जौनपुर में हो रहा शिक्षा का कारोबार, प्रशासन ने साधी चुप्पी

जौनपुर में हो रहा शिक्षा का कारोबार, प्रशासन ने साधी चुप्पी
education became business

30 बच्चों की संख्या की एक क्लास होनी चाहिए, परन्तु 60 बच्चों से कम की कोई क्लास नहीं

जौनपुर. जिले में कुकुरमुत्ते की तरह से माध्यमिक स्कूल उग आए हैं, जिनका न तो कोई रजिस्ट्रेशन है और न ही वो कोई नियम कानून को मानते हैं। पैसे कमाने की चाह में इन स्कूलों द्वारा बड़ी मात्रा में छात्रों का एडमिशन तो कर लाया जाता है, लेकिन बोर्ड की परीक्षा दिलाने के लिए छात्रों का नामांकन शहर से दूर दराज के गांवों में कराया है। छात्रों को दी जाने वाली सुख सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। जिससे अभिवावक के साथ साथ छात्रों का भी शोषण हो रहा है। सबकुछ जानते हुये भी जिला प्रशासन आंख बंद किये बैठा है।

बता दें कि शहर में इस समय बिना मान्यता के कॉन्वेंट स्कूल कुकुरमुत्तों की संख्या में खुल गए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित नियम कानूनों का पालन इनके द्वारा नहीं किया जाता। इन्हीं कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर शहर में माध्यमिक स्कूलों की बाढ़ सी आयी हुई है। शहर के ज्यादातर माध्यमिक स्कूलों के पास इंटरमीडिएट तक की शिक्षा देने की मान्यता नहीं है। कुछ के पास तो सिर्फ कक्षा आठ तक की ही मान्यता प्राप्त है, लेकिन वे इंटरमीडिएट की कक्षाएं चला रहे हैं। पैसे कमाने के चक्कर में ये स्कूल बड़ी संख्या में छात्रों का एडमिशन कर लेते हैं।

विभिन्न तरह के सुख सुविधाओं और पास कराने के नाम पर अभिवावकों से मोटी रकम भी वसूली जाती है। छात्रों और अभिवावकों को अंधेरे में रखकर बोर्ड की परीक्षा के लिए छात्रों का नामांकन दूर दराज के गांवों में करा दिया जाता है। इसका पता तब चलता है, जब छात्रों के हाथ में प्रवेश पत्र मिलता है।

कंप्यूटर, जनरेटर, लैब, लाइब्रेरी, अनुभवी अध्यापकों जैसी सुविधायें छात्रों को देने की बात कही जाती है। इन सुविधाओं के नाम पर अभिवावकों से एडमिशन और फीस के रूप में मोटी रकम भी वसूली जाती है। ये बात और है कि ये सुविधाएं भले छात्रों को न मिलती हो। शिक्षा के कानून की धज्जियां उड़ाते हुए ये विद्यालय अप्रशिक्षित अध्यापकों से शिक्षण कार्य करवाते हैं ।

मानक के अनुरूप, तीस बच्चों की संख्या की एक क्लास होनी चाहिए, परन्तु 60 बच्चों से कम की कोई क्लास नहीं होती। यानी की दोगुने की संख्या में छात्र। किसी किसी स्कूल में तो 80 बच्चों की एक क्लास होती है। इससे आप अंदाजा तो लगा ही लेंगे की किस तरह का शिक्षण कार्य इन स्कूलों में चलता होगा। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग भी इसपर कोई सख्त क़दम उठाने की ज़हमत नहीं कर रहा। सम्बंधित विभाग द्वारा इन स्कूलों पर न कोई कार्रवाई  की जा रही है और न ही समय समय पर निरीक्षण।
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