सीआरपीएफ बटालियन जशपुर से हो सकती है बस्तर शिफ्ट !

सीआरपीएफ बटालियन जशपुर से हो सकती है बस्तर शिफ्ट !
CRPF battalion might be shift Bastar from jashpur

सीआरपीफ को हटाने के पीछे की कोई बड़ी वजह फिलहाल अधिकारिक तौर पर निकलकर सामने नहीं आई है, लेकिन यह कयास लगाया जा रहा है कि जिले में माओवादी गतिविधियों में अंकुश लग जाने की वजह से यह फैसला लिया जा रहा है। 

मो. तनवीर आलम@जशपुरनगर. जिले में माओवादी गतिविधियां शांत हो जाने की वजह से जिले से सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) की 81वीं बटालियन को हटाए जाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। संपूर्ण जिले में इसकी चर्चा चल रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जशपुर में तैनात सीआरपीएफ की 81वीं बटालियन को राज्य सरकार बस्तर शिफ्ट करने पर विचार कर रही है।इसकी चर्चा शुरू होते ही जिले के लोगों में असुरक्षा का भाव भी आने लगा है। 

वहीं सीआरपीएफ को जशपुर से नहीं हटाए जाने के लिए भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री (सीएम) डॉ. रमन सिंह से भी चर्चा की गई है। सीआरपीफ को हटाने के पीछे की कोई बड़ी वजह फिलहाल अधिकारिक तौर पर निकलकर सामने नहीं आई है, लेकिन यह कयास लगाया जा रहा है कि जिले में माओवादी गतिविधियों में अंकुश लग जाने की वजह से यह फैसला लिया जा रहा है। और जहां (बस्तर में) सीआरपीएफ की अत्यधिक आवश्यकता है, वहां उन्हें तैनात करने की तैयारी की जा रही है। इस मामले की चर्चा सीआरपीएफ, जिला पुलिस बल के साथ आम जनता में भी हो रही है। 

सरहद के पार माओवादी धमक बरकरार 
जशपुर जिले में विगत दशक में हुए माओवादी वारदातों को लेकर जशपुर प्रभावित होने की बात लगातार सामने आई है। वर्तमान में सरहदी प्रदेश झारखंड में माओवादी वारदात की खबरें सामने आती रही हैं। हालांकि जशपुर में विगत दो साल वर्ष 2015 और 2016 अबतक में कोई बड़ी वारदात नहीं हुई है। इसलिए जिले को माओवादी वारदातों से शून्य मानने का खतरा मोल लिया जा रहा है। इसलिए जशपुर में पदस्थ सीआरपीएफ की 81वीं बटालियन सरकार के निशाने पर है और इसलिए सरकार उसे अन्यंत्र शिफ्ट करने की कवायद में जुटी है।

छ: स्थानों पर तैनाती
झारखंड सीमा से लगे जिले के छ: थाना और चौकी क्षेत्र में सीआरपीएफ की बटालियन इस वक्त अपनी सेवा दे रही है। जिसमें जशपुर बटालियन हेडक्वाटर, घोर माओवादी प्रभावित आरा चौकी, दुलदुला थाना, लोदाम, मनोरा, आस्ता और सन्ना शामिल है। इन सभी इलाकों से झारखंड की सीमा लगती है, जिसमें जनता खुद को सीआरपीएफ के होने से ही सुरक्षित मानती है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इन सीमावर्ती इलाकों में अब भी माओवादी संगठन की चहलकदमी होती रहती है।

जिले में हुई है पांच बड़ी माओवादी घटनाएं 
जशपुर जिले में सीआरपीएफ बटालियन को वर्ष 2009 में तैनात किया गया है। इससे पहले वर्ष 2006 में जिले में सबसे बड़ी वारदात आरा चौकी में हुई थी। करीब 60 की संख्या में हथियारबंद माओवादियों ने आरा चौकी को चारों तरफ से घेरकर गोली बारी की, जिसमें तीन पुलिस के जवान शहीद हुए थे। वहीं पुलिस को समर्पण कराते हुए हथियार लूटा गया था। इसके बाद गुमला में अजय बस को फूंकने, 2012 में आरा चौकी में पदस्थ सहायक आरक्षक सियाराम की औरापानी में हत्या, विनोद जैन के क्रशर मशीनों में आग लगाने उनके कर्मचारियों को अगवा करने के साथ ही वर्ष 2014 में आरा चौकी में दो लोगों की हत्या करने की वारदात प्रमुख रही है। इस घटना के बाद से विगत दो सालों में कोई छोटी या बड़ी घटना माओवादियों से जुड़ी नहीं हुई है।

  • सीआरपीएफ को जशपुर से हटाने के संबंध में फिलहाल कोई पत्र शासन की ओर से नहीं आया है - जीएस जायसवाल, एसपी, जशपुर
  • सीआरपीएफ को हटाने की सुगबुगाहट मिलने के बाद इस संबंध में मुख्यमंत्री से बातचीत की गई है। जिले की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीआरपीएफ को यहां से नहीं हटाने की मांग की गई है - केके राय, अध्यक्ष खाद्यी ग्रामोद्योग

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