तीन साल से दिल्ली में अटका है तपकरा में स्नेक पार्क खोले जाने का प्रस्ताव

तीन साल से दिल्ली में अटका है तपकरा में स्नेक पार्क खोले जाने का प्रस्ताव

Murari Soni | Publish: Jul, 20 2019 11:51:25 AM (IST) Jashpur, Jashpur, Chhattisgarh, India

स्नेक पार्क के ड्राइंग डिजाइन में सुधार कर फिर प्रस्ताव भेजकर मंजूरी लेने की तैयारी में है वन विभाग

जशपुरनगर. जिले में स्नेक पार्क बनाने के प्रस्ताव को तीन सालों बाद भी दिल्ली के सेंट्रल जू अथॉरिटी से मंजूरी नहीं मिल पाई है। जिससे यह बहुप्रतीक्षित योजना अधर में लटकी हुई है। स्नेक पार्क के ड्राईग डिजाईन में सेंट्रल जू अथॉरिटी के द्वारा आपत्ति करने के कारण ही इसकी मंजूरी वन विभाग को नहीं मिल पाई है। वन विभाग के द्वारा आपत्ती का निराकरण कर दिए जाने के बाद इसकी मंजूरी विभाग को मिल जाएगी।
जशपुर जिला पूरे देश में नागलोक के नाम से जाना जाता है। सांपों की बहुतायत को देखते हुए जिले के तपकरा में स्नेक पार्क बनाने की महत्वपूर्ण योजना तैयार की गई थी। जिसे शासन की मंजूरी भी मिल चुकी है। लेकिन मंजूरी के दो साल बाद भी स्नेक पार्क का निर्माण अब तक शुरु नहीं हो सका है। स्नेक पार्क सह विष संग्रहण केंद्र बनने के बाद यह प्रदेश का पहला स्नेक पार्क होगा। यहां करीब 1 करोड़ की लागत से स्नेक पार्क, सर्पज्ञान केंद्र व विष संग्रहण केंद्र का निर्माण किया जाना है। ऐसे केंद्र वर्तमान में केवल त्रिवेंद्रम, पुणे, केरल, चेन्नई व बैंगलूरू में ही स्थित हैं। बताया जाता है कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी छत्तीसगढ़ रायपुर के द्वारा प्रेषित प्रस्ताव अनुशंसा के अनुसार राज्य कैंपा के स्टेयरिंग कमेटी की बैठक के एपीओ वर्ष 2015-16 में स्वीकृत बजट के अंतर्गत सर्प ज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दिया गया है।
करीब 6-7 साल पहले जुलाई माह में रायपुर में हुई राज्य क्षतिपूर्ति वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण की बैठक में तात्कालीन मुख्य सचिव ने तपकरा में सर्प विष संग्रहण केंद्र के लिए एकीकृत कार्ययोजना बनाने के मौखिक निर्देश दिए थे। केंद्र में सांपों का विष निकालकर उसे संग्रहित करने एवं इसके लिए राष्ट्रीय स्तर के सर्प विशेषज्ञों से भी सलाह लेने की बात कही गई थी। लेकिन यह बात केवल बैठक तक ही सिमट कर रह गई थी। इसके लिए शासन से कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए। जिससे योजना अधर में लटक गई थी। जिसके बाद लोगों की मांग पर अब फिर इसके लिए प्रयास शुरु किया गया।

जिले में पाए जाते हैं इन प्रजातियों के सांप : जिले के फरसाबहार, पत्थलगांव, तपकरा, बागबहार, कोतबा, कांसाबेल व बगीचा क्षेत्र में सांप बहुतायत में पाए जाते हैं। यहां कॉमन करैत, बैंडेड करैत, नाग, वाइपर, ग्रीन पिट वाइपर सहित विषैले सांपों की करीब 6-7 प्रजाति पाई जाती है। जिनमें करैत और नाग की संख्या अधिक है। इसके अलावा विषहीन सर्पों में धमना (रेट स्नेक), सेंड बोआ, कॉपर हेडेड ट्रिनकेट, कीलबैक, वाटर स्नेक व अन्य प्रजाति के सांप भी पाए जाते हैं। हर साल इन क्षेत्रों में सर्पदंश से कई व्यक्तियों की मौत हो जाती है।
विभाग कर चुका है पूरी तैयारी : विभाग ने स्नेक पार्क व सर्प विष संग्रहण के लिए अपनी पूरी तैयारी कर ली है। वन विभाग के द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार एअर कंडीशनर स्नेक पार्क व सर्प विष संग्रहण केंद्र भवन, एक फारेस्ट गार्ड क्वार्टर, सांप पकडऩे के उपकरण खरीदे जाएंगे। संबंधित स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाएगा। लाइटिंग और टेंप्रेचर कंट्रोलर, सीसी टीवी कैमरे, फस्र्ट एड व एंटी स्नेक वेनम की व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्थाएं की जाएंगी।
स्नेक पार्क बनने से आएगी जागरुकता : स्नेक पार्क व सर्प विष संग्रहण केंद्र बनने से जिले में सांपों का संरक्षण एवं विष संग्रहण हो सकेगा। आम लोग सांपों के बारे में करीब से जान सकेंगे। प्रशिक्षित कर्मचारी प्रशिक्षण देंगे। लोगों में सांपों व सर्पदंश के प्रति जागरूकता आएगी। जीव विज्ञान के विद्यार्थियों को रिसर्च व शोध के अवसर प्राप्त हो सकेंगे। इसके अलावा स्नेक पार्क से पर्यटन की दृष्टि से जिले को अलग पहचान मिलेगी एवं राजस्व की आमदनी भी होगी।

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