कानून से भी नहीं मिल रहा सहारा, सड़कों पर दर दर भटकने को मजबूर हैं बुजुर्ग

कानून से भी नहीं मिल रहा सहारा, सड़कों पर दर दर भटकने को मजबूर हैं बुजुर्ग
कानून से भी नहीं मिल रहा सहारा, सड़कों पर दर दर भटकने को मजबूर हैं बुजुर्ग

Ashish Kumar Shukla | Publish: Jan, 26 2018 10:44:09 PM (IST) Jaunpur, Uttar Pradesh, India

केंद्र सरकार की तरफ से वर्ष 2008 में बनाई गई भरण पोषण नियमावली में बुजुर्गों की देखभाल का प्राविधान किया गया था, पर उसका असर नहीं

जावेद अहमद...
जौनपुर. बदकिस्मत बुजुर्गों की मदद को सरकार ने कानून भी बनाया लेकिन वह सिस्टम की अनदेखी का शिकार हो गया। माता-पिता को परेशान करने वाले कपूतों को सबक सिखाने के लिए दंड और जुर्माने का प्राविधान किया गया। सोचा गया कि इसका कुछ तो असर पड़ेगा, पर यहां पर भी बदकिस्मती आड़े आई। कानून फाइलों में दब गया और बुजुर्ग माता-पिता सड़कों पर दर दर भटक रहे हैं। उनकी तरफ कोई देखने वाला नहीं है।

जिदगी के अनमोल पल संतानों पर न्योछावर कर देने वाले हर माता पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे बुढ़ापे का सहारा बने। वैसे हजारों ऐसे भी हैं जो कि श्रवण कुमार की तरह सेवा करते हैं लेकिन सैकड़ों कपूत भी हैं। ऐसे कपूतों को सजा देने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से वर्ष 2008 में बनाई गई भरण पोषण नियमावली में बुजुर्गों की देखभाल का प्राविधान किया गया था। इसकी धारा सात व उपधारा एक के अधीन तहसील व जिला स्तर पर अभिकरण गठित करने के निर्देश दिए गए थे।

सितंबर 2016 में शासन स्तर से कड़ा कदम भी उठाया गया था और प्रदेश में भरण पोषण अधिनियम को प्रभावी बनाने के कड़े निर्देश जारी किए गए थे। व्यवस्था बनाई गई थी कि तहसील स्तर पर एसडीएम और जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता वाले अभिकरण में समाज के लोगों को भी शामिल किया जाए। संतानों से परेशान माता पिता अभिकरण में शिकायत करें और अभिकरण सुनवाई करे, जिसमें माता पिता का उत्पीड़न करने वालों को पांच हजार रुपये का जुर्माने के साथ ही तीन माह की कैद या फिर दोनों भुगतने पड़ सकते हैं।

इस कानून बनने के बाद बुजुर्ग माता पिता के आंखों में एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी लेकिन उनकी बदकिस्मती आड़े आई और न्याय मिलना तो दूर की बात जिले में ऐसा कुछ दिखता ही नहीं है। अभिकरण गठित हैं भी या नहीं किसी को कोई जानकारी नहीं है। सैकड़ों माता पिता दर दर भटकते रहते हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं होती है और उन्हें उनका हक नहीं मिल पाता है। अधिकारी कहते हैं कि भरण पोषण अधिनियम में माता पिता को हक दिलाने की व्यवस्था में तहसील स्तर से ही इसकी शुरुआत होती है। कानूनी जानकारों के अनुसार एसडीएम की अध्यक्षता में गठित अभिकरण में परेशान माता पिता अपनी शिकायत कर सकते हैं।

शिकायत को संज्ञान में लेकर एसडीएम नोटिस जारी कर माता पिता को परेशान करने वालों को बुलाएंगे और फिर समाज के लोगों के साथ उनके माता पिता के बीच बैठकर आपसी बातचीत से ही मामला निस्तारित कराने की कोशिश करेंगे और अगर बात नहीं बनती है तो पूरी सुनवाई की जाएगी फिर संतान पर जुर्माना लगाते हुए उन्हें सजा भी दी जा सकती है। अगर एसडीएम स्तर से माता पिता को न्याय नहीं मिल पाता तो वह जिला अधिकारी की अध्यक्षता में गठित अभिकरण में शिकायत कर सकते हैं।

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