नक्शे में तो रहता है हार्वेस्टिंग सिस्टम, पर मकान बनाते समय भूल जाते हैं लोग

नक्शे में तो रहता है हार्वेस्टिंग सिस्टम, पर मकान बनाते समय भूल जाते हैं लोग

Anil Kumar Srivas | Publish: Mar, 14 2018 02:02:58 PM (IST) Jashpur Nagar, Chhattisgarh, India

जल संरक्षण की जांच पर विभाग की अनदेखी, वर्षा के जल को सहेजने की नहीं हो रही कोशिश

जशपुरनगर. वाटर लेबल बढ़ाने के लिए नए भवनों के निर्माण की अनुमति लेते समय वाटर हार्वेस्टिंग नक्शा में ही पास किया जाता है। इसके अभाव में मकान बनाने की अनुमति नहीं मिलती है। लेकिन अनुमति मिलने के बाद वे इसे बनाना ही भूल जाते हैं। वहीं नगर पालिका के अधिकारी भी इसे अनदेखी कर देते हैं और भवन बनाने की अनुमति देने के बाद वे यह चेक भी नहीं करते कि नव निर्मित भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बना है या नहीं। जल संकट से उबरने के लिए भूमि का जल स्तर बढ़ाने शासन ने पहले से ही शासकीय और गैर शासकीय सभी भवनों के निर्माण में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने को अनिवार्य कर दिया है। शहर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए शुल्क जमा करने के बाद ना मकान मालिक इसका स्ट्रक्चर बनवा रहे हैं और ना ही पालिका इसमें ध्यान दे रहा है। शासन ने बीते साल रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं बनाने वालों भवन स्वामियों से विलंब शुल्क लेकर इसके निर्माण का आदेश दिया था लेकिन जल सरंक्षण के इन प्रयासों के लिए आगे कोई काम नहीं हो सका है। वाटर हार्वेस्टिंग के लिए पालिका के द्वारा मकान मालिक से ५५ रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से शुल्क लिया जाता है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से जो नक्शा एप्रूव कराया जाता है। उसमें भी इस रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर का उल्लेख होता है। इसी के आधार पर भवन अनुज्ञा जारी कर नगरपालिका प्रशासन के द्वारा भी इस मद में राशि जमा कर जल सरंक्षण की खानापूर्ति कर ली जाती है। भवन निर्माण के लिए नक्शा एप्रुव हो जाने के बाद मकान मालिक अपना भवन निर्माण तो पूर्ण कर लेते हैं। लेकिन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाना ही भूल जाते हैं। भूजल सरंक्षण के लिए शासन ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए नियम कड़े किए थे और नगरीय प्रशासन ने भी आदेश जारी किया था। इसमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनाने वाले भवन स्वामियों से प्रति १०० वर्ग मीटर एरिया के लिए १ हजार रुपए सालाना की दर से पेनाल्टी लेने को कहा था लेकिन जल सरंक्षण के लिए अधिकारियों ने यह आदेश भी भूला दिया। पालिका क्षेत्र में हर साल १५० से २०० नए मकानों का निर्माण हो रहा है। यदि इन मकानों की जांच की जाए तो इसकी सच्चाई सामने आ जाएगी। शासन के द्वारा शासकीय एवं गैर शासकीय भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिए जाने के बाद शहर के सभी शासकीय भवनों में इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
भू जलस्तर कम होने से पेयजल संकट - निजी भवनों के में इस सिस्टम को लागू करने में अनदेखी की जा रही है। इस दौरान अत्यधिक गर्मी की वजह से नगर पालिका क्षेत्र के कई वार्ड की भूमि का जल स्तर नीचे चला गया है। कहीं कहीं सूखा इस कदर है, जहां कई सैकड़ों फीट गहराई करने के बावजूद पानी उपलब्ध नहीं है। उसका वर्तमान में नतीजा यह निकलकर सामने आ रहा है कि शहर के कई बोर गर्मी शुरू होते ही फेल हो जा रहे हैं। नए बिल्डिंग में वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण कराने से निश्चित ही भूमि के जल स्तर में थोड़ा सुधार की उम्मीद लगाई जा सकती है
हैंडपंपो के पास भी नहीं बन रहे सोख्ता गड्ढे- रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के साथ साथ विभाग के द्वारा सोख्ता गड्ढों पर भी ध्यान नहीं दी जा रही है। नगरपालिका क्षेत्र में जितने में भी हैंडपंप स्थापित किए गए हैं उन हैंडपंपो के पास सोख्ता गड्ढों का निर्माण नहीं कराया गया है। जिसके कारण हैंडपंपो के पास से फिजूल में बहने वाला पानी सड़को में या फिर हैंडपंपो के पास ही एकत्र होकर रह जाता है,जिसके कारण हैंडपंपो के आसपास गंदगी होना शुरू हो जाती है। विभाग के द्वारा यदि हैंडपंपो के पास सोख्ता गड्ढे का निर्माण करा दिया जाए तो वहां से निकलने वाले पानी से आसपास में गंदगी नहीं फैलेगी साथ ही सोख्ता गढ्ढा के रहने से भूजल स्तर में भी सुधार हो सकता है।

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