सफलता पाने मस्तिष्क को करें रॉकेट लांचर की तरह एक्टिव : ध्रुव

आठ विकासखण्डों में शिक्षा गुणवत्ता में उन्नयन के लिए विशेष उन्मुखीकरण व कॅरियर गाइडेंस की कार्यशाला हो रही आयोजित

By: Amil Shrivas

Published: 19 Jan 2019, 10:37 AM IST

जशपुरनगर. आगामी बोर्ड परीक्षाओं को दृष्टिगत रखते हुए जिला प्रशासन की पहल पर जिले के 8 विकास खण्डों में शिक्षा गुणवत्ता में उन्नयन हेतु विषय आधारित विशेष उन्मुखीकरण एवं कैरियर गाइडेंस की कार्यशाला आयोजित की जा रही है। शुक्रवार को कार्यशाला दुलदुला विकास खण्ड के कम्युनिटी हॉल में आयोजित की गई। जिसमें विकास खण्ड दुलदुला अंतर्गत संचालित विभिन्न शासकीय, अशासकीय एवं अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्थाओं से कक्षा 10 वीं एवं 12 वीं के 600 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी बीआर धु्रव ने कहा कि सपनों को हकीकत में बदलने के लिए विद्यार्थियों को चाहिए कि वे कर्म करें, परिस्थितियों से सामना करने का साहस पैदा करेंए विषयगत समस्याओं को फेस करना हर स्टूडेंट्स के लिए चुनौती होता है लेकिन इच्छाशक्ति एवं आत्मविश्वास के बल पर सफलता के शिखर पर पहुंचा जा सकता है। उन्होंने इस कार्यशाला में शिक्षार्थियों को विषयों पर अपना ध्यान केंद्रित करने को कहा एवं साथ ही मनोवैज्ञानिक दवाबों से बचने की बात कही। उन्होंने इस कार्यशाला में परीक्षा पूर्व तक शिक्षकों को महत्वपूर्ण विषयों अंग्रेजी, रसायन शास्त्र, भौतिक शास्त्र, गणित जैसे विषयों को बेहतर तरीके से विश्लेषण कर विद्यार्थियों को मानसिक रूप से परीक्षा के लिए तैयार करने के लिए मार्गदर्शन एवं निर्देश दिए।

कार्यशाला में विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी दुलदुला, विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी कुनकुरी, सहायक विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी, बीआरसी, एबीपीओ सहित विभिन्न संस्थाओं के संस्था प्रमुख एवं प्रभारी शिक्षक उपस्थित थे।
कार्यशाला में एक्सपट्र्स ने दिए सक्सेस मंत्र : कार्यशाला में विभिन्न विकास खण्डों से आए विषय विशेषज्ञों ने सफलता के मानक बिंदुओ की जानकारी दी। उन्होंने परीक्षा पूर्व तक विषय आधारित समस्याओं को दूर करने के लिए आवश्यक सुझाव दिए एवं विद्यार्थियों के मन मस्तिष्क में उठे शंकाओ के समाधान पर जोर दिया। कार्यशाला में स्टूडेंट्स के सवालों का जबाब देते हुए अंग्रेजी विषय के विशेषज्ञ शिव प्रसाद राम ने कहा कि परीक्षा के दिनों में विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने मन एवं मस्तिष्क में बाह्य विचारों को हावी न होने दें, सफलता तभी संभव है जब मस्तिष्क को रॉकेट लांचर की तरह एक्टिव किया जाए, उन्होंने यह भी कहा कि सपने हर कोई रात के अंधेरे में देखा करतें हैं, शिक्षार्थियों को चाहिए कि वे दिन में सपने देखें एवं एक लक्ष्य निर्धारित कर अपने सपनों को हकीकत में बदलने का प्रयास करें। सपनों का वास्तविक प्रतिबिंब तभी संभव है जब स्टूडेंट्स अपने कार्यों को प्राथमिकता दें। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार एक विद्यार्थी को अपने कैरियर का चुनाव करना चाहिए। इस कार्यशाला में उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिस्पर्धा हर स्टूडेंट्स के लिए काफी अहम होता है।

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