कभी देखी न होगी पशु-पक्षी की ऐसी दोस्ती, नजरों से ओझल होते ही चिल्लाने लगते हैं दोनों

एक पल के लिए भी दूर नहीं होता हंस बकरे का जोड़ा, हंस और बकरी की दोस्ती की खबर सुनकर देखने जुट रहे हैं लोग

By: Murari Soni

Updated: 25 Sep 2019, 09:42 PM IST

पत्रिका एक्सक्लुसिव

जशपुरनगर. आज के जमाने में एक सच्चा दोस्त मिल पाना बेहद मुश्किल होता है ऐसे में जशपुर में दोस्ती का एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है जिसे देखने लोग दूर दूर से पहुंच रहे हैं। ये दोस्ती इंसानों की नही बल्कि एक पशु और एक पक्षी की है।
जशपुर निवासी कैसर हुसैन के घर मे इन दिनों लोगों का तांता लगा हुआ है। कारण है उनके घर पर पल रहे बकरे-बकरियों और हंस की दोस्ती। हंस और बकरे-बकरियों की दोस्ती के किस्से जैसे जैसे मशहूर हो रहे हैं, वैसे वैसे इनकी दोस्ती देखने लोग इनके घर पर देखने आ रहे हैं। पेशे से शिक्षक कैसर हुसैन बड़े पशुपालक है और इनके घर मे एक दर्जन से अधिक प्रकार के जानवर और पक्षी पाले गए हैं, लेकिन इन दिनों आकर्षण का केंद्र बने हैं जिनके घर मे पल रहे हंस, जिसे कलहंस भी कहते हैं और बकरे बकरियां।
ऐसे घुल मिल गए कि सब हैरान
कैसर हुसैन के हंस और बकरे बकरियां एक साथ एक कमरे में रहते हैं। एक साथ खाते हैं एक साथ सोते हैं और एक साथ घास चरने के लिए भी बाहर जाते हैं। हंस और बकरे-बकरियां एक पल के लिए भी एक दूसरे से अलग नही रह सकते। जब कभी हंस इनसे अलग हो जाता है तो वो जोर जोर से चिल्लाता है और फिर पशुपालक को हंस को बकरे बकरियों के पास पहुंचाना पड़ता है। इनकी दोस्ती ऐसी है कि बकरे किसी बर्तन में खाना खा रहे हैं और उसमें हंस भी आकर दाना खाने लगे तो बकरे या बकरियां इसका बिल्कुल भी विरोध नही करते, लेकिन अगर उनके बर्तन में किसी और बकरे या बकरियों ने दाना खाने का प्रयास किया तो वो उसे भगा देतें हैं।
एक साथ रहते चरते हैं अलग अलग प्रकृति के पशु पक्षी
दो अलग अलग व्यवहार और अलग अलग प्रजाति के पशु और पक्षी की इस पूरी दोस्ती की दास्तां तीन माह पुरानी है। पशुपालक कैसर हुसैन के घर दो हंसो का जोड़ा जिसमे एक मादा और एक नर हंस काफी दिनों से पल रहे थे। लेकिन इसी दौरान बीमारी से मादा हंस की मौत हो गई जिसके बाद नर हंस अकेला पड़ गया और उसने खाना पीना बिल्कुल छोड़ दिया। जिसके बाद पशुपालक ने देखा कि कुछ दिनों बाद हंस बकरे-बकरियों के साथ घुल मिल गया। हंस उनके साथ चरने जाने के साथ उनके साथ ही पूरा समय बिताने लगा। अब नर हंस मादा हंस की कमी को भूलकर बकरे-बकरियों के साथ बड़ी मस्ती के साथ अपना जीवन गुजार रहा है।

कभी देखी न होगी पशु-पक्षी की ऐसी दोस्ती, नजरों से ओझल होते ही चिल्लाने लगते हैं दोनों

जब मादा हंस की मौत हुई तो वियोग में हंस ने खाना पीना बिल्कुल छोड़ दिया था, लेकिन कुछ दिनों के बाद हंस हमारी बकरियों के झुण्ड के साथ दिखाई देने लगा और अब तो ये हाल है कि हंस, बकरियों के साथ चरने खाने पीने के अलावा एक पल के लिए भी दूर नहीं होता है।
कैसर हुसैन, पशुपालक


दोनो पशु-पक्षियों का आहार-व्यवहार बिल्कुल अलग अलग है, लेकिन बच्चे रहते समय से साथ साथ रहने की आदत से दोनो अलग अलग प्रजाति के पशु पक्षी घुल मिलकर रह रहे हैं। हंस की इस प्रजाति को कलहंस और जीस भी बालते हैं।
डॉ. उमेश किंडो, पशु चिकित्सक

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