ताश के पत्तों की तरह बिखर गई २० लाख की पुलिया

घटिया निर्माण: बारिश के कारण बर्बाद

By: Barun Shrivastava

Published: 24 Jul 2018, 08:08 AM IST

जशपुरनगर. जिले में हो रही लगातार बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। वहीं बीती रात हुई मूसलाधार बारिश में रनपुर क्षेत्र में बेलसुंगा नहर में बना पुलिया बारिश में बह गया, जिससे रोड पूरी तरह कट गया है और इससे करीब 10 गांवों के तकरीबन 15 हजार ग्रामीणों के आवागमन में परेशानी हो रही है। यह पुलिया करीब 20 लाख की लागत से तकरीबन 10 साल पहले बनाया गया था। बीते कुछ दिनों से जिले में हो रही बारिश ने यहां की जन जीवन पर बुरी तरह प्रभाव डाला है। जिले के नदी नाले उफान पर हैं। क्षतिग्रस्त पुल पुलियों के ढहने की आशंका बनी हुई है। जशपुर जिले के बेलसुंगा जलाशय के नहर में बनी पुलिया बीती रात मूसलाधार बारिश में पूरी तरह ढह गई। जिसके चलते रोड पूरी तरह कट गया है। जब रोड कटने की बात ग्रामीणों को पता चली, तो वे सोमवार की सुबह उसे देखने पहुंचने लगे। ग्रामीणों की नजर टूटी हुई पुलिया के मलबे पर पड़ी। ग्रामीणों ने देखा कि इस पुल के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। 20 मिमी गिट्टी की जगह 40 मिमी गिट्टी से पुल की ढलाई की गई थी। ढ़लाई के दौरान लगाए जाने वाले छड़ की मात्रा भी बहुत कम थी।
१५ गांव के लोगों को हो रही परेशानी : रोड कटने के कारण करीब 15 गांवों के लोगों को आवागमन करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वैकल्पिक मार्ग के रूप में ग्रामीण चराईखारा जोगबहरा मार्ग से आवागमन कर रहे हैं। जिसमें उन्हें करीब 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग भी बदहाल है। किसी तरह वे इस मार्ग को पार कर अपने गंतव्य की ओर आवागमन कर रहे हैं। ग्रामीणों ने पुलिया निर्माण की जांच की भी मांग की है।

जशपुर जिले के बेलसुंगा जलाशय के नहर में बनी पुलिया बीती रात मूसलाधार बारिश में पूरी तरह ढह गई। जिसके चलते रोड पूरी तरह कट गया है। जब रोड कटने की बात ग्रामीणों को पता चली, तो वे सोमवार की सुबह उसे देखने पहुंचने लगे। ग्रामीणों की नजर टूटी हुई पुलिया के मलबे पर पड़ी। ग्रामीणों ने देखा कि इस पुल के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। 20 मिमी गिट्टी की जगह 40 मिमी गिट्टी से पुल की ढलाई की गई थी। ढ़लाई के दौरान लगाए जाने वाले छड़ की मात्रा भी बहुत कम थी।

Barun Shrivastava Editorial Incharge
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