लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं का ख्याल रखने वाला जिला अस्पताल खुद बीमार

कभी डाक्टर मरीजों को करते हंै रेफर तो कभी बिना बताए अस्पताल से चले जाते हैं मरीज

By: Amil Shrivas

Updated: 15 Nov 2018, 11:25 AM IST

जशपुरनगर. हजारों लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल रखने और उपचार का जिम्मा जिला सामान्य अस्पताल पर है, पर यहां संसाधनों का अभाव, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और अन्य सुविधाओं में कमी सहित कई कारणों से मरीज को रेफर तो कभी लामा होना पड़ता है। बीते 6 माह में जिला अस्पताल से 150 भर्ती मरीज लामा हो चुके हैं। यह आंकड़ा अप्रैल 2018 से सितंबर 2018 तक का है। लामा का अर्थ होता है 'लेफ्ट अगेंस्ट मेडिकल एडवाइसÓ, अर्थात बिना डॉक्टर की सलाह पर घर या दूसरे अस्पताल चले जाना। भर्ती मरीज का बिना डॉक्टर की सलाह भर चले जाने के पीछे कई कारण हैं। कई बार मरीज को लगता है कि अस्पताल में उनका ट्रीटमेंट सही तरीके से नहीं हो रहा है, डॉक्टर उनकी पर्याप्त देखभाल नहीं कर रहे हैं या उनको ईलाज में जो सुविधा चाहिए, वह अस्पताल में नहीं मिल रहा है, तो मरीज अपनी मर्जी से घर या दूसरे निजी अस्पतालों में चले जाते हैं। कई बार ऐसा भी देखने में आता है कि अस्पताल में भर्ती मरीज को लगता है कि वह ठीक हो चुका है और उसे अनावश्यक रूप से अस्पताल में भर्ती रखा गया है, या उनकी अस्पताल से ज्यादा बेहतर देखभाल घर में हो सकती है, ऐसी स्थिति में भी मरीज बिना सलाह के चले जाते हैं। कई बार भर्ती मरीज डिस्चार्ज की प्रक्रिया लंबी होती है, यह सोचकर भी लामा हो जाते हैं। जिला अस्पताल के वार्डों में लामा मरीजों का रजिस्टर मेंटेन किया जाता है, पर उसका टोटल नहीं किया जाता।

अस्पताल से जाना हो सकता है घातक: स्वास्थ्य के बारे में चिकित्सक बेहतर जानते हैं। मरीज को कब तक अस्पताल में भर्ती रखना है। डिस्चार्ज करने के बाद कितने दिनों के लिए कौन सी दवाई देनी है, जिससे मरीज पूरी तरह रिकवर हो सके, इसका पता चिकित्सकों को रहता है। पर अस्पताल से चले जाने के बाद मरीजों को यह जानकारी नहीं रहती है कि उसके स्वास्थ्य के लिए अभी कौन सी दवाई जरूरी है। दवाई कितने दिनों तक लेनी है। इसके अभाव में बाद में मरीज का स्वास्थ्य और बिगड़ जाता है।

अस्पताल में मौजूद गार्ड भी नहीं देते ध्यान : जिला अस्पताल में सुरक्षा की दृष्टि से नगर सैनिको की ड्युटी लगाई गई है। ये नगर सैनिको को काम अस्पताल में आने जाने वालों की निगरानी करना है। लेकिन प्राय: देखा जाता है कि नगर सैनिको के द्वारा अपने वाहन लेकर आने वाले लोगों की गाड़ी को पार्किंग कराने में लगे रहते हैं और हमेशा वाहनों के आसपास ही नजर आते हैं। जबकी जिला अस्पताल में इंट्री करने के लिए दो गेट बने हुए हैं, जिसमें से एक गेट को रात होते ही सुरक्षा की दृष्टि से बंद कर दिया जाता। एक गेट जो खुला रहता है उसमें भी नगर सैनिको की तैनाती नहीं रहती है। पूर्व में एक दो बार जिला अस्पताल में हंगामा होने के बाद ही यहां नगर सैनिको की ड्यूटी लगाई गई है।
अप्रैल से सितंबर तक में 150 भर्ती मरीज लामा हुए हैं। डॉक्टर की सलाह के बगैर अस्पताल से जाना मरीजों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। मरीज पूरी तरह डिस्चार्ज होकर एवं डॉक्टर की सलाह पर ही अस्पताल से जाएं।
डॉ. अनुरंजन टोप्पो, आरएमओ जिला अस्पताल

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