पिता सरकारी केस में फंसे तो बेटी ने जज बनने का लिया था संकल्प

पिता सरकारी केस में फंसे तो बेटी ने जज बनने का लिया था संकल्प

Amil Shrivas | Publish: Sep, 10 2018 06:20:16 PM (IST) Jashpur Nagar, Chhattisgarh, India

मुकदमे का फैसला सुनाकर याद करती हैं पुरानी बातें

राजेश अग्रवाल/ पत्थलगांव. इच्छा शक्ति प्रबल हो तो लक्ष्य पाने मे आने वाली कठिनाई से लड़ा जा सकता है, कमजोर हौसले अक्सर घर की चार दिवारी के पीछे घुटकर रह जाते हैं। अपने पिता को सरकारी केस की उलझनो में फंसे देखने के बाद एक बेटी ने बचपन मे न्यायाधीश बनने का संकल्प ले लिया, यह संकल्प ऐसा जुनून बना की आखिरकार आदिवासी बाला ने चतुर्थ वर्ग न्यायाधीश बनकर अपने सपने साकार कर लिए। पिछले कुछ वर्ष पहले पत्थलगांव क्षेत्र के सुदुर वनवासी अंचल मे रहने वाली आदिवासी छात्रा गायत्री पैंकरा के सामने उसके पिता एक सरकारी केस में फंसने के बाद यूं ही कह दिए कि घर में कोई कानून का पढ़ा लिखा होता तो आज उन्हें सरकारी केस के दांव पेच मे उलझना नहीं पड़ता। इस बात को सुनने के बाद छात्रा गायत्री पैंकरा ने कानून की पढ़ाई कर इस क्षेत्र मे उंचा मुकाम पाने की ठान ली। उसके द्वारा अपनी प्रारंभिक शिक्षा ब्लाक के पतराटोली जैसे एक ग्रामीण अंचल के स्कूल मे हासिल की,उसके बाद ये माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने गांव के ही पंडरीपानी स्कूल मे दाखिला लिया। जहां अपनी दसवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद ये कांसाबेल के हाईस्कूल से बारहवी की परीक्षा उत्तीर्ण की और अपनी स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के लिए उसने अंबिकापुर के होलीक्रॉस महाविद्यालय का चयन किया,जहां से उसने वर्ष 2014 मे स्नातकोत्तर की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली और वहीं से बीए, एलएलबी की भी पढ़ाई पूरी की, बाद में ये बिलासपुर जाकर छत्तीसगढ़ न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी करते हुए उसे भी अच्छे अंको से उत्तीर्ण कर लिया। आज सुदुर अंचल की रहने वाली छात्रा गायत्री पैंकरा अंबिकापुर सत्र न्यायालय मे चतुर्थ वर्ग न्यायाधीश के पद पर रहकर अपनी सेवा दे रही है।
सफलता का कोई शार्टकट नहीं : गायत्री पैंकरा की राह आसान नहीं थी पढाई करने के दौरान उन्हे आभाव एवं रिश्तेदारो के ताने सहने पड़े। उसके अनुसार रिश्तेदार उन्हे कानून की पढ़ाई कर वकील बनने मे कोई खास बात ना रहने की सलाह देते थे। लेकिन उसकी चाह तो वकील के पेशे से भी कही और आगे की थी। ये आज अपने आदिवासी अंचल की छात्राओ को संदेश देकर कहती है कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता,उनका कहना है कि पढ़ाई के प्रति सजग रहने से रास्ते मे आने वाली कठिनाईयों को हस्ते-हस्ते पार किया जा सकता है और मंजिल पाई जा सकती है।
एक दर्जन गांव के लोगो ने किया सम्मानित : वनवासी अंचल की बेटी गायत्री पैंकरा के दृण निश्चय के बाद चतुर्थ वर्ग न्यायाधीश बनने से ब्लाक की एक दर्जन गांव के लोगो ने गायत्री पैंकरा के माता-पिता व छोटी बहन को सम्मानित किया। अपने न्यायिक कार्यो की वजह से इस सम्मान कार्यक्रम में गायत्री पैंकरा उपस्थित नहीं हो सकी। उनकी जगह यहां उनकी छोटी बहन व पिता श्रवण साय पैंकरा मौजुद थे। इस दौरान यहा मौजुद चंदागढ के सरंपच रोशन प्रताप सिंह ने कहा कि गायत्री पैंकरा की प्राथमिक शिक्षा आसान नहीं थी। स्कूल कालेज तक सायकल से सफर तय करना आसान नहीं था। लेकिन उनके भीतर पढऩे व कुछ कर गुजरने की चाह के आगे कोई भी बाधा टीक ना सकी। न्यायिक सेवा में जाने के लिए इनकी जी तोड़ मेहनत की बदौलत ही सीजी ज्यूडिशियल सविर्सेज की परीक्षा उत्तीर्ण कर आज ये न्यायाधीश बनी है।

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