प्रसव पीड़ा से तपड़ रही महिला को एंबुलेंस तक पहुंचाने एक किलोमीटर पैदल चले लोग

गावों में पंहुचने के लिए सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

By: Murari Soni

Published: 07 Jul 2019, 11:12 AM IST

जशपुरनगर. जिले के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के आभाव से जूझ रहे हैं। गावों में पंहुचने के लिए सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन गांवों में अपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस तक नहीं पंहुच पाता है, जिसके कारण गांव से मरीजो को अस्पताल तक ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सड़क नहीं होने की स्थिति में १०२ और १०८ के कर्मचारी सूचना मिलने पर मौके के लिए रवाना तो हो जाते हैं, लेकिन सड़क के कारण वे मरीज के घर तक नहीं पंहुच पाते हैं। जिसके कारण मरीज के परिजनों के साथ-साथ १०२ और १०८ के कर्मचारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ जाता है।
ऐसे ही एक और मामले में शुक्रवार को पत्थलगांव विकासखंड के गांव पडंरीपानी कोईलारभद गांव से एक ग्रामीण ने अपनी गर्भवती पत्नी को अस्पताल ले जाने के लिए १०२ में काल किया था।
काल करने के बाद अपने समय में १०२ के कर्मचारी गांव के लिए रवाना हो गए। लेकिन ग्रामीण के घर तक जाने के लिए सड़क नहीं होने के कारण १०२ को ग्रामीण के घर से १ किलोमीटर दूर ही रुकना पड़ा और गर्भवती महिला को अस्पताल पंहुचाने के लिए उनके द्वारा महिला को स्ट्रेचर के माध्यम से १ किलोमीटर पैदल चलने के बाद गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल पंहुचाया जा सका।
जिले के कई गांवो में आज भी बुनियादी सुविधाओं का आभाव है। बुनियादी सुविधाओं का आभाव होने से ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन गांवों की मुख्य समस्या सड़क और पुल की है। गांव तक सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को आवागमन करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे ही बुनियादी सुविधा के आभाव से जिले के कई गांव आज भी जूझ रहे हैं। जहां के ग्रामीणों के बीमार पडऩे पर उन्हें एंबुलेंस के बदले खाट में लेकर अस्पताल जाना पड़ता है क्योकि उस गांव में आज तक सड़क और पुल का निर्माण नहीं हो पाया है।
जिसके कारण उनके गांव में ना तो एंबुलेंस पंहुच पाता है और ना ही १०८ पंहुच पाता है। इन गांवों में यदि कोई ग्रामीण गंभीर रुप से बीमार हो जाए तो इस गांव में ना तो १०८ पंहुच सकता है और ना ही एंबुलेस पंहुच पाता है। ऐसे में गांव के लोगों को मरीज को खाट में या फिर १०२ या १०८ के स्ट्रेचर के माध्यम से उनके एंबुलेंस तक लाया जाता है।
गर्भवती महिला को स्ट्रेचर में लेकर १ किलोमीटर चले
शुक्रवार को जिले के पत्थलगांव ब्लाक के पंडरीपानी कोईलारभद गांव निवासी सबनम पति सुखद (३०) को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। प्रसव पीड़ा शुरु होने के बाद महिला के परिजनों ने तत्काल इसकी सूचना पत्थलगाव महतारी एक्सप्रेस 102 के कर्मचारी को दी। कर्मचारियों को सुबह ७ बजकर ४० मिनट में सूचना मिलते ही पत्थलगांव से 25 किलोमीटर दूर महतारी एक्सप्रेस के कर्मचारी पायलट दिलबोध भगत एवं ईएमटी तमन्ना शर्मा तुरन्त केस लेने के निकल गए। लेकिन वे गर्भवती महिला के घर तक नहीं पंहुच सके क्योंकि उनका घर कच्चे रास्ते मे था। जहां बारिश होने के कारण घर तक गाड़ी नहीं जा सकती थी। इस दौरान महिला की प्रसव पीड़ा बहुत बढ गई थी और वह एम्बुलेंस तक चल कर नही आ सकती। जिसके देखते हुए ईमटी व पायलेट ने उसे एम्बुलेंस के स्ट्रचर से एंबुलेंस तक ले जाने पर विचार किया और मरीज को पायलेट और उसके परिजनों की सहायता से १ किलोमीटर दूर तक पैदल सफर कर उसे एंबुलेंस तक पंहुचाया और उसे डूमरबहार के उप स्वास्थ केन्द्र में भर्ती करा कर उसका प्रसव कराया गया। प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा दोनो ही स्वस्थ्य हैं।

Murari Soni
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