...तो कोटे की निलम्बित दुकान भी है फायदे की मशीन

...तो कोटे की निलम्बित दुकान भी है फायदे की मशीन
Ration shop

जिलापूर्ति विभाग और कोटेदार की मिली-भगत से चलता है खेल

जौनपुर. आप समझते होंगे कि कोटेदार की दुकान निलम्बित हो गई तो उसको घाटा हो गया। ऐसा नहीं है निलम्बित दुकान तो बिना टेंशन की फायदे की मशीन है। दुकान निलम्बित होते ही शुरू हो जाता है एकमुश्त कमीशन का खेल। ऐसे में नुकसान होता है तो केवल राशनकार्ड धारकों का, जिनकी सुनने वाला कोई नहीं।

जलालपुर विकास खण्ड के बीबनमऊ गांव के सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पर खाद्यान्न न देने तथा कालाबाजारी के आरोप में विगत कई महीनों से गांव की दूसरी दुकान पर निलंबित कर के अटैच कर दिया गया है। सूत्रों की माने तो यदि किसी ग्रामीण द्वारा संबंधित अधिकारी से शिकायत दर्ज कराई जाती है तो बकायदा जांच के आदेश जारी कर दिए जाते हैं और जांच के नाम पर सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। मांग पूरी होने पर कोटेदार से कहा जाता है कि तुम मेडिकल बनवा लो और दुकान को निलंबित कर दूसरी दुकान से अटैच कर दिया जाता है निलंबित दुकानदार दूसरे दुकानदार से अपना शेयर लेता रहता है कुछ महीनों बाद संबंधित अधिकारी द्वारा दुकान का नया प्रस्ताव मांगा जाता है। जब प्रस्ताव पारित होकर जाता है तब पुनः उसी दुकानदार को मेडिकल का सहारा लेकर दुकान दे दी जाती है। इस प्रकार से आंख मिचैली का खेल चलता रहता है बीबनमऊ की दूसरी दुकान का आलम यह है कि कोटेदार कभी खाद्यान्न वितरण के समय मौके पर उपस्थित ही नहीं रहता। उसने खाद्यान्न की निकासी कराकर बाकायदा कोटे को ठेके पर दे रखा है। उसके ठेकेदार दुकान की चैहद्दी को ताक पर रखकर जिला पूर्ति विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से न सिर्फ मनमानी तरीके से कोटा चलाते हैं, बल्कि खाद्यान्न वितरण न करके धड़ल्ले से उसकी कालाबाजारी भी करते हैं।
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