बेहतरीन परिणाम आने से उत्साहित वन विभाग करेगा चाय बगान का विस्तार

स्व सहायता समूह अब तक पांच हजार पैकेट्स से ज्यादा चायपत्ती मार्केट में बेच चुकी है

By: Amil Shrivas

Published: 19 Jan 2019, 10:51 AM IST

जशपुरनगर. टमाटर, आलू, मिर्च, टाऊ व रामतिल की फसलों के बाद जशपुर जिला चाय उत्पादन में भी प्रदेश व देश में अपनी पहचान बना रहा है। यहां के सरकारी चाय बगान सारुडीह में चाय की प्रोसेसिंग व उत्पादन बढऩे से उत्साहित वन विभाग अब चाय बगान के विस्तार की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए मनोरा विकासखंड के कांटबेन एवं एक अन्य गांव में २०-२० एकड़ की जमीन चाय बगान के लिए चिन्हांकित की जा रही है। जिसके लिए वहां आस-पास के किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। जल्द ही इस क्षेत्र में भी एक और चाय बगान लहलहाने लगेगी। सारुडीह की चाय में प्रोसेसिंग, पैकेजिंग सब हाथ से होता है।
यहां की चायपत्ती को करीब चार माह पहले जब हाई क्वालिटी पैकेजिंग कर मार्केट में उतारा गया, तो हाथों हाथ पूरी चायपत्ती बिक गई। वन विभाग के चाय बागान प्रभारी सुरेश गुप्ता के अनुसार स्व सहायता समूह अब तक 5 हजार पैकेट्स से ज्यादा चायपत्ती मार्केट में बेच चुकी है। शहर से करीब 6 किलोमीटर दूर सारुडीह में वन विभाग ने चाय बगान लगाया है। जिसके संचालन की जिम्मेदारी स्व सहायता समूह की है। इस चाय बगान में चायपत्तियों की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का काम इसी साल शुरु हुआ है। पहली प्रोसेसिंग व पैकेजिंग के बाद चाय के जो ट्रायल पैकेट्स मार्केट में उतारे गएए उसमें चाय के जले होने जैसा स्वाद आ रहा था। ग्राहकों से फीडबेक लेकर वन विभाग ने इस पर काम किया तो पता चला कि चायपत्तियों में अवशोषण का गुण होता है। चाय की प्रोसेसिंग में स्व सहायता समूह द्वारा चूल्हा जलाया था। लकड़ी के इस चूल्हे का धुआं आसपास फैलता था। इसलिए चाय में जले हुआ सा स्वाद आता था। इसमें सुधार के लिए विभाग ने बड़ा चूल्हा बनवाया और धुआं बाहर निकालने के लिए इसमें एक चिमनी भी लगाई। अब प्रोसेसिंग वाले स्थान पर ना तो खुशबू है और न ही बदबू। जिससे अब चायपत्ती में बेहतरीन खुशबू आ रही है।

2013-14 में की गई थी स्थापना : सारुडीह में चाय बागान की स्थापना 2013-14 में की गई थी। इसके लिए ग्रामीणों से 20 एकड़ जमीन को वन विभाग ने लीज पर लिया था, तो वे मुआवजा मांगने लगे और चाय बागान की देखरेख बंद कर दी। 2016 में राष्ट्रीय आजीविका मिशन में इसमें असफलता मिली। तीसरी कोशिश में मनरेगा में जोडक़र उत्पादन किया तो सफलता मिल गई। अब यहां से बेहतरीन क्वालिटी की चाय का उत्पादन होने से विभाग के अधिकारी भी उत्साहित हैं। चाय के उत्पादन से और भी लोगों को रोजगार मिले और जिले की एक नई पहचान बने इसके लिए वन विभाग द्वारा और 20 एकड़ जमीन का चिन्हांकन किया जा रहा है। जहां चाय का उत्पादन किया जा सके। साथ ही चाय उत्पादन से जोडऩे और किसानों को अतिरिक्त आमदनी का जरिया मुहैया कराने के लिए उन्हे प्रेरित भी किया जा रहा है।
& चाय बगान के विस्तार की योजना तैयार की गई है। इसके लिए मनोरा विकासखंड में ४0 एकड़ की जमीन का चिन्हांकन किया जा रहा है। जहां किसानों को प्रेरित कर वहां भी चाय बगान स्थापित किया जा सके।
जाधव श्रीकृष्ण, डीएफओ

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