सूखे तालाब, पशु-पक्षियों की जान पर बनी

सूखे तालाब, पशु-पक्षियों की जान पर बनी
ponds dried

तालाब बनाने व भरने के नाम पर हुआ केवल धन का बंदरबांट

जौनपुर. रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून। मनुष्य के जीवन में पानी का महत्व क्या है यह कवि रहीम दास जी के द¨हे की इन पंक्तियों से आसानी से समझा जा सकता है। भीषण गर्मी में पानी की समस्या से सिर्फ मनुष्य ही नहीं पशु-पक्षी भी व्याकुल हैं। वजह, उनकी प्यास बुझाने वाले तालाब सूख गए हैं। प्रशासन की ओर से भी तालाबों को भरने का केवल जुमला भर उछाला गया, पर कुछ काम नहीं हुआ।

गर्मी के दिन में पानी की समस्या से जूझ रहे लोगों की समस्यायें बढ़ गयी है। यूं तो पेयजल की समस्या रोजाना की बात है, पर गर्मी में यह भीषण रूप धारण कर लेती है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो नदी तालाब का पानी सूखने के साथ ही हैण्डपम्प भी सूख जाते हैं। पीने का पानी न मिलने पर पशु पक्षी भी इस भीषण गर्मी से बेहाल हैं। तेज धूप एवं गर्मी से कुओं व तालाब से पानी सूख चुका है। सरकार के तमाम दावों व जल संवर्धन योजनाओं के बावजूद कुओं का जीर्णोद्वार नहीं हो पा रहा है, जबकि दशक भर पहले इन्हीं कुओं से लोगों की प्यास बुझती थी और किसानों की फसलें भी लहलहाती रहती थी।

लगातार गिरते भूगर्भ जल स्तर को नियंत्रित कर पानी की समस्या से निजात दिलाने के क्रम में शासन ने आदर्श तालाब का निर्माण कराना सुनिश्चित किया। इसके लिए केन्द्र सरकार द्वारा चलाई जा रही मनरेगा की तिजोरी का धन भी उड़ेल दिया गया, परन्तु ग्राम प्रधान व संबंधित अधिकारी आदर्श तालाब का आधा-अधूरा काम करवाने के बाद शेष पैसा हजम कर गये। नतीजा यह हुआ कि आदर्श तालाब तो पूरा हुआ नहीं और संबंधित लोग मालामाल हो गये और तालाब मात्र ग्रामीणों के लिए शौच स्थल बनकर रहे गये हैं।
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