायत का प्रस्ताव देना पड़ता था। इसके साथ ही मिट्टी, मुरूम और पत्थर के खदानों का पट्टा लेने के लिए भी पंचायत का प्रस्ताव होना अनिवार्य था। लेकिन इस बार रेत की नीलामी की प्रक्रिया में पंचायत प्रस्ताव को भुला देना सरकार और खनिज विभाग को महंगा पड़ गया। और इसका विरोध होना शुरू होते ही प्रदेश स्तर पर अनुसूची-५ के दायरे में आने वाले इलाकों में रेत के खदानों की नीलामी आगामी आदेश तक स्थगित कर दी गई है।

यहां भी फंसेगा पेंच: ग्रामीण संसद में दिए गए संवैधानिक अधिकारों के मुताबिक अगर ग्राम सभा में पंचायत प्रस्ताव देने पर मना होने की स्थिति में रेत की नीलामी कराना अनुसूचित क्षेत्र में सरकार के लिए एक सपना जैसा हो सकता है। क्योंकि बगैर ग्रामीणों की सहमति उनके इलाके से खनिज का दोहन नहीं किया जा सकता है।

अफसरों की लापरवाही: रेत खदान की नीलामी की नई नीति बनाने वाले अफसरों पर भी सवाल उठने लगे हैं। बोलीदारों का कहना है कि जब शासन-प्रशासन में बैठे सभी अफसरों को पेसा कानून के बारे में जानकारी है तो फिर उनसे चूक कैसे हुई। खनिज विभाग में प्रस्ताव पहले भी लिया जाता रहा है, तो अचानक फिर टेंडर के दौरान प्रस्ताव की प्रक्रिया को कैसे भूल गए। अफसरों पर भी गंभीर चिंतन नहीं करने की बात कही जा रही है।

नीलामी में भाग लेने वालों में असमंजस: जशपुर जिले के पांच रेत खदानो की नीलामी के लिए १६ सितंबर तक व आवेदन मंगाए थे, जिसके बाद १७ सितंबर की दोपहर ३ बजे निविदा खोलने का वक्त तय की गई थी, लेकिन अचानक निविदा स्थगित कर दी गई, जिससे निविदा भरने वाले बोलीदार भी अमजंस की स्थिति में आ गए। अचानक स्थगित होने से लोग अब परेशान हैं। उनका कहना है कि बोली के लिए नियमानुसार दिए गए सुरक्षा निधि में उनका लाखों रुपए फंस गए हैं।

पूरे जिले से मिले हैं ५४ फार्म
कुजरी - १२
कांसाबेल टांगरगांव - २२
कुनकुरी खारीझरिया - ९
फरसाबहार अमडीहा- ७
दुलदुला - ४

&पंचायत प्रस्ताव की वजह से नीलामी प्रक्रिया पर फिलहाल अस्थाई रोक लगाई गई है। अगली तारीख मिलने पर निविदा खोली जाएगी।
हेलेंद्र स्वर्णपाल, माइनिंग इंस्पेक्टर जशपुर

Saurabh Tiwari
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned