जिले में तैनात सीआरपीएफ की 81वीं बटालियन को हटाने की सुगबुगाहट तेज

जिले में तैनात सीआरपीएफ की 81वीं बटालियन को हटाने की सुगबुगाहट तेज

Murari Soni | Updated: 26 Jun 2019, 01:22:03 PM (IST) Jashpur, Jashpur, Chhattisgarh, India

जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से लेकर केन्द्रीय गृहमंत्री तक से सीआरपीएफ को नहीं हटाने की है मांग

जशपुरनगर. जशपुर जिले में माओवादी गतिविधियां शांत हो जाने की वजह से जिले से सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) की 81वीं बटालियन को हटाए जाने की सुगबुगाहट एक बार फिर तेज हो गई है। संपूर्ण जिले में इसकी चर्चा चल रही है। इस संबंध में सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जशपुर में तैनात सीआरपीएफ की 81वीं बटालियन को बीजापुर में शिप्ट किया जाएगा। जिले से सीआरपीएफ को शिप्ट किए जाने की सुगबुगाहट एक बार फिर तेज हो गई है। वहीं सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में फिलहाल कोई नया आदेश नहीं आया है। वहीं सीआरपीएफ को जशपुर से नहीं हटाए जाने के लिए जशपुर जिले के तीनों विधायको ने भी मुख्यमंत्री से मांग की थी। सीआरपीएफ को हटाने के पीछे की कोई बड़ी वजह फिलहाल अधिकारिक तौर पर निकलकर सामने नहीं आई है, लेकिन यह कयास लगाया जा रहा है कि जिले में माओवादी गतिविधियों में अंकुश लग जाने एवं जिले को नक्सलमुक्त जिला घोषित कर दिए जाने के बाद यह फैसला लिया गया है। जशपुर जिले में विगत दशक में हुए माओवादी वारदातों को लेकर जशपुर प्रभावित होने की बात लगातार सामने आई है। वर्तमान में सरहदी प्रदेश झारखंड में माओवादी वारदात की खबरें सामने आती रही हैं। हालांकि जशपुर में विगत दो साल वर्ष 2015 और 2016 अबतक में कोई बड़ी वारदात नहीं हुई है, जिसे देखते हुए ही जशपुर जिले को नक्सल मुक्त जिला घोषित कर दिया गया है। नक्सलमुक्त जिला घोषित होने के बाद से ही यह अनुमान लगाया जा रहा था कि जिले से सीआरपीएफ के बटालियन को कहीं और शिप्ट किया जाएगा।

जिले के छह स्थानों पर बटालियन है तैनात : झारखंड सीमा से लगे जिले के छ: थाना और चौकी क्षेत्र में सीआरपीएफ की बटालियन इस वक्त अपनी सेवा दे रही है। जिसमें जशपुर बटालियन हेडक्वाटर, आरा चौकी, दुलदुला थाना, लोदाम, मनोरा, आस्ता और सन्ना शामिल है। इन सभी इलाकों से झारखंड की सीमा लगती है,जिसमें जनता खुद को सीआरपीएफ के होने से ही सुरक्षित मानती है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले में तैनात सीआरपीएफ बटालियन को बीजापुर में शिप्ट किया जा रहा है।
सीआरपीएफ को नहीं हटाने हो चुकी है मांग : जशपुर जिले के पत्थलगांव के विधायक रामपुकार सिंह, कुनकुरी विधायक यूडी मिंज एवं जशपुर विधायक विनय भगत ने केबीनेट मंत्री टीएस सिंह देव के साथ मुख्यमंत्री से मिलकर जशपुर में तैनात सीआरपीएफ के बटालियन को जशपुर में ही यथावत रखने की मांग की थी। इसके साथ थी जशपुर नगर पालिका की उपाध्यक्ष प्रियम्वदा सिंह जूदेव ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर सीआरपीएफ को जशपुर में ही तैनात रखने के संबंध में चर्चा कर चुकी हैं।
जिले में हुई है पांच बड़ी माओवादी घटनाएं : जशपुर जिले में सीआरपीएफ बटालियन को वर्ष 2009 में तैनात किया गया है। इससे पहले वर्ष 2006 में जिले में सबसे बड़ी वारदात आरा चौकी में हुई थी। करीब 60 की संख्या में हथियारबंद माओवादियों ने आरा चौकी को चारों तरफ से घेरकर गोली बारी की। जिसमें तीन पुलिस के जवान शहीद हुए थे। वहीं पुलिस को समर्पण कराते हुए हथियार लूटा गया था। 2012 में आरा चौकी में पदस्थ सहायक आरक्षक सियाराम की औरापानी में हत्या, विनोद जैन के क्रेशर मशीनों में आग लगाने उनके कर्मचारियों को अगवा करने के साथ ही वर्ष 2014 में आरा चौकी में दो लोगों की हत्या करने की वारदात प्रमुख रही है।
& सीआरपीएफ को जशपुर से हटाने के संबंध में फिलहाल कोई पत्र शासन की ओर से नहीं आया है। पूर्व में आए पत्र में चुनाव तक सीआरपीएफ को यथावत रखने के संबंध में पत्र प्राप्त हुआ था। इसके बाद कोई भी संशोधित पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।
शंकर लाल बघेल, एसपी जशपुर

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